2027 से पहले पंजाब की सियासत में उलटफेर? AAP और कांग्रेस का गणित!

साल 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी (AAP) ने 92 सीटें जीतकर ऐतिहासिक बहुमत हासिल किया था। लेकिन साढ़े चार साल के कार्यकाल के बाद, अक्टूबर 2026 में पंजाब की राजनीति एक दिलचस्प मोड़ पर खड़ी है।
हालिया सर्वे और ओपिनियन पोल के नतीजे बताते हैं कि अगर आज पंजाब में चुनाव हो जाएं, तो चुनाव परिणाम 2022 की तरह एकतरफा नहीं रहने वाले हैं। आम आदमी पार्टी अब भी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभर सकती है, लेकिन पूर्ण बहुमत का उसका रास्ता काफी कठिन नजर आ रहा है।
क्या कहते हैं हालिया ओपिनियन पोल?
अगस्त और सितंबर 2026 में सामने आए प्रमुख ओपिनियन पोल राज्य में एक मिश्रित राजनीतिक तस्वीर पेश कर रहे हैं:
-
Vote Vibe सर्वे: इस सर्वे के अनुसार AAP को करीब 34 प्रतिशत और कांग्रेस को 30.2 प्रतिशत वोट शेयर मिल सकता है। भाजपा 12% और शिरोमणि अकाली दल (SAD) करीब 11% के आसपास हैं। अमृतपाल सिंह गुट (वारिस पंजाब दे) भी 6-7% वोट हासिल कर सकता है। मुख्यमंत्री के चेहरे के रूप में भगवंत मान अभी भी 40% समर्थन के साथ जनता की पहली पसंद बने हुए हैं।
-
People’s Pulse सर्वे: इस मूड सर्वे में AAP को 37 प्रतिशत और कांग्रेस को 31 प्रतिशत वोट शेयर दिया गया है। सीटों की बात करें तो AAP 58-63 सीटें जीत सकती है, जबकि कांग्रेस 36-43 सीटों तक पहुंच सकती है।
-
News Leader-Matrize सर्वे: सितंबर में आए इस सर्वे के नतीजे राज्य में त्रिशंकु विधानसभा (Hung Assembly) की ओर इशारा करते हैं। इसके अनुसार AAP को 40-45, कांग्रेस को 35-40, भाजपा को 22-27 और अकाली दल को 15-25 सीटें मिल सकती हैं। किसी एक दल को जादुई आंकड़ा (59 सीटें) छूते हुए नहीं दिखाया गया है।
इन 3 बातों से समझें पंजाब का जमीनी मूड
-
AAP सबसे बड़ी ताकत: आम आदमी पार्टी अब भी राज्य में एकल सबसे बड़ी पार्टी बनी हुई है।
-
कांग्रेस की मजबूत वापसी: 2022 की करारी हार के बाद कांग्रेस ने काफी रिकवरी की है और विपक्ष की मुख्य भूमिका में वापस लौट आई है।
-
भाजपा-अकाली दल में सुधार: पुरानी गिरावट से भाजपा और अकाली दल उबर रहे हैं, लेकिन अभी वे बहुमत से बहुत दूर हैं।
AAP के लिए चुनौतियां और राहत
भगवंत मान सरकार की कुछ नीतियां जैसे मुफ्त बिजली, स्वास्थ्य कार्ड और सिंचाई विस्तार योजनाएं जनता के बीच अभी भी सकारात्मक मानी जा रही हैं। मालवा क्षेत्र में AAP की पकड़ मजबूत है और उसे विपक्ष के बंटे होने का सीधा फायदा मिल रहा है।
हालांकि, सत्ता विरोधी लहर (Anti-incumbency) का असर भी साफ दिख रहा है। नशे की बढ़ती समस्या, बेरोजगारी, अकाल तख्त से जुड़े विवाद और मुख्यमंत्री के OSD से जुड़े भ्रष्टाचार के आरोपों ने पार्टी को नुकसान पहुंचाया है। इसके अलावा कई बड़े नेताओं के भाजपा में जाने से संगठन भी कमजोर हुआ है।
क्या है अंतिम निष्कर्ष?
अगर आज चुनाव हों, तो सबसे संभावित तस्वीर यह है कि आम आदमी पार्टी 50-60 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनेगी। कांग्रेस दूसरी मजबूत ताकत के रूप में उभरेगी। राज्य में त्रिशंकु विधानसभा (Hung Assembly) की संभावना काफी अधिक है, ऐसी स्थिति में सरकार बनाने का फैसला चुनाव बाद के गठबंधनों पर निर्भर करेगा।
हालांकि, 2027 का असली चुनाव अभी कई महीनों दूर है। तब तक नशा, बेरोजगारी और किसानों के मुद्दे ही यह तय करेंगे कि पंजाब में भगवंत मान फिर से सरकार बनाते हैं या पुरानी पार्टियां सत्ता में वापसी करती हैं।

