‘एक कचौड़ी, एक समोसा, BJP का कोई नहीं भरोसा’, अखिलेश यादव का तंज

akhilesh yadav
महेंद्र सिंह
महेंद्र सिंह

उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावों से पहले सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। दशहरे के मौके पर समाजवादी पार्टी (SP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने लखनऊ में प्रेस वार्ता कर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोला है। सपा प्रमुख ने ‘असली और नकली सनातनी’ का फर्क समझाते हुए रामराज्य को समाजवाद से जोड़ा और खुद को रावण के रूप में पेश करने वाले कथित AI वीडियो पर पलटवार किया।

सच्चे सनातनी और रामराज्य की परिभाषा

अखिलेश यादव ने दशहरे की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह त्योहार हमें हमेशा बुराई के खिलाफ लड़ते रहने की याद दिलाता है। उन्होंने कहा कि एक सच्चा ‘सनातनी’ दुनिया में अच्छाई लाता है, जबकि जो लोग बुराई फैलाते हैं, वे केवल ‘नकली’ सनातनी हैं।

सपा प्रमुख ने संकल्प लेने का आह्वान करते हुए कहा कि धरती से बुराई मिटाने की शुरुआत यहीं उत्तर प्रदेश से करनी होगी। उन्होंने दावा किया कि भगवान राम ने रामराज्य का जो रास्ता दिखाया था, समाजवाद ही असल में वही रामराज्य है। उनके मुताबिक, समाजवाद और रामराज्य एक ही हैं, और जो इन दोनों में विश्वास रखते हैं, वही सच्चे सनातनी हैं।

रावण वाले AI वीडियो पर बीजेपी को घेरा

प्रेस वार्ता के दौरान अखिलेश यादव ने बीजेपी की ओर से जारी किए गए एक वीडियो का विशेष रूप से जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सुबह बीजेपी ने एक वीडियो जारी किया, जिसमें उन्हें रावण के रूप में दिखाया गया है। सपा अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का इस्तेमाल भलाई के लिए होना चाहिए, लेकिन बीजेपी इसका उपयोग राजनीतिक बुराई फैलाने के लिए कर रही है।

‘एक कचौड़ी, एक समोसा, भाजपा का कोई नहीं भरोसा’

सियासी तंज कसते हुए अखिलेश यादव ने एक नया नारा उछाला— ‘एक कचौड़ी, एक समोसा, भाजपा का कोई नहीं भरोसा।’ उन्होंने कहा कि जब भी बीजेपी खुद को मुश्किल स्थिति में फंसा पाती है, तो वह विपक्ष पर तरह-तरह के आरोप लगाने लगती है।

चुनाव आयोग और विरोध-प्रदर्शनों पर बयान

चुनाव आयोग और मतदान प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए सपा प्रमुख ने दावा किया कि वोट की चोरी और आयोग के कामकाज को लेकर देशभर के लोग एकजुट हो गए हैं। उन्होंने सपा कार्यकर्ताओं की सराहना करते हुए कहा कि पार्टी नेताओं ने इतना प्रभावी काम किया कि चुनाव आयोग को भी आखिरकार यह मानना पड़ा कि उसकी कार्यप्रक्रिया में गलतियां हुई थीं।

अखिलेश यादव ने अपनी बात खत्म करते हुए कहा कि जब लोगों को न्याय नहीं मिलता और व्यवस्था की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की जाती, तो स्वाभाविक रूप से जनता का गुस्सा बढ़ता है, जिसके चलते विरोध-प्रदर्शन होते हैं।