महाराष्ट्र MLC चुनाव में झटका, BJP ने शिंदे गुट पर फोड़ा हार का ठीकरा

महाराष्ट्र में विधान परिषद (MLC) की 5 सीटों पर हुए चुनाव के नतीजों ने सत्तारूढ़ ‘महायुति’ गठबंधन के भीतर गजब की खलबली पैदा कर दी है। भारतीय जनता पार्टी (BJP), एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना और सुनेत्रा पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी के साथ मिलकर चुनाव लड़ने के बावजूद, गठबंधन को तीन अहम सीटों पर हार का सामना करना पड़ा है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के गढ़ माने जाने वाले नागपुर में भी बीजेपी प्रत्याशी की हार ने सत्ता पक्ष को झकझोर कर रख दिया है।
इस हार के बाद सहयोगी दलों के बीच एक-दूसरे पर अपेक्षित सहयोग न करने का आरोप लगाते हुए राजनीतिक खींचतान शुरू हो गई है।
बीजेपी केंद्रीय नेतृत्व ने लिया संज्ञान, बुलाई गई बैठक
बीजेपी सूत्रों के मुताबिक, नागपुर और पुणे जैसी अहम सीटों पर हुई हार का बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व ने गंभीरता से संज्ञान लिया है। पार्टी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि हार के पीछे महायुति का अंदरूनी विवाद जिम्मेदार है या पार्टी की अपनी गुटबाजी। प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण और चुनाव की जिम्मेदारी संभालने वाले नेताओं से इस पर जवाब तलब किया जाएगा।
वहीं, गठबंधन में बढ़ते तनाव को कम करने और ‘डैमेज कंट्रोल’ के लिए जल्द ही तीन प्रमुख नेताओं—मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे और डिप्टी सीएम सुनेत्रा पवार—की अहम बैठक होने जा रही है।
‘बटेंगे तो कटेंगे…’- बीजेपी मंत्री नितेश राणे का तीखा बयान
एमएलसी चुनाव के नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए बीजेपी के मंत्री नितेश राणे ने गठबंधन की एकजुटता पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा, “अगर महायुति एक साथ मिलकर लड़ती तो चुनाव की तस्वीर बेहतर होती। यह बात हमारे सहयोगी दलों को भी समझनी चाहिए कि ‘एक हैं तो सेफ हैं… बटेंगे तो कटेंगे’ की बात एक बार फिर साबित हो गई है।”
राणे ने यह भी आशंका जताई कि “हमें यह जांच करनी होगी कि कहीं कोई ‘उद्धव प्रेमी’ या मातोश्री का करीबी महायुति के अंदर रहकर तो काम नहीं कर रहा है।” इसके अलावा, राणे ने कांग्रेस की जीत का श्रेय शिक्षक और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ‘कराले गुरुजी’ के सेकंड प्रेफरेंस वोटों को दिया।
‘बीजेपी को अपने वोट नहीं मिले’- शिंदे गुट के मंत्री उदय सामंत
बीजेपी के आरोपों पर पलटवार करते हुए शिंदे गुट (शिवसेना) के मंत्री उदय सामंत ने बचाव किया। उन्होंने कहा कि अगर तीनों दल मिलकर लड़ें तो जीत पक्की है। सामंत ने स्पष्ट किया, “मेरा काम पार्टी विरोधी नहीं है। पुणे स्नातक क्षेत्र में हमने मिलकर स्मिता ताई जाधव का प्रचार किया था। बीजेपी को अपने ही 9000 वोट नहीं मिले, इसलिए हार हुई।”
बीजेपी प्रवक्ता का आरोप: शिवसेना ने नहीं दिया साथ
इससे पहले, बीजेपी महाराष्ट्र के मुख्य प्रवक्ता नवनाथ कमल ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर शिवसेना को कटघरे में खड़ा किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि पुणे और नागपुर में शिवसेना ने अपेक्षित सहयोग नहीं किया। कमल ने लिखा, “पुणे में ऐन मौके पर सचिन सानप को समर्थन देकर शिवसेना ने महायुति की एकजुटता को झटका दिया। स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में शिवसेना को मिले वोट बीजेपी को नहीं मिले।”
उन्होंने यह भी दावा किया कि छत्रपति संभाजीनगर में अब्दुल सत्तार ने सीधे एनसीपी के खिलाफ प्रचार किया, जिसका खामियाजा पूरे गठबंधन को उठाना पड़ा। बीजेपी प्रवक्ता के अनुसार, यदि शिवसेना ने गठबंधन धर्म का पालन किया होता, तो महायुति पांचों सीटें जीत सकती थी।

