सावंत के सामने कांग्रेस की चुनौती, गोवा में 30% वोटर बन सकते हैं निर्णायक

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भोजराज नावानी
भोजराज नावानी

40 सदस्यीय गोवा विधानसभा में अक्टूबर 2026 की राजनीति एक बेहद संकीर्ण लेकिन निर्णायक मुकाबले की ओर बढ़ती दिख रही है। साल 2022 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 20 सीटें जीतकर प्रमोद सावंत के नेतृत्व में सरकार बनाई थी।

लगभग चार साल बाद, अगर आज गोवा में चुनाव हो जाएं, तो हालिया सर्वे और जमीनी राजनीतिक हालात बताते हैं कि भाजपा अभी भी सबसे मजबूत स्थिति में है, लेकिन स्पष्ट बहुमत हासिल करना उसके लिए उतना आसान नहीं रह गया है।

क्या कहते हैं हालिया ओपिनियन पोल?

हाल ही में सामने आए कुछ प्रमुख सर्वे राज्य में एक दिलचस्प तस्वीर पेश कर रहे हैं:

  • Vote Vibe सर्वे (सितंबर 2026): इस सर्वे के मुताबिक, वोटिंग इंटेंशन में भाजपा 35.1 प्रतिशत वोटों के साथ आगे है, जबकि कांग्रेस 30 प्रतिशत पर है। ‘कौन जीतेगा’ के सवाल पर 39.2% लोगों ने भाजपा और 34.3% ने कांग्रेस का नाम लिया। मुख्यमंत्री पद की पसंद में प्रमोद सावंत 28.8% समर्थन के साथ पहले और कांग्रेस के यूरी अलेमाओ 24.5% के साथ दूसरे स्थान पर हैं। सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा यह है कि करीब 30 प्रतिशत मतदाता अभी भी ‘अनिर्णीत’ हैं, जो इस चुनाव को पूरी तरह से खुला और अप्रत्याशित बनाते हैं।

  • WeePreside सर्वे (जून 2026): इस सर्वे में भाजपा-एमजीपी (MGP) गठबंधन को 20-23 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया था। वहीं, कांग्रेस-जीएफपी (GFP) गठबंधन को 14-17 सीटें और आम आदमी पार्टी (AAP) को 1-2 सीटों तक सीमित रखा गया है।

चुनावी मुद्दे और जमीनी हकीकत

मतदाताओं में सरकार के कामकाज को लेकर स्थानीय विधायकों की तुलना में बेहतर संतुष्टि का स्तर देखा गया है। हालांकि, पर्यावरण को नुकसान, बेरोजगारी, युवाओं का पलायन, पर्यटन में आई गिरावट, महंगाई और भ्रष्टाचार जैसे ज्वलंत मुद्दे चुनाव में हावी रहने की संभावना है।

सत्ता पक्ष की स्थिति: भाजपा के पास सत्ता का सीधा लाभ, मजबूत संगठनात्मक ढांचा और सीएम प्रमोद सावंत की अपेक्षाकृत स्थिर छवि है। पार्टी एमजीपी जैसे सहयोगियों के साथ मैदान में उतरकर 30 सीटों का लक्ष्य लेकर चल रही है। हालांकि, एंटी-इनकम्बेंसी (सत्ता विरोधी लहर) और पर्यावरण-पर्यटन जैसे मुद्दे सरकार पर दबाव बना रहे हैं।

विपक्ष का बिखराव: कांग्रेस राज्य में भाजपा के लिए मुख्य चुनौती है, लेकिन उसके पास विधायकों की संख्या कम है। दूसरी तरफ विपक्ष बंटा हुआ नजर आ रहा है। सितंबर 2026 में AAP और गोवा फॉरवर्ड पार्टी (GFP) ने ‘गोवा फर्स्ट’ नामक गठबंधन बनाया था, लेकिन कुछ हफ्तों बाद ही GFP ने कांग्रेस को भी इसमें शामिल करने की बात कही। इससे गठबंधन में दरार के संकेत मिले। विपक्ष की एकजुटता की यही कमी भाजपा के लिए सबसे ज्यादा फायदेमंद साबित हो रही है।

संभावित नतीजे: अगर आज हों चुनाव

यदि आज चुनाव होते हैं, तो सबसे संभावित तस्वीर यह है:

  1. भाजपा: भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरेगी और अकेले या एमजीपी जैसे सहयोगियों के साथ 20-24 सीटों के आसपास जीतकर सरकार बनाने की स्थिति में रहेगी।

  2. कांग्रेस: कांग्रेस एक मजबूत दूसरी ताकत के रूप में उभरेगी, लेकिन बहुमत के जादुई आंकड़े (21) से दूर रह सकती है।

  3. AAP-GFP: यह गठबंधन कुछ सीटें (खासकर दक्षिण गोवा में) काट सकता है, लेकिन सरकार बनाने की स्थिति में नहीं दिखता।

  4. त्रिशंकु विधानसभा (Hung Assembly): इसकी संभावना फिलहाल कम है, लेकिन अगर विपक्ष एकजुट हो जाए या 30% अनिर्णीत मतदाता कांग्रेस की ओर झुक जाएं, तो समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं।

आज के राजनीतिक मूड के हिसाब से भाजपा सरकार बनाने की सबसे मजबूत दावेदार नजर आ रही है। लेकिन 30 प्रतिशत अनिर्णीत मतदाता इस बात की चेतावनी देते हैं कि मुकाबला बेहद करीबी हो सकता है। गोवा की 40 सीटों वाली छोटी विधानसभा में वोटों का मामूली सा शिफ्ट भी पूरी तस्वीर बदल सकता है। 2027 के असली चुनाव में संगठन, गठबंधन और स्थानीय मुद्दे ही यह फैसला करेंगे कि सत्ता की चाबी किसके हाथ लगेगी।