जेपी से अन्ना हजारे तक, पांच आंदोलन जिन्होंने सत्ता को दी सीधी चुनौती

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गौरव त्रिपाठी
गौरव त्रिपाठी

भारत का इतिहास ऐसे जन आंदोलनों से भरा पड़ा है, जिन्होंने एकजुट होकर सत्ता को चुनौती दी और व्यवस्था में बड़े बदलाव किए। हाल ही में शिक्षा मंत्री और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ हुए प्रदर्शनों ने एक बार फिर आंदोलनों की ताकत को चर्चा में ला दिया है। ब्रिटिश शासन के खिलाफ आजादी की लड़ाई से लेकर स्वतंत्र भारत में लोकतांत्रिक अधिकारों की मांग तक, कई अभियानों ने व्यापक प्रभाव छोड़ा है। आइए जानते हैं देश के 5 ऐसे बड़े आंदोलनों के बारे में, जिन्होंने सरकारें बदलने से लेकर कानून निरस्त करने तक व्यवस्था को मजबूर किया।

भारत छोड़ो आंदोलन (1942)

महात्मा गांधी के नेतृत्व में अगस्त 1942 में शुरू हुआ यह आंदोलन स्वतंत्रता संग्राम की आखिरी और सबसे बड़ी राष्ट्रव्यापी जनक्रांति थी। गांधी जी के ‘करो या मरो’ के नारे ने महिलाओं, छात्रों, किसानों और मजदूरों को एकजुट कर दिया। ब्रिटिश सरकार ने गंभीर दमन चक्र चलाया और शीर्ष नेताओं को जेल में डाल दिया, लेकिन भारी जनभागीदारी ने यह स्पष्ट कर दिया कि अब भारत पर ब्रिटिश शासन ज्यादा दिन नहीं चल सकता। इसी आंदोलन ने 1947 की आजादी की मजबूत नींव रखी।

जेपी आंदोलन या संपूर्ण क्रांति (1974-75)

भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और सरकारी नीतियों के खिलाफ जयप्रकाश नारायण (जेपी) के नेतृत्व में 1974 में यह आंदोलन बिहार से शुरू होकर पूरे उत्तर भारत में फैल गया। इसके बढ़ते दबाव से घबराकर तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल लगा दिया। आपातकाल खत्म होने के बाद 1977 के आम चुनावों में कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा और जनता पार्टी ने देश में पहली गैर-कांग्रेसी सरकार बनाई।

चिपको आंदोलन (1973)

पर्यावरण संरक्षण की दिशा में चिपको आंदोलन एक बड़ा मील का पत्थर साबित हुआ। तत्कालीन उत्तर प्रदेश (अब उत्तराखंड) के चमोली जिले में सुंदरलाल बहुगुणा और स्थानीय महिलाओं ने जंगलों की कटाई का अनूठा विरोध किया। प्रदर्शनकारियों ने पेड़ों को कटने से बचाने के लिए उन्हें गले लगा लिया। इसके परिणामस्वरूप तत्कालीन केंद्र सरकार ने हिमालयी क्षेत्र में कमर्शियल पेड़ों की कटाई पर 15 साल का प्रतिबंध लगा दिया।

अन्ना आंदोलन (2011)

भ्रष्टाचार के खिलाफ गांधीवादी कार्यकर्ता अन्ना हजारे के नेतृत्व में दिल्ली के रामलीला मैदान से ‘इंडिया अगेंस्ट करप्शन’ आंदोलन की शुरुआत हुई। इस शहरी और मध्यवर्गीय लामबंदी ने केंद्र में एक मजबूत लोकपाल की मांग की। भारी जन दबाव के कारण संसद को जन लोकपाल विधेयक पारित करना पड़ा। इसी आंदोलन ने तत्कालीन यूपीए सरकार की छवि को बड़ा नुकसान पहुंचाया, जिससे सत्ता परिवर्तन हुआ और इसी मंच से ‘आम आदमी पार्टी’ (AAP) का जन्म हुआ।

किसान आंदोलन (2020-21)

केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीन कृषि कानूनों के विरोध में यह आंदोलन शुरू हुआ। मुख्य रूप से पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के हजारों किसानों ने दिल्ली की सीमाओं पर डेरा डाल दिया और एक साल से अधिक समय तक प्रदर्शन किया। लगातार विरोध और भारी राजनीतिक दबाव के बाद नवंबर 2021 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने का ऐलान किया।