गांव-कस्बों तक पहुंचेगा आंदोलन, योगेंद्र के बयान के बीच बिरला ने बताए नियम

मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और हाल ही में जारी वोटर लिस्ट पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को वापस लेने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन जारी है। ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) और कुछ अन्य संगठन लगातार इस मुद्दे पर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को घेर रहे हैं। इसी बीच, जाने-माने सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने इस विरोध प्रदर्शन और इससे जुड़ी संवैधानिक प्रक्रियाओं पर अपनी प्रतिक्रिया दी है।

‘दिल्ली से निकलकर गांवों तक पहुंचेगा आंदोलन’
योगेंद्र यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर इस विरोध प्रदर्शन का समर्थन करते हुए इसे एक स्वाभाविक आंदोलन करार दिया। उन्होंने लिखा, “हर आंदोलन शुरुआती दौर में उफनता है और फिर ठहरकर अपनी दिशा और गहराई तय करता है। किसी पहाड़ी नदी की तरह उसकी रफ्तार भले धीमी पड़े, लेकिन उसका विस्तार बढ़ता है।”
यादव ने आगे कहा कि ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहा यह आंदोलन भी अब दिल्ली से निकलकर देश के गांव-कस्बों तक पहुंचने और अपने सवालों को गहराई देने के दौर में है।
स्पीकर ओम बिरला: ‘प्रस्ताव आया तो तय प्रक्रिया अपनाई जाएगी’
दूसरी ओर, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया के बारे में स्पष्ट किया है। समाचार एजेंसी PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, गुरुवार (22 अक्टूबर 2026) को संसद भवन में पत्रकारों से बातचीत करते हुए बिरला ने कहा कि यदि विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कोई प्रस्ताव लाने का नोटिस फिर से देता है, तो उस पर नियमों के मुताबिक निर्धारित प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
उन्होंने स्पष्ट किया, “जब वे (प्रस्ताव) लाएंगे, तब हम प्रक्रिया अपनाएंगे। इसकी एक बाकायदा प्रक्रिया है। जिस तरीके से उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) के न्यायाधीश को हटाने की प्रक्रिया होती है, ठीक वैसी ही प्रक्रिया चुनाव आयुक्तों के मामले में भी अपनाई जाती है।” अध्यक्ष ने यह भी जोड़ा कि लोकतंत्र में प्रत्येक व्यक्ति को अपना मत और विचार रखने का पूरा अधिकार है।
विरोध प्रदर्शन और विवाद की मुख्य वजह क्या है?
दिल्ली और देश के अन्य हिस्सों में प्रदर्शनकारी लगातार मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि वोटर लिस्ट से जुड़े कामकाज (विशेष रूप से स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन या SIR) में भारी गड़बड़ियां हुई हैं और वे मतदाता सूची को 2024 से पहले की स्थिति में बहाल करने की मांग कर रहे हैं।
हालांकि, दूसरी तरफ चुनाव आयोग ने SIR प्रक्रिया में किसी भी तरह की धांधली के आरोपों को सिरे से खारिज किया है और कहा है कि सभी चुनावी प्रक्रियाएं पारदर्शी तरीके से पूरी की जा रही हैं।

