बीजेपी राज में बुलडोजर, सपा में दंगे, माया के समर्थन में भारतीय मुस्लिम मंच

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महेंद्र सिंह
महेंद्र सिंह

उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों (UP Election 2027) की सुगबुगाहट के बीच सियासी गठजोड़ और समीकरणों ने आकार लेना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में ‘भारतीय मुस्लिम मंच’ (Bhartiya Muslim Manch) ने एक बड़ा राजनीतिक दांव चलते हुए बहुजन समाज पार्टी (BSP) को अपना खुला समर्थन देने का ऐलान कर दिया है।

प्रयागराज में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मंच के राष्ट्रीय संयोजक डॉ. मुमताज आलम रिजवी ने यह घोषणा की। इस दौरान उन्होंने प्रदेश की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) और मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (SP), दोनों पर तीखा राजनीतिक हमला बोला।

‘मायावती के राज में न बुलेट थी, न बुलडोजर’

बसपा सुप्रीमो मायावती की पैरवी करते हुए डॉ. मुमताज आलम रिजवी ने कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता ने समाजवादी पार्टी और बीजेपी, दोनों की सरकारें देख ली हैं।

उन्होंने प्रदेश के मुसलमानों से अपील करते हुए कहा, “बसपा को वोट देकर मायावती को पांचवीं बार मुख्यमंत्री बनाएं। बसपा सरकार के दौरान यूपी में न बुलेट थी, न बुलडोजर था और न ही कोई दंगा-फसाद होता था।”

BJP पर हमला: ‘संविधान ताक पर रख हो रहे फर्जी एनकाउंटर’

भारतीय मुस्लिम मंच के राष्ट्रीय संयोजक ने राज्य की कानून-व्यवस्था को लेकर योगी सरकार पर कड़े प्रहार किए। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार में कानून-व्यवस्था पूरी तरह से चौपट हो चुकी है और केवल ‘बुलेट और बुलडोजर’ का जोर चल रहा है।

डॉ. रिजवी ने कहा, “दलितों और मुसलमानों के घरों पर गैर-कानूनी तरीके से बुलडोजर चलाए जा रहे हैं। संविधान और अदालत को ताक पर रखकर फर्जी मुठभेड़ (Fake Encounters) की जा रही हैं। बीजेपी ने लोगों के घर बसाने का दावा किया था, लेकिन हकीकत यह है कि वे अब लोगों के घर उजाड़ रहे हैं।”

अखिलेश यादव पर भी बरसे: मुजफ्फरनगर दंगों की याद दिलाई

डॉ. रिजवी ने मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी पर भी मुसलमानों को ठगने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मुसलमानों ने बड़े अरमानों के साथ मुलायम सिंह यादव की सरकार बनाने का काम किया था, लेकिन बिना किसी अनुभव के अखिलेश यादव मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठ गए।

उन्होंने अखिलेश सरकार के कार्यकाल को दंगों का दौर बताते हुए कहा, “अखिलेश यादव की सरकार में केवल दंगे हुए थे। उनके अनुभवहीन होने के कारण ही मुजफ्फरनगर जैसा भयानक दंगा हुआ, जिसका खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ा।”

क्या हैं इस ऐलान के सियासी मायने?

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में ‘मुस्लिम-दलित’ समीकरण हमेशा से अहम भूमिका निभाता आया है। हर राजनीतिक पार्टी 2027 से पहले अपने कोर वोट बैंक को साधने की कवायद में जुटी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे समय में ‘भारतीय मुस्लिम मंच’ का बसपा के पाले में जाना, राज्य में एक नया सियासी समीकरण बनाने की कोशिश है, जिससे आने वाले चुनावों में मुसलमानों के बीच बसपा अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन वापस हासिल कर सके।