8वें वेतन आयोग में कर्मचारियों को कितना फायदा? IRTSA ने रखीं बड़ी मांगें

8वें वेतन आयोग की आगामी मुंबई बैठक से पहले केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन निर्धारण को लेकर बड़ा प्रस्ताव सामने आया है। इंडियन रेलवे टेक्निकल सुपरवाइजर्स एसोसिएशन (IRTSA) ने सरकार और वेतन आयोग के समक्ष मांग रखी है कि सभी कर्मचारियों के लिए एक समान फिटमेंट फैक्टर लागू करने के बजाय इसे पदों और पे-लेवल की जिम्मेदारियों के आधार पर अलग-अलग तय किया जाए। इसके तहत सीनियर स्तर के कर्मचारियों के लिए फिटमेंट फैक्टर 4.38 तक तय करने और मौजूदा 3 फीसदी के सालाना इंक्रीमेंट को बढ़ाकर 5 फीसदी करने का सुझाव दिया गया है।
लेवल 1 से 18 के लिए अलग-अलग फिटमेंट फैक्टर का सुझाव
IRTSA ने वेतन आयोग को सौंपी गई अपनी मांगों में ग्रेडेड फिटमेंट फैक्टर लागू करने की सिफारिश की है। संगठन का कहना है कि हर पद पर काम का जोखिम और जवाबदेही अलग होती है, ऐसे में सभी कर्मचारियों की सैलरी एक ही फॉर्मूले से नहीं बढ़ाई जानी चाहिए।
एसोसिएशन ने पे-लेवल के आधार पर यह ढांचा प्रस्तावित किया है:
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लेवल 1 से 3: 2.92 फिटमेंट फैक्टर
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लेवल 4 से 8: 3.50 फिटमेंट फैक्टर
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लेवल 9 से 13: 3.80 फिटमेंट फैक्टर
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लेवल 14 से 16: 4.09 फिटमेंट फैक्टर
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लेवल 17 से 18: 4.38 फिटमेंट फैक्टर
3% की जगह 5% इंक्रीमेंट और प्रमोशन पर दोहरी बढ़ोतरी
वेतन वृद्धि के वार्षिक फॉर्मूले में बदलाव की वकालत करते हुए IRTSA ने सालाना इंक्रीमेंट को मौजूदा 3 फीसदी से बढ़ाकर बेसिक सैलरी का 5 फीसदी करने का प्रस्ताव दिया है। इसके साथ ही पदोन्नति (प्रमोशन) मिलने पर कर्मचारियों को दो सालाना इंक्रीमेंट के बराबर वित्तीय लाभ देने की बात कही गई है।
संगठन के अनुसार, हर 10 साल में वेतन संशोधन होने से लगातार बढ़ती महंगाई के बीच कर्मचारियों की क्रय शक्ति प्रभावित होती है, जिसे संतुलित रखने के लिए यह बदलाव जरूरी है।
न्यूनतम वेतन के फॉर्मूले में 4.6 कंजम्प्शन यूनिट शामिल करने की मांग
न्यूनतम वेतन की गणना के लिए संगठन ने परिवार की तीन यूनिट के पुराने फॉर्मूले को बदलकर 4.6 कंजम्प्शन यूनिट को आधार बनाने का सुझाव दिया है। इस नए बास्केट में बदलते समय की जरूरतों को देखते हुए बोतलबंद पेयजल, इंटरनेट और हेल्थ इंश्योरेंस के खर्चों को भी जोड़ने की मांग की गई है।
फील्ड और तकनीकी कर्मचारियों की कार्यप्रणाली का जिक्र करते हुए IRTSA ने कहा कि रेलवे के तकनीकी कर्मचारी हफ्ते में 48 घंटे काम करते हैं, जबकि दफ्तरों में सपोर्ट स्टाफ के लिए यह समय 45 घंटे है। इसलिए वेतन निर्धारण में ड्यूटी के घंटे, जोखिम और पद की जटिलता को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाना चाहिए।
22 अक्टूबर से मुंबई में अहम बैठक, 2027 में रिपोर्ट के आसार
वेतन आयोग की पिछली बैठक 8 अक्टूबर को बेंगलुरु में आयोजित की गई थी। अब 22 अक्टूबर से मुंबई में महत्वपूर्ण बैठकों का दौर शुरू हो रहा है, जहां विभिन्न कर्मचारी संगठन वेतन, पेंशन और फिटमेंट फैक्टर पर अपने पक्ष रखेंगे।
केंद्र सरकार ने 3 नवंबर 2025 को जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय 8वें वेतन आयोग का गठन किया था। आयोग को गठन की तारीख से 18 महीने के भीतर अपनी सिफारिशें सौंपनी हैं, जिसके आधार पर अंतिम रिपोर्ट मई या जून 2027 तक आने की संभावना है।

