AIIMS में इलाज: जानिए ओपीडी से लेकर ऑपरेशन तक कितना लगता है समय

AIIMS Delhi
अजमल शाह
अजमल शाह

राजस्थान के कोटा की रहने वाली 15 साल की तन्वी की दुखद मौत ने देश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल एम्स (AIIMS Delhi) में इलाज और सर्जरी के इंतजार (Waiting Period) पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। तन्वी जन्म से दिल की गंभीर बीमारी से पीड़ित थी और सर्जरी की उम्मीद में पिछले 13 साल से एम्स के चक्कर काट रही थी। हार्ट-लंग ट्रांसप्लांट की तैयारी के दौरान ही उसकी मौत हो गई। इस दुखद घटना के बाद यह जानना बेहद जरूरी हो जाता है कि एम्स जैसे देश के प्रमुख टर्शियरी केयर अस्पतालों में मरीजों को असल में किस स्तर पर कितना इंतजार करना पड़ता है।

रजिस्ट्रेशन और ओपीडी कंसल्टेशन

अस्पताल में प्रवेश करते ही इंतजार का सिलसिला शुरू हो जाता है:

  • वॉक-इन रजिस्ट्रेशन: जो मरीज बिना किसी पुराने अपॉइंटमेंट के सीधे ओपीडी पहुंचते हैं, उन्हें सुबह के व्यस्त समय में लंबी कतारों का सामना करना पड़ता है। इसमें लगभग 2 से 4 घंटे का समय लग सकता है।

  • ऑनलाइन अपॉइंटमेंट: ओआरएस (ORS) पोर्टल या एम्स की वेबसाइट से ऑनलाइन बुकिंग करने वाले मरीज शुरुआती रजिस्ट्रेशन लाइन से बच जाते हैं। हालांकि, भारी डिमांड और सीमित स्लॉट के कारण कुछ विशेष विभागों में ऑनलाइन अपॉइंटमेंट मिलने में ही 1 से 3 हफ्ते तक का समय लग जाता है।

डायग्नोस्टिक और लैब टेस्ट का इंतजार

डॉक्टर से परामर्श के बाद ब्लड और यूरिन जैसे सामान्य टेस्ट आमतौर पर उसी दिन या अगले दिन हो जाते हैं। लेकिन सीटी स्कैन और अल्ट्रासाउंड जैसी जांचों के लिए 1 से 3 महीने बाद की तारीख मिलती है। वहीं, एम्स में एमआरआई (MRI) स्कैन की मांग इतनी अधिक है कि कुछ मामलों में मरीजों को इसके लिए 6 महीने से लेकर 1 साल तक का लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।

विभिन्न सर्जरी के लिए वेटिंग पीरियड

अस्पताल के अलग-अलग विभागों में मरीजों के अत्यधिक दबाव के कारण सर्जरी के लिए भी लंबा इंतजार करना पड़ता है:

  • हार्ट और ब्रेन सर्जरी: कार्डियोथोरेसिक और न्यूरोसर्जरी जैसे क्रिटिकल विभागों में नॉन-इमरजेंसी ऑपरेशनों के लिए मरीजों को 2 साल तक इंतजार करना पड़ सकता है।

  • कैंसर सर्जरी: हालांकि कैंसर के मरीजों को प्राथमिकता दी जाती है, फिर भी भारी भीड़ के चलते सर्जरी में लगभग 3 महीने तक की देरी हो सकती है।

  • जीआई और जनरल सर्जरी: पेट, आंत या लिवर से जुड़े बड़े गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ऑपरेशन के लिए 3 से 6 महीने का इंतजार करना पड़ सकता है। वहीं हर्निया या पित्त की थैली जैसे सामान्य ऑपरेशनों के लिए यह समय करीब 2 महीने का होता है।

किन विभागों में कम है इंतजार?

हर विभाग में मरीजों का दबाव एक जैसा नहीं है। ऑप्थैल्मोलॉजी (आंख), ईएनटी (कान-नाक-गला), पीडियाट्रिक्स, बर्न और प्लास्टिक सर्जरी, यूरोलॉजी तथा डेंटिस्ट्री जैसे विभागों में तय सर्जरी के लिए इंतजार का समय अपेक्षाकृत कम होता है और मरीजों को जल्दी तारीख मिलने की संभावना रहती है।

इमरजेंसी मामलों में नहीं होती देरी

यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि यह सारा इंतजार मुख्य रूप से ‘नॉन-इमरजेंसी’ (वैकल्पिक) मामलों पर लागू होता है। यदि कोई मरीज गंभीर स्थिति में है और उसकी जान को तुरंत खतरा है, तो क्लीनिकल प्राथमिकता के आधार पर उसे बिना किसी लंबी वेटिंग लिस्ट के तुरंत इमरजेंसी मेडिकल केयर दी जाती है।