SEBI की बड़ी सिफारिश, विदेशी निवेशकों और म्यूचुअल फंड को टैक्स राहत?

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Gautam Kumar Agarwal
Gautam Kumar Agarwal

घरेलू निवेशकों को राहत देने और विदेशी निवेश (Foreign Investment) आकर्षित करने के मकसद से भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने सरकार को टैक्स नियमों में अहम बदलाव के प्रस्ताव भेजे हैं। समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि SEBI ने विदेशी निवेशकों (FPIs) पर लगने वाले लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स को खत्म करने की सिफारिश की है। इसके अलावा, घरेलू म्यूचुअल फंड निवेशकों को भी बड़ी टैक्स राहत देने का सुझाव दिया गया है।

फरवरी बजट से पहले सरकार को भेजा प्रस्ताव

ये सिफारिशें फरवरी में पेश होने वाले केंद्रीय बजट से करीब 3 महीने पहले की गई हैं। हालांकि, इन पर अंतिम मुहर सरकार ही लगाएगी। मौजूदा नियमों के तहत, एक साल से अधिक समय तक रखी गई सिक्योरिटीज पर 12.5% लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स (LTCG) लगता है। वहीं, एक साल या उससे कम अवधि में बेचे जाने पर शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स (STCG) 20% है। इसके अलावा, शेयरों की खरीद-बिक्री पर सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) और डिविडेंड पर भी टैक्स लागू है।

SEBI का तर्क है कि भारत में इक्विटी निवेश से जुड़ी ट्रांजैक्शन कॉस्ट (transaction cost) अन्य बाजारों की तुलना में काफी अधिक है। ब्रोकरेज फर्म जेफरीज के मुताबिक, अगर कैपिटल गेन्स टैक्स हटाया जाता है, तो भारतीय बाजार विदेशी निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक हो सकता है। इसी तरह IIFL का अनुमान है कि इस कदम से विदेशी निवेशकों का रिटर्न 2.3 प्रतिशत तक बढ़ सकता है।

म्यूचुअल फंड में निवेश स्विच करने पर नहीं लगेगा टैक्स!

घरेलू निवेशकों को ध्यान में रखते हुए SEBI ने एक और अहम प्रस्ताव रखा है। सूत्रों के अनुसार, अगर कोई निवेशक एक साल से ज्यादा समय तक रखी गई अपनी म्यूचुअल फंड यूनिट बेचकर तुरंत किसी दूसरी स्कीम में निवेश (स्विच) करता है, तो इसे टैक्सेबल बिक्री नहीं माना जाना चाहिए। इस प्रस्ताव का उद्देश्य निवेशकों को लंबे समय तक बाजार में बनाए रखना है। मौजूदा समय में भारत की म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का आकार लगभग 82.6 लाख करोड़ रुपये है, जिसमें सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए हर महीने औसतन 30,000 करोड़ रुपये का निवेश आ रहा है।

विदेशी निवेशकों ने की 31 बिलियन डॉलर की निकासी

SEBI की ये सिफारिशें ऐसे समय में आई हैं जब भारतीय बाजार विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली का सामना कर रहा है। इस साल विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों से रिकॉर्ड 31 बिलियन डॉलर निकाले हैं।

विदेशी निवेशकों से लगातार बातचीत के दौरान टैक्स व्यवस्था में बदलाव की मांग प्रमुखता से उठाई गई थी। एक सूत्र ने बताया कि इन प्रस्तावों का मकसद विदेशी निवेशकों पर शुरुआती टैक्स बोझ को कम करना है। गौरतलब है कि पिछले दो सालों में निफ्टी 50 में 4.8% की गिरावट दर्ज की गई है, जबकि इसी अवधि में MSCI इमर्जिंग मार्केट इंडेक्स 40% उछला है। बड़े शेयरों वाले घरेलू इक्विटी म्यूचुअल फंड्स का औसत रिटर्न भी इसी दौरान 1.6% गिरा है।