सऊदी में तैनात होंगे मिस्र के सैनिक? संसद की आपात बैठक से बढ़ी हलचल

Egypt
साक्षी चतुर्वेदी
साक्षी चतुर्वेदी

मध्य पूर्व (Middle East) में बढ़ते तनाव और क्षेत्रीय सुरक्षा चिंताओं के बीच मिस्र (Egypt) ने एक बड़ा कदम उठाया है। मिस्र की ‘नेशनल डिफेंस काउंसिल’ (National Defence Council) ने सऊदी अरब की सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए वहां अपने सैनिकों को एक रक्षा मिशन पर भेजने की मंजूरी दे दी है।

मिस्र के एक सांसद ने रविवार को इस ऐतिहासिक फैसले की जानकारी दी। इस सैन्य तैनाती को अंतिम रूप देने के लिए मिस्र की संसद (House of Representatives) में रविवार को ही एक आपातकालीन सत्र बुलाया गया है।

राष्ट्रपति अल-सिसी की अध्यक्षता में हुई अहम बैठक

मिस्र की संसद के सदस्य मुस्तफा बक्री (Mostafa Bakry) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर जानकारी देते हुए बताया कि राष्ट्रपति अब्देल फत्ताह अल-सिसी (Abdel Fattah Al Sisi) की अध्यक्षता में हुई परिषद की बैठक में सऊदी अरब में सैनिकों की तैनाती और उनके रक्षा मिशन को मंजूरी दे दी गई है। स्पीकर हेशम बदावी की अध्यक्षता में संसद की बैठक रविवार दोपहर 1 बजे (काहिरा के समयानुसार) निर्धारित की गई थी।

अल इत्तिहादिया पैलेस (Al Ittihadiya Palace) में हुई इस उच्च स्तरीय परिषद की बैठक में मिस्र के वरिष्ठ राजनीतिक, सैन्य और खुफिया अधिकारी शामिल हुए। इनमें संसदीय अध्यक्ष, प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री, सशस्त्र बलों के चीफ ऑफ स्टाफ, गृह मंत्री, वित्त मंत्री और विदेश मंत्री मौजूद थे।

‘सऊदी अरब जो मांगेगा, मिस्र वो देगा’

संसदीय सत्र बुलाए जाने से एक दिन पहले शनिवार को राष्ट्रपति सिसी ने मिस्र की मिलिट्री एकेडमी के एक दीक्षांत समारोह के दौरान कड़ा संदेश दिया था। उन्होंने सऊदी अरब के समर्थन में रक्षात्मक उपाय करने के लिए संसद से अधिकार मांगा था।

अल-सिसी ने स्पष्ट रूप से कहा, “सऊदी अरब अपनी सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा के लिए जो भी उपाय या मदद मांगेगा, मिस्र उसे पूरा करने के लिए तैयार है।” उन्होंने जोर देकर कहा कि कोई भी सैन्य कार्रवाई पूरी तरह से रक्षात्मक होगी और सऊदी के किंग सलमान बिन अब्दुलअजीज और क्राउन प्रिंस (MBS) मोहम्मद बिन सलमान के अनुरोध पर ही की जाएगी।

मिस्र के राष्ट्रपति कार्यालय का बयान

हालांकि राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से जारी आधिकारिक बयान में सैनिकों की तैनाती का सीधे तौर पर जिक्र नहीं किया गया है, लेकिन इसमें तीन प्रमुख प्रतिबद्धताएं जताई गई हैं:

  1. सऊदी अरब के साथ पूर्ण एकजुटता।

  2. राज्य की रक्षा के लिए हर आवश्यक और संभव सहायता।

  3. क्षेत्रीय तनाव को कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयासों को तेज करना।

बयान के अनुसार, परिषद ने क्षेत्रीय घटनाक्रम और सऊदी अरब पर हो रहे “अस्वीकार्य हमलों” की भी गहन समीक्षा की। मिस्र ने साफ किया है कि सऊदी अरब की राष्ट्रीय सुरक्षा मिस्र और व्यापक अरब जगत की सुरक्षा से गहराई से जुड़ी हुई है।

सैनिक भेजने के लिए संविधान के नियम

मिस्र के संविधान के अनुच्छेद 152 के तहत, देश के बाहर किसी भी लड़ाकू या रक्षा मिशन पर सशस्त्र बलों को भेजने के लिए ‘नेशनल डिफेंस काउंसिल’ के साथ परामर्श और संसद (House of Representatives) के दो-तिहाई सदस्यों की मंजूरी अनिवार्य है। इसी के चलते संसद का आपातकालीन सत्र बुलाया गया है।