राम, कृष्ण और शिव के अस्तित्व पर सवाल उठाने वालों पर भड़के बाबा रामदेव

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शालिनी तिवारी
शालिनी तिवारी

योग गुरु बाबा रामदेव ने सनातन धर्म, हिंदू देवी-देवताओं और धार्मिक ग्रंथों को लेकर की जा रही कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। हरिद्वार के कनखल स्थित दिव्य योग मंदिर में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि सनातन धर्म के खिलाफ एक सुनियोजित साजिश के तहत भ्रम फैलाया जा रहा है।

बाबा रामदेव ने भगवान राम, कृष्ण और शिव पर हाल ही में की गई कुछ टिप्पणियों को झूठा करार देते हुए कहा कि धर्मग्रंथों की गलत व्याख्या करके सनातन परंपराओं को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है।

भगवान राम और माता सीता को मांसाहार से जोड़ने पर नाराजगी

प्रेस वार्ता के दौरान बाबा रामदेव ने कहा कि कुछ लोग सनातन धर्म के आराध्य देवी-देवताओं को लेकर भ्रामक और आपत्तिजनक बातें प्रचारित कर रहे हैं। उन्होंने भगवान राम और माता सीता को मांसाहार एवं मदिरापान से जोड़ने, भगवान श्रीकृष्ण की रासलीला की कथित गलत व्याख्या करने और भगवान शिव को नशे से जोड़कर प्रस्तुत किए जाने का कड़ा विरोध किया।

रामदेव ने कहा, “ऐसे प्रयास सनातन धर्म की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने वाले हैं। धर्मशास्त्रों, पुराणों और प्राचीन भारतीय ग्रंथों के संदर्भों में फेरबदल कर कई गलत धारणाएं फैलाई जा रही हैं।”

सनातन को कमजोर करने के लिए गढ़े गए नैरेटिव: रामदेव

सनातन विरोधियों के तर्कों पर सवाल उठाते हुए बाबा रामदेव ने कहा कि एक तरफ कुछ लोग भगवान राम, कृष्ण और शिव के अस्तित्व पर ही सवाल उठाते हैं, वहीं दूसरी तरफ उन्हीं देवताओं के बारे में कथित आरोप भी लगाते हैं। उन्होंने दावा किया कि पिछले लगभग एक हजार वर्षों में—मुगल काल और ब्रिटिश शासन के दौरान—सनातन धर्म को कमजोर करने के लिए कई तरह के नैरेटिव गढ़े गए।

उन्होंने स्पष्ट किया कि आस्था और धार्मिक परंपराओं से जुड़े विषयों पर मनमानी व्याख्या के बजाय, तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर चर्चा होनी चाहिए।

‘राम अमीरों के और शिव गरीबों के देवता’- इस सोच पर भी जताई आपत्ति

हाल ही में सामने आए कुछ राजनीतिक और सामाजिक बयानों का जिक्र करते हुए रामदेव ने कहा कि कुछ लोग भगवान राम और भगवान शिव को आर्थिक आधार पर बांटने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि भगवान राम को ‘अमीरों का’ और भगवान शिव को ‘गरीबों का’ देवता बताना समाज और धर्म दोनों को बांटने वाला दृष्टिकोण है, जिसकी भारतीय संस्कृति में कोई जगह नहीं है।

आर्य आक्रमण सिद्धांत को किया खारिज

प्रेस वार्ता के दौरान बाबा रामदेव ने आर्य आक्रमण (Aryan Invasion Theory) को भी पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, “आर्य बाहर से भारत नहीं आए थे। दुनिया के विभिन्न देशों की यात्राओं के दौरान मुझे ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला जिससे यह साबित हो सके कि आर्य बाहर से आए थे।” उन्होंने दावा किया कि लोग भारत से बाहर गए थे, लेकिन आर्यों के भारत आने का दावा तथ्यात्मक नहीं है।

बाबा रामदेव ने जानकारी दी कि पतंजलि की ओर से आयोजित भारतीय प्राच्य विद्या परिषद के 104वें अधिवेशन में धर्मशास्त्रों और भारतीय ज्ञान परंपरा पर विस्तृत चर्चा की जाएगी और सनातन धर्म के खिलाफ फैलाए जा रहे भ्रम की समीक्षा होगी।