क्या है “नजला बर उज्वे ज़ईफ़ मीरेज़त” और क्यों मौलाना ने कहा दूर रहें युवा

दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रस्तावित धरना-प्रदर्शन को लेकर ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने एक अहम अपील जारी की है। उन्होंने दिल्ली-एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले मुस्लिम युवाओं को इस प्रदर्शन से पूरी तरह दूरी बनाए रखने की सलाह दी है। मौलाना ने पिछली घटनाओं का हवाला देते हुए अंदेशा जताया है कि अगर प्रदर्शन हिंसक होता है तो सबसे ज्यादा नुकसान इसी समुदाय के लोगों को उठाना पड़ सकता है।
‘लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन हिंसा स्वीकार्य नहीं’
मौलाना रजवी ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि विरोध प्रदर्शन अगर हिंसक रूप ले लेते हैं, तो इससे आम जनता को भारी परेशानी उठानी पड़ती है। किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में हिंसा को जायज नहीं ठहराया जा सकता।
युवाओं की सुरक्षा के लिए दी दूरी बनाने की सलाह
उन्होंने विशेष रूप से दिल्ली और उससे सटे उत्तर प्रदेश के जिलों में काम करने वाले, मजदूरी या कारोबार करने वाले मुस्लिम युवाओं को संबोधित किया। जमात अध्यक्ष ने साफ किया कि यह अपील किसी राजनीतिक मंशा से नहीं, बल्कि मुस्लिम युवाओं की सुरक्षा और उनके हितों को ध्यान में रखकर की गई है, ताकि वे बिना वजह किसी संभावित विवाद या अप्रिय स्थिति का शिकार न हों।
फारसी कहावत का जिक्र कर याद दिलाई पुरानी घटनाएं
अपने बयान में रजवी ने पिछले कुछ धरना-प्रदर्शनों का जिक्र किया, जिनमें हिंसा भड़क गई थी। उन्होंने कहा कि उन घटनाओं के दौरान कई मुस्लिम युवाओं को पुलिस कार्रवाई और कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा था।
हालात बिगड़ने के गंभीर नतीजों की ओर इशारा करते हुए उन्होंने एक फारसी कहावत का इस्तेमाल किया- “नजला बर उज्वे ज़ईफ़ मीरेज़त” (चोट या मुसीबत अक्सर कमजोर हिस्से पर पड़ती है)। मौलाना ने आगाह किया कि अगर इस बार भी प्रदर्शन के दौरान कोई हिंसा होती है, तो पूरी संभावना है कि सबसे ज्यादा परेशानी मुसलमानों को ही उठानी पड़े, इसलिए समुदाय के युवाओं का एहतियात बरतना बेहद जरूरी है।

