Drishyam 3 Review: क्या विजय सालगांवकर फिर पुलिस को चकमा दे पाए?

फिल्म: दृश्यम 3 (Drishyam 3) स्टार कास्ट: अजय देवगन, तब्बू, जयदीप अहलावत, कमलेश सावंत, प्रकाश राज, इशिता दत्ता डायरेक्टर: अभिषेक पाठक रेटिंग: 4/5 स्टार (⭐⭐⭐⭐)
‘दृश्यम 3’ यकीनन इस साल की सबसे बेहतरीन थ्रिलर फिल्म है। कहानी के ताने-बाने से लेकर कलाकारों की दमदार एक्टिंग और दिल की धड़कनें रोक देने वाले क्लाइमैक्स तक, सब कुछ इतना सधा हुआ है कि आप फिल्म के दौरान एक मिनट के लिए भी अपनी पलकें नहीं झपका पाएंगे। इस फ्रेंचाइजी के इस आखिरी पार्ट ने दर्शकों की उम्मीदों को न सिर्फ छुआ है, बल्कि उससे कहीं आगे निकल गई है।
कहानी : कंकाल के इर्द-गिर्द घूमता माइंड गेम
‘2 अक्टूबर को क्या हुआ था?’ यह वो सवाल है जो आज भी साए की तरह सालगांवकर परिवार का पीछा कर रहा है। विजय सालगांवकर (Ajay Devgn) अपनी दुनिया को सामान्य बनाने की पूरी कोशिश में जुटा है, लेकिन उस खौफनाक अतीत की दहशत परिवार की आंखों से ओझल नहीं हुई है।
दूसरी तरफ, मीरा देशमुख (Tabu) के अंदर बदले और न्याय की आग अभी बुझी नहीं है। केस एक बार फिर खुलता है, और इस बार कमान सौंपी जाती है क्राइम ब्रांच के तेज-तर्रार एसपी राजवीर तोमर (Jaideep Ahlawat) को।
सबसे दिलचस्प मोड़ यह है कि पुलिस अब 2 अक्टूबर के पुराने पन्नों को नहीं पलट रही, बल्कि उनकी पूरी जांच उस बरामद कंकाल (स्केलेटन) की असली पहचान पर टिक जाती है। लेकिन विजय सालगांवकर हार मानने वालों में से नहीं है। वह ऐसा चक्रव्यूह रचता है कि पुलिस खुद उसी में उलझकर रह जाती है। यह माइंड गेम कैसे खेला जाता है, यही फिल्म की असली जान है।
एक्टिंग: आंखों से एक्टिंग करते अजय, छा गए जयदीप अहलावत
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अजय देवगन: कमाल की बात यह है कि इस फ़िल्म में अजय देवगन के पास डायलॉग्स बहुत कम हैं। कहने को वे दो-चार बातें ही बोलते दिखे हैं, लेकिन सिर्फ आंखों और अपने सधे हुए एक्सप्रेशन्स के दम पर उन्होंने पूरी फिल्म में जान डाल दी है।
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जयदीप अहलावत: एसपी राजवीर तोमर के रोल में जयदीप का स्वैग देखने लायक है। कई जगह ऐसा लगता है कि फिल्म के असली हीरो वही हैं। उनका अभिनय इतना दमदार है कि वह स्क्रीन पर पूरी तरह छा जाते हैं।
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कमलेश सावंत: गायतोंडे के किरदार में कमलेश सावंत ने एक बार फिर कमाल कर दिया है। उन्हें बेहतरीन स्क्रीन स्पेस और दमदार डायलॉग्स मिले हैं, जिसके साथ उन्होंने पूरा न्याय किया है।
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तब्बू और अन्य कलाकार: तब्बू, प्रकाश राज और इशिता दत्ता सहित सभी कलाकारों ने अपने-अपने किरदारों में बेहतरीन काम किया है।
डायरेक्शन : हर सीन और डायलॉग में है दम
अभिषेक पाठक (Abhishek Pathak) ने बतौर डायरेक्टर ‘दृश्यम 3’ को मास्टरपीस बना दिया है। थिएटर्स में दर्शक उनके डायरेक्शन पर तालियां और सीटियां बजाने पर मजबूर हो रहे हैं। फिल्म का हर एक सीन परफेक्ट लगता है और हर डायलॉग सस्पेंस को एक कदम आगे ले जाता है। कहानी की गति आपको बोर होने का एक मौका नहीं देती।
क्यों देखें?
‘दृश्यम 3’ इस आइकॉनिक फ्रेंचाइजी का आखिरी और सबसे निर्णायक हिस्सा है। इस पार्ट में यह पूरी तरह दिखा दिया गया है कि विजय अपने परिवार को आखिरकार हमेशा के लिए कैसे बचाता है? पुलिस सालों से जिस सवाल का जवाब ढूंढ रही थी, उसका क्या अंत होता है?
फिल्म का क्लाइमैक्स आपको इतना जबरदस्त झटका देता है कि हॉल की बत्तियां जलने के बाद भी सिनेमा के खुमार से बाहर आने में आपको वक्त लगेगा। अगर आप रोंगटे खड़े कर देने वाले सस्पेंस, थ्रिल और सधे हुए सिनेमा के शौकीन हैं, तो ‘दृश्यम 3’ इस साल की वो फिल्म है जिसे बड़े पर्दे पर मिस करना किसी गुनाह से कम नहीं है। ये ‘मस्ट वॉच’ (Must Watch) है!

