SIR Draft में 13.39 करोड़ नाम बाहर, सबसे ज्यादा वोटर क्यों हुए ‘Shifted’?

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शकील अहमद सैफी
शकील अहमद सैफी

चुनाव आयोग (Election Commission) की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के ड्राफ्ट रोल में एक बड़ा आंकड़ा सामने आया है। तीन चरणों में पूरी हुई इस प्रक्रिया के बाद मतदाता सूची से 13.39 करोड़ नामों को अलग कर दिया गया है।

इन नामों को ड्राफ्ट रोल स्टेज पर विभिन्न श्रेणियों के तहत बाहर रखा गया है। बाहर किए गए इन नामों में सबसे बड़ा हिस्सा उन मतदाताओं का है जो अपनी पुरानी जगह से स्थायी रूप से किसी अन्य स्थान पर शिफ्ट हो चुके हैं।

95.40 करोड़ मतदाताओं के डेटा की हुई जांच

चुनाव आयोग ने SIR के तीन चरणों में कुल 95.40 करोड़ मतदाताओं के डेटा को शामिल किया था। जांच प्रक्रिया के बाद 13.39 करोड़ नामों को अलग-अलग कारणों से ड्राफ्ट लिस्ट से बाहर किया गया है।

आंकड़ों की श्रेणीवार स्थिति इस प्रकार है:

  • 6.30 करोड़ मतदाता स्थायी रूप से दूसरी जगह शिफ्ट हो चुके हैं।

  • 3.01 करोड़ मतदाता अपने पते पर अनुपस्थित मिले या उन्हें ट्रेस नहीं किया जा सका।

  • 2.80 करोड़ मतदाताओं की मृत्यु हो चुकी है।

  • 1.02 करोड़ नाम डुप्लीकेट (दो जगह नाम) पाए गए।

  • 26 लाख नाम अन्य कारणों से अलग किए गए।

अनुपस्थित, स्थान परिवर्तन, दो जगह नाम और मृत श्रेणी को मिला दिया जाए, तो यह आंकड़ा 13.13 करोड़ बैठता है। यह बाहर किए गए कुल 13.39 करोड़ नामों का लगभग 98 फीसदी है।

शिफ्ट हुए 6 करोड़ वोटरों के रिकॉर्ड पर सवाल

अलग किए गए 13 करोड़ नामों में डेड, शिफ्ट और डुप्लीकेट के मामले शामिल हैं। इनमें सबसे बड़ी संख्या 6.30 करोड़ शिफ्ट हुए मामलों की है। इन आंकड़ों के सामने आने के बाद सबसे अहम स्थिति शिफ्ट हुए मतदाताओं की है कि पुरानी जगह से नाम हटने के बाद क्या उनके नाम नई जगह की वोटर लिस्ट में जोड़े गए हैं या नहीं।

दावे-आपत्तियों के बाद बदल सकते हैं आंकड़े

13.39 करोड़ नामों के बाहर होने का यह आंकड़ा अंतिम (Final) नहीं है। चुनाव आयोग के अनुसार, यह सिर्फ Draft Electoral Roll Stage की रिपोर्ट है। विशेष अभियान के दौरान अगर कोई मतदाता सामने आता है और अपने दस्तावेज उपलब्ध कराता है, तो ड्राफ्ट के इन आंकड़ों में बदलाव हो सकता है।

इसके लिए मतदाताओं को दावा और आपत्ति दर्ज करानी होगी। स्थिति स्पष्ट होने पर पात्र मतदाताओं को सूची में दोबारा शामिल किया जा सकता है।

फाइनल रोल के प्रकाशन पर साफ होगी वास्तविक तस्वीर

चुनाव आयोग के मुताबिक, नए मतदाताओं और SIR के दौरान गलती से छूट गए पात्र वोटरों के नाम भी लगातार जोड़े जा रहे हैं। विशेष अभियान के तहत दावों और आपत्तियों के निस्तारण के बाद ही चुनाव आयोग अंतिम सूची जारी करेगा। Final Electoral Roll प्रकाशित होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि वोटर लिस्ट से वास्तव में कितने नाम स्थायी रूप से हटे और कितने नाम दोबारा शामिल किए गए।