UN सुरक्षा परिषद में सुधार क्यों जरूरी? ओम बिरला ने उठाया अहम मुद्दा

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के उद्घाटन के साथ शुरू हुआ 12वां ब्रिक्स संसदीय मंच (BRICS Parliamentary Forum) 27 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में एक ‘संयुक्त घोषणापत्र’ (Joint Declaration) को अपनाने के साथ संपन्न हो गया। इस घोषणापत्र में संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों, संप्रभु समानता, पारस्परिक सम्मान, आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने और अंतरराष्ट्रीय विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के प्रति सदस्य देशों की प्रतिबद्धता दोहराई गई।

भारत की कूटनीतिक जीत: आतंकवाद पर स्पष्ट संदेश
यह घोषणापत्र भारत की रणनीतिक प्राथमिकताओं और नई दिल्ली घोषणा (NDD) की आम सहमति के अनुरूप रहा। भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा रुख को उस वक्त बड़ी कूटनीतिक जीत मिली, जब घोषणापत्र में सीमा पार आतंकवाद, टेरर फंडिंग (आतंकवाद के वित्तपोषण) और आतंकियों को सुरक्षित पनाहगाह (Safe havens) मुहैया कराने की कड़ी निंदा की गई। एनडीडी (NDD) के पैराग्राफ 40 के आधार पर तैयार इस पाठ में आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ (शून्य सहिष्णुता) और दोहरे मापदंड (Double standards) को खत्म करने की सख्त मांग की गई है।

‘ग्लोबल साउथ’ और UNSC में सुधारों का समर्थन
मंच के दौरान सदस्य संसदों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधारों का स्पष्ट रूप से समर्थन किया। एनडीडी पैराग्राफ 13 का हवाला देते हुए वैश्विक शासन में ‘ग्लोबल साउथ’ (Global South) के अधिक प्रतिनिधित्व की वकालत की गई। इसके अलावा, जलवायु एजेंडा, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) के विस्तार और एथिकल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) प्रशासन को भी अंतिम घोषणापत्र में जगह दी गई।

ओम बिरला का संदेश: संप्रभुता और बातचीत पर जोर
समापन भाषण देते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने स्पष्ट किया कि वैश्विक चुनौतियों का समाधान केवल संघर्ष की बजाय अटूट बातचीत, शांति और सहयोगात्मक कार्रवाई से ही संभव है। उन्होंने कहा, “स्थायी समाधान बातचीत से बनते हैं, युद्ध से नहीं; शांति से बनते हैं, संघर्ष से नहीं; और प्रतिस्पर्धा की बजाय सहयोग से बनते हैं।”
बिरला ने ब्रिक्स देशों के बीच विविधता के बावजूद मानवता के कल्याण, शांति और समृद्धि के लिए साझा प्रतिबद्धता को गठबंधन की सबसे बड़ी ताकत बताया। उन्होंने राष्ट्रीय संप्रभुता के पूर्ण सम्मान और सभी के लिए समान विकास के अवसरों वाले एक वैश्विक ढांचे का भी आह्वान किया।

संसदों में AI और तकनीक के इस्तेमाल की वकालत
लोकसभा अध्यक्ष ने संसदों को सिर्फ कानून बनाने वाली संस्थाओं से बढ़कर संवाद, सहमति और जन विश्वास का केंद्र बताया। उन्होंने कहा कि संसदों को बदलते समय के साथ अधिक पारदर्शी और जन-केंद्रित (citizen-centric) बनना चाहिए। बिरला ने सुझाव दिया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल से संसदीय कामकाज को बेहतर बनाया जा सकता है, बशर्ते यह मानवीय मूल्यों, नैतिकता और जवाबदेही के अनुरूप हो।

चीन को सौंपी गई ब्रिक्स की अध्यक्षता
12वें ब्रिक्स संसदीय मंच के सफलतापूर्वक संपन्न होने पर ओम बिरला ने चीन को वर्ष 2027 के लिए ब्रिक्स (BRICS) की अध्यक्षता सौंपते हुए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने विश्वास जताया कि चीन के नेतृत्व में भी सदस्य देशों के बीच यह सहयोग आगे फलता-फूलता रहेगा। मंच का समापन दुनिया भर की संसदों से शांति, सहयोग और साझा समृद्धि के लिए काम करने के आह्वान के साथ हुआ।

