महंगे मिसाइलों के सामने सस्ते ड्रोन का दांव, यूक्रेन से क्या सीख रहा जापान?

रूस के खिलाफ जारी युद्ध में यूक्रेन के जमीनी अनुभव को अब जापान अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने के लिए एक अहम टूल के रूप में इस्तेमाल कर रहा है। टोक्यो अपनी रक्षात्मक और आक्रामक क्षमताओं को मजबूत करने के लिए यूक्रेन से नई सैन्य प्रौद्योगिकियों, विशेषकर ड्रोन युद्ध नीति की खुफिया जानकारी हासिल कर रहा है। क्षेत्रीय सुरक्षा चिंताओं के बीच जापान के वरिष्ठ राजनेता और पूर्व रक्षा मंत्री इत्सुनोरी ओनोडेरा की इस सप्ताह कीव यात्रा ने इस बढ़ती रक्षा साझेदारी पर मुहर लगा दी है।
द्विपक्षीय सुरक्षा सहयोग और रूस पर दबाव
जापानी डेलिगेशन का नेतृत्व करते हुए ओनोडेरा बुधवार को कीव पहुंचे, जहां उन्होंने यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिगा सहित कई शीर्ष अधिकारियों से मुलाकात की।
यूक्रेनी विदेश मंत्रालय के अनुसार, सिबिगा ने कहा, “यूक्रेन जापान के साथ अपने अनुभव और क्षमताओं के आधार पर पारस्परिक रूप से लाभकारी सहयोग विकसित करने के लिए तैयार है, ताकि दोनों देश एक-दूसरे की सुरक्षा को मजबूत कर सकें।” सुरक्षा सहयोग के अलावा, दोनों देशों ने रूस पर प्रतिबंधों को सख्त करने और उस पर दबाव बढ़ाने की आवश्यकता पर भी सहमति जताई।
ड्रोन टेक्नोलॉजी और उत्तर कोरिया पर नजर
योमिउरी अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, जापानी प्रतिनिधिमंडल का मुख्य उद्देश्य युद्ध के मैदान में तेजी से विकसित हो रही ‘ड्रोन तकनीक’ का बारीकी से परीक्षण करना था। इसके साथ ही, जापान रूस और उत्तर कोरिया के बीच बढ़ती सैन्य साझेदारी का आकलन भी कर रहा है।
इस यात्रा से प्राप्त खुफिया जानकारियां जापान को अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने में मदद करेंगी। जापान साल के अंत तक अपने तीन प्रमुख सुरक्षा दस्तावेजों—राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति, राष्ट्रीय रक्षा रणनीति और रक्षा निर्माण कार्यक्रम—को अपडेट करने वाला है।
‘यूक्रेन का अनुभव जापान के लिए बेहद प्रासंगिक’
जापान फोरम फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज के सीनियर फेलो ग्रांट न्यूशैम का मानना है कि ड्रोन और मानव रहित हवाई वाहनों (UAV) के मामले में यूक्रेन का अनुभव जापान के लिए “बहुत प्रासंगिक” है।
न्यूशैम ने कहा, “ओनोडेरा की यात्रा इस बात का संकेत है कि जापान यूक्रेन को कितनी गंभीरता से लेता है।” उन्होंने बताया कि टोक्यो कीव के कॉम्बैट-टेस्टेड (युद्ध में आजमाए गए) मिसाइल डिफेंस सिस्टम में विशेष रुचि ले रहा है। निगरानी और बचाव के अलावा, जापान अब ‘अटैक ड्रोन’ (हमलावर ड्रोन) पर भी अपना फोकस बढ़ा रहा है। ताइवान पर संभावित संकट और खुद जापान पर हमले के खतरे को देखते हुए यह कदम अहम माना जा रहा है।
जापानी कंपनियां कर रही हैं यूक्रेन में निवेश
जापान केवल दूर से सीख ही नहीं रहा है, बल्कि यूक्रेनी कंपनियों के साथ मिलकर हथियारों का उत्पादन भी कर रहा है। मार्च में, जापानी ड्रोन निर्माता ‘टेरा ड्रोन’ ने कॉम्बैट इंटरसेप्टर ड्रोन विकसित करने के लिए दो यूक्रेनी ड्रोन स्टार्ट-अप्स—अमेजिंग ड्रोन और विन्नीलैब—में बड़ी हिस्सेदारी खरीदी है।
सस्ते ड्रोन बनाम महंगी मिसाइलें: युद्ध का नया अर्थशास्त्र
कीयो यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर स्ट्रैटेजी के डिप्टी डायरेक्टर मिचिटो त्सुरुओका के अनुसार, आधुनिक युद्ध के अर्थशास्त्र को समझना जापान के लिए जरूरी है।
उन्होंने बताया, “नए युद्ध का सबसे महत्वपूर्ण पहलू ड्रोन हमलों को रोकने की लागत को कम करना है। सस्ते ‘कामिकेज ड्रोन’ को मार गिराने के लिए अमेरिका के ‘पैट्रियट’ जैसे महंगे एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम का इस्तेमाल करना आर्थिक रूप से टिकाऊ नहीं है।”
इस असंतुलन को पाटने के लिए यूक्रेन ने कम लागत वाले इंटरसेप्टर ड्रोन का बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू किया है, जो जापान के लिए एक आदर्श मॉडल बन सकता है। फरवरी 2022 में रूसी आक्रमण के बाद से, जापान ने यूक्रेन को 20 अरब डॉलर से अधिक की वित्तीय और मानवीय सहायता देकर एशिया में कीव का सबसे बड़ा समर्थक बनकर उभरा है।

