सीतापुर में क्यों शुरू हुआ तीन दिवसीय उपवास सत्याग्रह और क्या हैं प्रमुख मांगें

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अजमल शाह
अजमल शाह

 महात्मा गांधी की जयंती (2 अक्टूबर) के अवसर पर उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में संविधान और मताधिकार की रक्षा को लेकर एक बड़ा जन-आंदोलन शुरू हो गया है। सिधौली विधानसभा क्षेत्र के गोंदलामऊ ब्लॉक स्थित गनेशपुर में एसआईआर (SIR) और चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों को लेकर तीन दिवसीय ‘उपवास सत्याग्रह’ का शंखनाद किया गया है। लोक आंदोलन न्यास की कार्यकारी अध्यक्षा और वरिष्ठ समाजसेवी कल्पना ईनामदार ने इस अनशन की शुरुआत की है, जिनके समर्थन में हजारों की संख्या में महिलाएं और विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ता एकजुट हुए हैं।

संविधान की रक्षा के लिए आखिरी सांस तक लडूंगी: कल्पना ईनामदार

यह उपवास सत्याग्रह इंडियन पीपल्स फ्रंट (IPF) के तत्वावधान में और राष्ट्रीय किसान मंच व महिला अधिकार शक्ति अभियान के सहयोग से शुरू किया गया है। अन्ना हजारे की कोर कमेटी (महाराष्ट्र) से जुड़ीं वरिष्ठ समाजसेवी कल्पना ईनामदार ने अनशन पर बैठते हुए स्पष्ट किया कि, “संविधान नागरिकों के अधिकारों की आधारशिला है और मैं इसकी रक्षा के लिए अपनी आखिरी सांस तक लड़ूंगी।”

उन्होंने जोर देकर कहा कि इस आंदोलन का उद्देश्य किसी व्यक्ति या संस्था पर व्यक्तिगत आरोप लगाना नहीं है, बल्कि चुनाव और मतदाता सूची (Voter List) से संबंधित ठोस दस्तावेजी सवालों की किसी सक्षम संवैधानिक, वैधानिक या न्यायिक मंच पर निष्पक्ष जांच कराना है।

‘वोट पर डाका मतलब बाबा साहेब के संविधान पर डाका’

सत्याग्रह को समर्थन देने पहुंचे इंडियन पीपल्स फ्रंट (IPF) के अध्यक्ष पं. शेखर दीक्षित ने मंच से चुनाव आयोग और सत्ता पक्ष पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा, “नागरिकों के वोट के अधिकार पर डाका डालना सीधा बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के संविधान पर डाका है।”

श्री दीक्षित ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि आयोग अपनी शक्तियों का दुरुपयोग किसी विशेष राजनीतिक दल को लाभ पहुंचाने के लिए कर रहा है, जिसे उनका संगठन कतई बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने सत्ता पक्ष पर भी निशाना साधते हुए कहा कि सत्ताधारी दल लोकतंत्र का सम्मान नहीं करता और अंग्रेजों की तर्ज पर देश को फिर से गुलाम बनाकर राजतंत्र लागू करना चाहता है।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग

आंदोलनकारियों की सबसे प्रमुख मांग मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और उनके कार्यकाल में हुए चुनावों की जांच से जुड़ी है।

  • शेखर दीक्षित ने स्पष्ट शब्दों में सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई।

  • राष्ट्रीय किसान मंच के प्रभारी मोहित मिश्रा ने कहा कि ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल में संपन्न चुनावों और मतदाता सूची (SIR) से संबंधित जो भी दस्तावेजी प्रश्न उठे हैं, उनका कानून के अनुसार निष्पक्ष परीक्षण होना चाहिए। यदि किसी स्तर पर अनियमितता पाई जाती है, तो नियमानुसार कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।

तीन दिन तक चलेगा सत्याग्रह

कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. ब्रिज बिहारी ने की। यह तीन दिवसीय उपवास सत्याग्रह 2, 3 और 4 अक्टूबर तक जारी रहेगा। इन तीन दिनों में कल्पना ईनामदार अनशन पर रहेंगी। आयोजकों का दावा है कि आने वाले दिनों में और भी बड़ी संख्या में ग्रामीण, किसान और महिलाएं सत्याग्रह स्थल पर पहुंचकर इस लोकतांत्रिक लड़ाई को अपना समर्थन देंगे।

कार्यक्रम में राष्ट्रीय किसान मंच के प्रदेश अध्यक्ष अरुण कुमार बाबा, भारतेंदु मिश्रा, सुबोध यादव, अमरीश कनौजिया, जगदीश राठौड़, शहंशाह हुसैन समेत कई गणमान्य पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।