पेट्रोल महंगा, रोजमर्रा का खर्च बढ़ा, क्या अमेरिकी मतदाता ट्रंप से मांगेंगे जवाब?

अमेरिका में ईरान के खिलाफ छेड़े गए युद्ध के कारण पेट्रोल की आसमान छूती कीमतों और बढ़ती महंगाई ने आम लोगों का घरेलू बजट बिगाड़ दिया है। मिडटर्म (मध्यावधि) चुनाव से ठीक पहले यह आर्थिक संकट राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रिपब्लिकन उम्मीदवारों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरा है।
$4 के पार पेट्रोल, 70 अरब डॉलर का नुकसान
एनबीसी न्यूज़ (NBC News) ने ट्रिपल ए (AAA) मोटर क्लब के आंकड़ों के हवाले से बताया है कि अमेरिका में गैसोलीन (पेट्रोल) की औसत कीमत 4 डॉलर प्रति गैलन के पार बनी हुई है। फरवरी के अंत में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू किए जाने के बाद से पेट्रोल की कीमतों में 1 डॉलर से ज्यादा का इजाफा हुआ है। कैलिफोर्निया, हवाई, नेवादा और वाशिंगटन जैसे राज्यों में जनता पेट्रोल के लिए औसतन 5 डॉलर प्रति गैलन चुका रही है।
इसी रिपोर्ट में ब्राउन यूनिवर्सिटी के एक विश्लेषण का हवाला देते हुए बताया गया है कि युद्ध शुरू होने के बाद से गैस की बढ़ती कीमतों के कारण अमेरिकी परिवारों को 70 अरब डॉलर से अधिक का नुकसान उठाना पड़ा है। कच्चे तेल के दाम बढ़ने से विमानन ईंधन और हवाई किराए में भी तेजी आई है।
सितंबर में फिर बढ़ी महंगाई, फेडरल रिजर्व के आंकड़े
पीबीएस न्यूज़ (PBS News) की एक हालिया रिपोर्ट में अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आंकड़ों के हवाले से बताया गया है कि उपभोक्ता कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी से अमेरिकी परिवार कड़ा संघर्ष कर रहे हैं। वाणिज्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर में हेडलाइन मुद्रास्फीति (Inflation rate) सालाना आधार पर 3.6% बढ़ी है, जो महीने-दर-महीने के हिसाब से 0.2% अधिक है। सितंबर में मासिक मुद्रास्फीति में 0.5% की वृद्धि दर्ज की गई, जो मई के बाद सबसे उच्च स्तर है। इस बढ़ोतरी का मुख्य कारण ईंधन की कीमतों में हुआ भारी इजाफा है।
चुनाव से पहले घिरे ट्रंप, अप्रूवल रेटिंग गिरी
महंगाई और पेट्रोल की ये बढ़ती कीमतें ट्रंप और रिपब्लिकन उम्मीदवारों के लिए राजनीतिक गले की फांस बन गई हैं। अक्टूबर के अंत में आए ‘न्यूयॉर्क टाइम्स/सिएना’ पोल के अनुसार, लगभग तीन-चौथाई संभावित मतदाताओं ने गैस की कीमतों से निपटने के ट्रंप के तरीके पर असहमति जताई है। वहीं, 69 प्रतिशत लोग बढ़ती जीवन यापन लागत को लेकर राष्ट्रपति के कामकाज से नाराज हैं।
मध्य अक्टूबर में जारी ‘रॉयटर्स/इप्सोस’ पोल में राष्ट्रपति ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग महज 31 प्रतिशत रह गई है। इसके उलट, पंजीकृत मतदाताओं के बीच विपक्षी डेमोक्रेट्स ने 12 अंकों की बड़ी बढ़त बना ली है।
‘मुझे कोई परवाह नहीं’: ट्रंप का बयान
इन राजनीतिक नुकसान और गिरती रेटिंग के बीच राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान युद्ध की राजनीतिक कीमत को सार्वजनिक रूप से खारिज किया है। इसी हफ्ते जॉर्जिया में एक रैली को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा कि उनके सहयोगियों ने उन्हें हिदायत दी थी कि वे युद्ध से होने वाले तेल मुनाफे पर शेखी न बघारें, क्योंकि अमेरिकी नागरिक पेट्रोल पंप पर भारी कीमत चुका रहे हैं। अपने सहयोगियों की इस सलाह पर ट्रंप ने बेबाकी से कहा, “मैंने कहा, मुझे इसकी कोई परवाह नहीं है।”

