मुंबई अंडरवर्ल्ड पर नजर! D-कंपनी की जगह लेना चाहता है लॉरेंस बिश्नोई गैंग?

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भोजराज नावानी
भोजराज नावानी

मुंबई में अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर हुई फायरिंग मामले की जांच कर रही क्राइम ब्रांच को एक बड़ी साजिश के सुराग मिले हैं। जांच एजेंसियों को शक है कि लॉरेंस बिश्नोई गैंग मुंबई के अंडरवर्ल्ड में अपना प्रभाव बढ़ाकर खुद को दाऊद इब्राहिम की ‘डी-कंपनी’ (D-Company) की तरह एक बड़े आपराधिक नेटवर्क के तौर पर स्थापित करना चाहता है। दिल्ली, हरियाणा और पंजाब में अपना नेटवर्क मजबूत करने के बाद अब इस गैंग की नजरें सीधे तौर पर मुंबई पर टिक गई हैं।

दहशत फैलाकर रंगदारी वसूलने का प्लान

सूत्रों के मुताबिक, जांच में यह एंगल सामने आया है कि बिश्नोई गैंग मुंबई में डर और दहशत का माहौल बनाकर अपनी मौजूदगी दर्ज कराना चाहता है। पुलिस को संदेह है कि इस खौफ का इस्तेमाल बिल्डरों, बड़े कारोबारियों और बॉलीवुड से जुड़े लोगों को निशाना बनाकर रंगदारी वसूलने के लिए किया जा सकता है।

क्राइम ब्रांच का मानना है कि हालिया फायरिंग और धमकियों का मकसद केवल किसी एक व्यक्ति को डराना नहीं, बल्कि बड़े स्तर पर गैंग की ताकत का संदेश देना है। अंडरवर्ल्ड में अपना दबदबा कायम करने के लिए आपराधिक संगठन पहले भी इस तरह हाई-प्रोफाइल हस्तियों को निशाना बनाते रहे हैं।

टाइगर श्रॉफ से पहले कोई और ‘बड़ी हस्ती’ थी टारगेट

टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस की पड़ताल में यह तथ्य सामने आया है कि हमलावरों के निशाने पर पहले कोई और बड़ी हस्ती थी। जब वे उस टारगेट तक पहुंचने में नाकाम रहे, तो उन्होंने सिर्फ दहशत फैलाने के मकसद से टाइगर को निशाना बनाया। फिलहाल क्राइम ब्रांच गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर रही है और फायरिंग, धमकी तथा कथित रंगदारी नेटवर्क के बीच संभावित कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।

सलमान खान और बिश्नोई गैंग का पुराना विवाद

लॉरेंस बिश्नोई गैंग का नाम अक्सर बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान के साथ जुड़े एक पुराने विवाद को लेकर भी चर्चा में रहता है। इस विवाद की जड़ 1998 के काले हिरण शिकार मामले से जुड़ी है।

फिल्म ‘हम साथ-साथ हैं’ की शूटिंग के दौरान जोधपुर के कांकाणी गांव में दो काले हिरणों के कथित शिकार के आरोप में सलमान खान को 2018 में पांच साल की सजा सुनाई गई थी। इस फैसले के खिलाफ उनकी अपील अभी लंबित है। काले हिरण और वन्यजीव संरक्षण को अपने धार्मिक सिद्धांतों का अहम हिस्सा मानने वाले बिश्नोई समुदाय ने इस मामले को गंभीरता से उठाया था और लंबी कानूनी लड़ाई में सक्रिय भूमिका निभाई थी।