Hormuz Crisis: 19 जहाज आमने-सामने, समुद्र में ही हो रहा तेल का ट्रांसफर

मस्कट/दुबई: पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव और हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में सुरक्षा जोखिमों के बीच तेल निर्यातक कंपनियों और जहाजों ने समंदर में ही कार्गो ट्रांसफर का नया रास्ता तेज कर दिया है। यूरोपीय स्पेस एजेंसी (ESA) के सेंटिनल-2 सैटेलाइट नेटवर्क से 4 अक्टूबर 2026 को ली गई तस्वीरों में ओमान के सोहार पोर्ट के पास समुद्र में एक साथ 19 जहाजों को शिप-टू-शिप (STS) कार्गो ट्रांसफर करते हुए पकड़ा गया है।
मैरीटाइम एनालिटिक्स फर्म ‘टैंकरट्रैकर्स’ (TankerTrackers) द्वारा इन हाई-रिजॉल्यूशन सैटेलाइट तस्वीरों के विश्लेषण से साफ हुआ है कि खाड़ी क्षेत्र के प्रमुख उत्पादक हॉर्मुज के संवेदनशील और जोखिम भरे जलक्षेत्र में जाने से बचने के लिए खुले समुद्र में ही तेल की अदला-बदली कर रहे हैं।
11 कच्चे तेल और 2 एलएनजी के जहाज: कार्गो का पूरा ब्योरा
सैटेलाइट डेटा और जहाजों के ट्रांसपोंडर मेटाडेटा की जांच से पुष्टि हुई है कि इन सभी 19 ऑपरेशनों में तरल ऊर्जा उत्पाद (Liquid Energy Commodities) शामिल थे:
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कच्चा तेल (Crude Oil): 11 जहाजों में क्रूड ऑयल ट्रांसफर किया जा रहा था।
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रिफाइंड उत्पाद (Fuel Oil, Diesel आदि): 6 जहाजों में प्रोसेस्ड ईंधन का ट्रांसफर देखा गया।
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एलएनजी (LNG): 2 जहाजों में लिक्विफाइड नेचुरल गैस की शिफ्टिंग चल रही थी।
शिप-टू-शिप (STS) ट्रांसफर की प्रक्रिया में तेल टैंकर किसी बंदरगाह पर जाने के बजाय खुले समुद्र में ही एक जहाज से दूसरे जहाज में अपना माल खाली करते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य संवेदनशील समुद्री रास्तों के जोखिम से बचना या कार्गो के मूल स्रोत और अंतिम गंतव्य की पहचान को छिपाना होता है।
हॉर्मुज के खतरे से बचने की बाईपास रणनीति
शिपिंग जानकारों के मुताबिक, कंपनियों ने बड़े जहाजों को सुरक्षित रखने के लिए एक विशेष रणनीति अपनाई है। इसके तहत छोटे क्षेत्रीय ‘शटल टैंकर’ खाड़ी से तेल भरकर लाते हैं और हॉर्मुज जलडमरूमध्य से ठीक बाहर ओमान की खाड़ी में खड़े विशालकाय महासागरीय टैंकरों (Ocean-going tankers) को सौंप देते हैं।
इस व्यवस्था से चार्टर कंपनियों को अपने सबसे महंगे और बड़े जहाजों को सीधे युद्ध जोखिम वाले इलाके में भेजने से मुक्ति मिल जाती है।
एंकरेज जोन्स पर क्षमता से ज्यादा दबाव, घंटों की देरी
अचानक बढ़े इस ट्रैफिक ने ओमान तट के बुनियादी ढांचे को दबाव में ला दिया है। स्थानीय समुद्री निगरानी सूत्रों का कहना है कि 19 ऑपरेशनों के एक साथ चलने से सोहार का एंकरेज एरिया पूरी तरह फुल हो गया।
टगबोट्स, भारी फेंडर्स और विशेष मूरिंग क्रू की कमी के कारण रविवार को कई जहाजों को घंटों के जाम और देरी का सामना करना पड़ा। रिपोर्टों के अनुसार, ओमान के सोहार और यूएई के फुजैरा में बने एसटीएस हब अपनी अधिकतम क्षमता के करीब काम कर रहे हैं।
उद्योग ट्रैकर ‘सेफ्टी 4 सी’ (Safety 4 Sea) और शिपिंग डेटा के अनुसार, सितंबर में इस क्षेत्र में दैनिक एसटीएस वॉल्यूम बढ़कर करीब 25 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया था, जो हॉर्मुज से गुजरने वाले कुल तेल का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा है।
‘डार्क स्टेटस’ में चल रहे कई टैंकर, एशियाई रिफाइनरियों पर असर
इस भारी हलचल के बीच सुरक्षा को लेकर एक और पहलू सामने आया है। कुछ जहाजों ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों के तहत संचालन किया, लेकिन कई टैंकर अपने ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (AIS) को बंद करके या ‘डार्क स्टेटस’ (प्रतिबंधित ट्रांसपोंडर) में चलते पाए गए।
अरब की खाड़ी में युद्ध जोखिम बीमा प्रीमियम (War-risk insurance) में भारी उछाल के चलते ओमान तट पर जहाजों की यह निर्भरता तेजी से बढ़ी है। एसटीएस गतिविधियों में अचानक आई इस तेजी के कारण बहुत बड़े कच्चे तेल के वाहकों (VLCC) की उपलब्धता कम हो गई है, जिससे भाड़ा दरें (Freight rates) बढ़ गई हैं और इसका सीधा असर एशियाई रिफाइनरियों को होने वाली सप्लाई पर पड़ रहा है।

