Beef पसंद आई थी? We Are Born Good में भी दिखेगी बदले की अजीब जंग

कहानी में एक दिलचस्प विडंबना तब पैदा होती है, जब किसी बड़ी दुश्मनी की शुरुआत महज बीफ (Beef) न खाने की जिद से हो। हांगकांग की नई फिल्म ‘वी आर बॉर्न गुड’ (We Are Born Good) कुछ इसी तरह के प्लॉट पर बुनी गई है। राइटर-डायरेक्टर यंग लेउंग-च्यून (Yeung Leung-chuen) की यह फिल्म नेटफ्लिक्स की मशहूर सीरीज ‘बीफ’ की याद दिलाती है, लेकिन यह उसका एक जेंटल और हांगकांग के परिवेश में रचा गया वर्जन है। फिल्म दिखाती है कि कैसे दो अजनबियों के बीच हुई एक छोटी सी बहस उनकी जिंदगियों को उलझा कर रख देती है।
यह फिल्म अमेरिकी सीरीज ‘बीफ’ की तरह नस्ल या वर्ग संघर्ष पर बात करने के बजाय एक इंटिमेट मेलोड्रामा और कॉमेडी ऑफ एरर्स (Comedy of errors) पर फोकस करती है। यंग लेउंग-च्यून, जिन्होंने इससे पहले ‘हांगकांग फैमिली’ (2022) जैसी बेहतरीन फिल्म लिखी थी, के डायरेक्शन में बनी यह पहली फिल्म है।
खराब दिन और गलत खाने का ऑर्डर
फिल्म की शुरुआत 30 वर्षीय जोई (Chung Suet-ying) के एक बेहद खराब दिन से होती है। जोई एक संघर्षरत फ्रीलांस एक्ट्रेस है। वह अपने रिटेल जॉब पर बुली (bully) होने और एक थका देने वाले ऑडिशन में लेट पहुंचने के बाद आधी रात को अपने पड़ोस के लोकल रेस्टोरेंट पहुंचती है। उसे बस एक कम्फर्टिंग स्टिर-फ्राइड डिश खानी है, लेकिन उसे गलत ऑर्डर सर्व कर दिया जाता है। जब वह ऑर्डर ठीक कराने के लिए वापस जाती है, तो रेस्टोरेंट का मैनेजर विंग-कैट (Yeung Wai-lun) उसे यह कहकर वहां से टरका देता है कि रेस्टोरेंट बंद होने का समय हो गया है।
बदले का सिलसिला और भयंकर दुश्मनी
यहीं से दोनों के बीच विवाद शुरू होता है। जोई बदला लेने के लिए रेस्टोरेंट में कॉकरोच छोड़ देती है और वहां के टॉयलेट में पानी भर देती है। इसके जवाब में विंग-कैट भी पीछे नहीं रहता और जोई का नाम एक प्रॉस्टिट्यूशन साइट पर डाल देता है। बात तब और बिगड़ जाती है जब जोई गुस्से में विंग-कैट के दरवाजे पर लाल रंग पोत देती है। इस दुश्मनी और एक-दूसरे को नीचा दिखाने की होड़ में धीरे-धीरे दोनों की निजी जिंदगी के तनाव और परेशानियां भी सामने आने लगती हैं।
किरदारों की उलझी हुई निजी जिंदगी
फिल्म दोनों किरदारों के व्यक्तिगत संघर्षों को गहराई से दिखाती है। 17 साल की उम्र से अकेली रह रही जोई अपनी दिवंगत मां के कर्ज तले दबी है। उसकी जिंदगी में एक संवेदनशील प्लेराइट जेसी (Kearen Pang Sau-wai) के साथ उसकी गहरी मेंटरशिप और उसकी बेस्ट फ्रेंड जॉय (Ng Wing-sze) की छिपी हुई भावनाएं चीजें और भी जटिल बना देती हैं।
दूसरी तरफ विंग-कैट की परेशानियां ज्यादा उलझी हुई हैं। वह एक पूर्व कैदी (ex-convict) है, जिसका रेस्टोरेंट उसके डॉक्टर भाई विंग-लेई (Lo Chun-yip) के पैसों से चलता है। परिवार में उसे एक नाकाम इंसान के तौर पर देखा जाता है। वह एक शादीशुदा महिला (Amy Yan Yuk-yu) के साथ अफेयर में सुकून तलाश रहा है, लेकिन जोई के साथ चल रही उसकी यह ‘जंग’ उसकी पारिवारिक जिंदगी में भी विस्फोट करने की कगार पर पहुंच जाती है।
हांगकांग के प्रेशर और इंसानी फितरत पर सवाल
यह फिल्म कई दिलचस्प दार्शनिक सवाल उठाती है। क्या इंसान सिर्फ इसलिए दूसरों पर भड़क सकता है क्योंकि उसने खुद बहुत कुछ सहा है? और क्या ये दोनों किरदार एक-दूसरे की जिंदगी बर्बाद कर रहे हैं या सिर्फ उन त्रासदियों को तेज कर रहे हैं जो वैसे भी उनके साथ होने वाली थीं?
हालांकि शानदार डायलॉग्स और विजुअल्स के बावजूद फिल्म कुछ जगहों पर लड़खड़ाती है। कहानी में संयोग से होने वाली मुलाकातों का बहुत ज्यादा सहारा लिया गया है, कुछ स्लो-मोशन सीक्वेंस बनावटी लगते हैं और फिल्म भावनाओं को पर्दे पर दिखाने के बजाय उन्हें बयां करने पर ज्यादा जोर देती है।
इन छोटी कमियों के बावजूद, यह चुंग (Chung) और यंग (Yeung) की शानदार एक्टिंग का बेहतरीन नमूना है। विशेष रूप से यंग वाई-लुन, जो अपनी अनकन्वेंशनल लुक्स और ‘डेडपैन’ डिलीवरी के कारण हांगकांग सिनेमा के तेजी से उभरते कॉमेडी स्टार बन गए हैं, इस फिल्म में अपनी आम छवि से अलग नजर आते हैं।
हांगकांग के ‘प्रेशर-कुकर’ जैसे माहौल को दिखाती ‘वी आर बॉर्न गुड’ यह सवाल पूछती है कि क्या हम अपनी इंसानियत और सहानुभूति खो चुके हैं। फिल्म इस विचार के साथ खत्म होती है कि किसी इंसान के साथ बुरा होने के लिए हमेशा उसका बुरा इंसान होना जरूरी नहीं है।

