Aradhana Mishra: तीन बार की MLA से यूपी कांग्रेस अध्यक्ष तक कैसे पहुंचीं?

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अजमल शाह
अजमल शाह

उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने संगठन में बड़ा फेरबदल करते हुए पार्टी की कमान विधायक आराधना मिश्रा ‘मोना’ (Aradhana Mishra ‘Mona’) को सौंप दी है। वह अगस्त 2023 से प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे अजय राय की जगह लेंगी। इसके साथ ही पार्टी ने सहारनपुर के सांसद इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया है।

आराधना मिश्रा को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर कांग्रेस ने एक तीर से दो बड़े सियासी निशाने साधे हैं—पहला ब्राह्मण मतदाताओं की लामबंदी और दूसरा महिला वोट बैंक में पैठ। आइए जानते हैं कि कौन हैं आराधना मिश्रा और कैसा रहा है उनका राजनीतिक सफर।

कौन हैं आराधना मिश्रा ‘मोना’?

20 अप्रैल 1974 को जन्मी आराधना मिश्रा के पास सक्रिय राजनीति का दो दशकों से अधिक का लंबा अनुभव है। वह कांग्रेस के दिग्गज नेता और राज्यसभा में उपनेता प्रमोद तिवारी की बेटी हैं।

प्रतापगढ़ जिले की रामपुर खास विधानसभा सीट को तिवारी परिवार का अजेय दुर्ग माना जाता है। इस सीट पर पिछले पांच दशकों (करीब 45 वर्षों) से तिवारी परिवार का दबदबा कायम है। प्रमोद तिवारी यहां से पहली बार 1980 में विधायक बने थे और लगातार 9 बार इस सीट से विधानसभा पहुंचे। आराधना मिश्रा ने इसी राजनीतिक विरासत को न सिर्फ संभाला, बल्कि अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान भी स्थापित की।

उपचुनाव से धमाकेदार एंट्री और जीत की हैट्रिक

आराधना मिश्रा की चुनावी राजनीति में शुरुआत एक उपचुनाव के जरिए हुई थी:

  • शानदार डेब्यू: जब प्रमोद तिवारी राज्यसभा के लिए चुने गए, तब खाली हुई रामपुर खास सीट पर कांग्रेस ने 2014 के उपचुनाव में आराधना मिश्रा को प्रत्याशी बनाया। उन्होंने अपने पहले ही चुनाव में 67,679 वोटों के विशाल अंतर से ऐतिहासिक जीत दर्ज की।

  • 2017 का चुनाव: मोदी लहर के बावजूद उन्होंने 2017 के विधानसभा चुनाव में 17,066 मतों के अंतर से अपनी सीट बचाए रखी।

  • 2022 की हैट्रिक: 2022 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार नागेश प्रताप सिंह को 14,741 वोटों से हराकर रामपुर खास से जीत की हैट्रिक लगाई।

वह उत्तर प्रदेश विधानसभा में कांग्रेस विधानमंडल दल (CLP) की नेता के तौर पर भी सदन में पार्टी का प्रमुख चेहरा रही हैं।

एक तीर से दो निशाने: ब्राह्मण और महिला वोट बैंक साधने की रणनीति

आराधना मिश्रा को प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी सौंपकर कांग्रेस आलाकमान ने 2027 के चुनाव से पहले एक सोची-समझी बिसात बिछाई है:

  1. 12% ब्राह्मण वोटर्स पर नजर: आराधना मिश्रा ब्राह्मण समुदाय से आती हैं। उत्तर प्रदेश की 100 से ज्यादा विधानसभा सीटों पर ब्राह्मण मतदाता चुनावी नतीजों को तय करने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। मौजूदा राजनीतिक माहौल में सवर्ण और ब्राह्मण मतदाताओं को पार्टी की ओर खींचने के लिए कांग्रेस ने यह दांव चला है।

  2. महिला वोट बैंक में सेंधमारी: हाल के वर्षों में कई राज्यों और राष्ट्रीय चुनावों में महिला मतदाताओं की भूमिका निर्णायक रही है, जिसका बड़ा फायदा भाजपा को मिलता रहा है। कांग्रेस ने आराधना मिश्रा के रूप में एक मजबूत और मुखर महिला चेहरे को शीर्ष पर बैठाकर आधी आबादी को सीधा संदेश दिया है। रीता बहुगुणा जोशी के बाद वह यूपी कांग्रेस की कमान संभालने वाली दूसरी महिला नेता हैं।

पिता प्रमोद तिवारी के विशाल राजनीतिक अनुभव, समाजवादी पार्टी नेतृत्व के साथ मधुर संबंधों और जमीनी पकड़ के साथ आराधना मिश्रा के सामने अब उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के संगठन को नए सिरे से खड़ा करने की बड़ी चुनौती होगी।