Fitch और Moody’s के बीच अफ्रीका की नई एंट्री, लॉन्च हुई AfCRA

अफ्रीकी देशों ने बुधवार को अपनी खुद की क्रेडिट रेटिंग एजेंसी लॉन्च कर दी है। लगभग एक दशक की लंबी बातचीत के बाद अफ्रीकन यूनियन (AU) के समर्थन से ‘अफ्रीका क्रेडिट रेटिंग एजेंसी’ (AfCRA) की शुरुआत की गई है। इस एजेंसी का मुख्यालय मॉरीशस में बनाया गया है, जिसे वहां के स्थापित वित्तीय सेवा उद्योग को देखते हुए चुना गया है। इसका मुख्य उद्देश्य दुनिया की बड़ी वित्तीय संस्थाओं के उन आकलनों का मुकाबला करना है, जिन्हें अफ्रीकी देश अनुचित मानते हैं और जिनके कारण उन्हें अंतरराष्ट्रीय बाजार से काफी महंगे दर पर कर्ज लेना पड़ता है। यह नई एजेंसी देशों, व्यवसायों और संस्थानों की साख (creditworthiness) का आकलन करेगी।
‘बिग थ्री’ के आकलनों का विकल्प
ग्लोबल क्रेडिट रेटिंग मार्केट में मुख्य रूप से तीन बड़ी एजेंसियों—फिच (Fitch), मूडीज (Moody’s) और एसएंडपी (S&P)—का दबदबा है, जिन्हें ‘बिग थ्री’ कहा जाता है। इन एजेंसियों पर अतीत में अफ्रीकी अर्थव्यवस्थाओं का अनुचित तरीके से कमतर आकलन करने के आरोप लगते रहे हैं।
AfCRA के पीछे काम करने वाली संस्था ‘अफ्रीकन पीयर रिव्यू मैकेनिज्म’ के अनुसार, महाद्वीप के 23 देशों को पारंपरिक एजेंसियों द्वारा कोई रेटिंग ही नहीं दी जाती है। विश्लेषकों का भी मानना है कि ये ग्लोबल एजेंसियां अक्सर अफ्रीका के विशाल असंगठित क्षेत्र (informal sector) को नजरअंदाज कर देती हैं, जो आधिकारिक आंकड़ों में आसानी से दर्ज नहीं हो पाता है।
नाइजीरिया के राष्ट्रपति बोला टीनूबू ने पिछले महीने ‘एक्स’ पर AfCRA का स्वागत करते हुए लिखा था, “अफ्रीका अपने पक्ष में रेटिंग नहीं मांग रहा है। हम निष्पक्ष रेटिंग की मांग कर रहे हैं, जो हमारे बुनियादी आधारों और हमारी अर्थव्यवस्थाओं में हो रहे वास्तविक सुधारों पर आधारित हो।”
महंगे कर्ज का बोझ कम करने की कोशिश
खराब या कम क्रेडिट रेटिंग का सीधा असर जमीनी स्तर पर पड़ता है, क्योंकि इसके कारण निवेशक कर्ज देने के लिए अधिक ब्याज दर वसूलते हैं। आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (OECD) के अनुमानों के मुताबिक, साल 2024 में अंतरराष्ट्रीय बाजारों से कर्ज लेने पर अफ्रीका को औसतन प्रति 100 डॉलर पर 9 डॉलर का ब्याज चुकाना पड़ा। इसकी तुलना में एशिया के उभरते बाजारों के लिए यह लागत 4.70 डॉलर और लैटिन अमेरिका के लिए 6.50 डॉलर थी।
कंसल्टेंसी फर्म ‘डेवलपमेंट रीइमेजिन्ड’ की मुख्य कार्यकारी हन्ना वानजी राइडर ने हाल ही में चैथम हाउस के एक सेमिनार में कहा कि AfCRA सिर्फ मौजूदा एजेंसियों के प्रति अफ्रीका की नाराजगी का परिणाम नहीं है। उनके मुताबिक, इसके पीछे का विचार यह है कि नई एजेंसी अफ्रीकी अर्थव्यवस्थाओं को ज्यादा स्पष्ट नजरिए से देख सकेगी।
स्वतंत्रता और विश्वसनीयता साबित करने की चुनौती
एजेंसी के संस्थापकों ने निवेशकों को भरोसा दिया है कि इसके कामकाज में कोई सरकारी हस्तक्षेप नहीं होगा। हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि AfCRA की असली परीक्षा तब होगी, जब उसे किसी अफ्रीकी सरकार की रेटिंग घटानी (downgrade) पड़ेगी।
केन्या की स्ट्रैथमोर यूनिवर्सिटी फाउंडेशन के प्रबंधन सलाहकार जैकब ओरेकी ने न्यूज एजेंसी एएफपी को बताया, “अफ्रीकी कर्जदारों ने लंबे समय तक हाई-रिस्क प्रीमियम चुकाया है और मानक मॉडल असंगठित अर्थव्यवस्था व सुधारों को नजरअंदाज कर सकते हैं। लेकिन एक रेटिंग एजेंसी को उसकी स्वतंत्रता और सटीकता के आधार पर परखा जाता है, न कि इस बात पर कि उसका मुख्यालय कहां है।”
ओरेकी ने स्पष्ट किया कि अगर यह एजेंसी किसी अफ्रीकी देश की रेटिंग कम नहीं करेगी, तो बाजार इसे केवल एक वकालत (advocacy) करने वाले समूह के तौर पर देखेगा। निवेशक अपने फैसले एजेंसी की विश्वसनीयता पर लेंगे, न कि इस तथ्य पर कि यह एक अफ्रीकी एजेंसी है।

