छह सीटें, तीन पार्टियां और अलग-अलग नतीजे, फतेहपुर का सियासी हिसाब

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गौरव त्रिपाठी
गौरव त्रिपाठी

कानपुर और प्रयागराज के बीच स्थित फतेहपुर जिले की सियासत में किसी एक दल का एकतरफा प्रभाव नहीं रहा है। 2022 के विधानसभा चुनाव में जिले की छह विधानसभा सीटों पर भारतीय जनता पार्टी (BJP), समाजवादी पार्टी (SP) और अपना दल (सोनेलाल) के बीच बंटा हुआ जनादेश देखने को मिला था। भाजपा ने तीन, सपा ने दो और अपना दल (एस) ने एक सीट पर जीत दर्ज की थी। 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच फतेहपुर जिले में अपनी मौजूदा सीटों को बचाना और विरोधी के गढ़ में सेंध लगाना सभी दलों के लिए प्राथमिक चुनौती बन चुका है।

2022 का चुनावी रिपोर्ट कार्ड: कहां किसने मारी थी बाजी?

जिले की छह सीटों पर हार-जीत के आंकड़े बताते हैं कि कुछ सीटों पर मुकाबला बेहद करीबी रहा, जबकि एक सीट पर एकतरफा जीत दर्ज की गई थी।

विधानसभा सीट विजेता उम्मीदवार राजनीतिक दल जीत का अंतर (वोट)
जहानाबाद राजेंद्र सिंह पटेल बीजेपी 18,192
बिंदकी जय कुमार सिंह जैकी अपना दल (एस) 3,797
फतेहपुर सदर चंद्र प्रकाश समाजवादी पार्टी 8,601
अयाह शाह विकास गुप्ता बीजेपी 13,006
हुसैनगंज ऊषा मौर्य समाजवादी पार्टी 25,181
खागा (आरक्षित) कृष्णा पासवान बीजेपी 5,509

बिंदकी और खागा में करीबी मुकाबला, हुसैनगंज में सपा की बड़ी जीत

  • बिंदकी: यह सीट गठबंधन की राजनीति की प्रयोगशाला साबित हुई। अपना दल (एस) के जय कुमार सिंह जैकी ने सपा के रामेश्वर दयाल उर्फ दयालू ओमर को महज 3,797 वोटों के अंतर से हराया। कम अंतर यह दिखाता है कि यहां मामूली वोट स्विंग भी परिणाम बदल सकता है।

  • खागा (सुरक्षित): अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित इस सीट पर भाजपा की कृष्णा पासवान ने सपा के रामतीर्थ परमहंस को 5,509 वोटों से मात दी थी।

  • फतेहपुर सदर: जिला मुख्यालय की सीट पर सपा के चंद्र प्रकाश ने भाजपा के निवर्तमान विधायक विक्रम सिंह को 8,601 वोटों से हराया। चंद्र प्रकाश को 96,839 वोट मिले, जबकि भाजपा प्रत्याशी 88,238 वोट हासिल कर सके।

  • हुसैनगंज: इस सीट पर सपा की ऊषा मौर्य ने भाजपा के रणवेंद्र प्रताप सिंह को 25,181 वोटों के भारी अंतर से शिकस्त दी, जो जिले में सबसे बड़ा अंतर रहा।

  • जहानाबाद व अयाह शाह: जहानाबाद में भाजपा के राजेंद्र सिंह पटेल ने सपा के मदन गोपाल वर्मा को 18,192 वोटों से और अयाह शाह में विकास गुप्ता ने सपा के विश्वंभर प्रसाद निषाद को 13,006 वोटों से हराया था।

भाजपा के सामने 4 सीटें बचाने की चुनौती

भाजपा और उसकी सहयोगी अपना दल (एस) के पास जिले में कुल चार सीटें हैं। 2027 के चुनाव में भाजपा की रणनीति मौजूदा विधायकों के रिपोर्ट कार्ड के आकलन, बूथ स्तर पर माइक्रो-मैनेजमेंट और केंद्र-राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों तक सीधी पहुंच बनाने पर टिकी है। सड़क, बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और रोजगार जैसे जमीनी मुद्दों को लेकर मतदाताओं का रुख अहम रहेगा।

सपा का फोकस PDA और बसपा-कांग्रेस का फैक्टर

समाजवादी पार्टी अपनी जीती हुई फतेहपुर सदर और हुसैनगंज सीटों को सुरक्षित रखने के साथ-साथ उन सीटों पर ध्यान केंद्रित कर रही है जहां हार का अंतर कम रहा था। सपा की रणनीति मुख्य रूप से पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक (PDA) समीकरण को जमीन पर उतारने की है।

दूसरी ओर, 2022 में खाता खोलने में नाकाम रहने के बावजूद बहुजन समाज पार्टी (BSP) ने सभी छह सीटों पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई थी। खासकर खागा सुरक्षित सीट पर बसपा का प्रभाव नतीजों को प्रभावित करने की क्षमता रखता है। कांग्रेस संगठन के पुनर्गठन और गठबंधन के समीकरणों के आधार पर अपनी जमीन तलाशने में जुटी है।