मेरठ नीले ड्रम कांड: मुस्कान-साहिल की अपील पर 30 अक्टूबर को सुनवाई?

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महेंद्र सिंह
महेंद्र सिंह

उत्तर प्रदेश के मेरठ के बहुचर्चित सौरभ हत्याकांड (नीले ड्रम कांड) में नया कानूनी मोड़ आ गया है। इस सनसनीखेज मामले में निचली अदालत से फांसी की सजा पा चुके दोषियों, मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल की अपील को इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है। हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सत्र न्यायालय से केस डायरी और पूरा रिकॉर्ड तलब किया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 30 नवंबर को निर्धारित की गई है।

निचली अदालत ने माना था ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’

मेरठ की सत्र अदालत (Sessions Court) ने पुलिस द्वारा पेश किए गए साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर मुस्कान और साहिल को सौरभ की नृशंस हत्या का दोषी ठहराया था। अपराध की क्रूरता को देखते हुए अदालत ने इसे ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ (Rarest of Rare) की श्रेणी में रखा और दोनों दोषियों को फांसी की सजा सुनाई थी। इसी फैसले को अब दोनों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है। उनकी याचिका में तर्क दिया गया है कि निचली अदालत ने सजा सुनाते समय कई कानूनी पहलुओं की अनदेखी की है, इसलिए उनकी फांसी की सजा को रद्द या कम किया जाए।

क्या था दिल दहला देने वाला ‘नीला ड्रम कांड’?

यह वारदात पिछले साल मार्च में अंजाम दी गई थी। आरोप है कि मुस्कान ने अपने प्रेमी साहिल के साथ मिलकर पहले सौरभ की चाकू मारकर निर्मम हत्या की। उसके बाद सुबूत मिटाने के लिए शव के कई टुकड़े किए और उन्हें एक नीले रंग के ड्रम में डालकर ऊपर से सीमेंट का घोल भर दिया। इस खौफनाक हत्याकांड को अंजाम देने के बाद दोनों अय्याशी करने हिमाचल प्रदेश भाग गए थे। करीब 10 दिन बाद जब वे वापस लौटे, तो पुलिस की तफ्तीश में इस हत्याकांड का पर्दाफाश हुआ और दोनों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।

फांसी की सजा पर हाईकोर्ट की मुहर अनिवार्य

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, आपराधिक मामलों में जब भी कोई निचली अदालत किसी दोषी को मौत की सजा सुनाती है, तो उस फैसले पर हाईकोर्ट की पुष्टि (Confirmation) होना अनिवार्य होता है। इसके साथ ही दोषियों को भी फैसले के खिलाफ अपील का अधिकार मिलता है। 30 नवंबर की सुनवाई इसलिए अहम मानी जा रही है, क्योंकि अब इलाहाबाद हाईकोर्ट सभी दस्तावेजों की समीक्षा के बाद यह तय करेगा कि सत्र अदालत के फांसी के फैसले को बरकरार रखा जाए या उसमें कोई बदलाव किया जाए।