Trump का 200 Billion दावा, Seoul ने LNG निवेश पर क्यों खींची ब्रेक?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) द्वारा दक्षिण कोरिया के एक “विशाल” निवेश पैकेज का एकतरफा ऐलान करने के बाद दोनों सहयोगी देशों के बीच गहरा मतभेद खुलकर सामने आ गया है। सियोल ने इस मुद्दे पर तत्काल सफाई देते हुए स्पष्ट किया है कि यह डील अभी तक फाइनल नहीं हुई है। पर्यवेक्षकों का मानना है कि इस घटनाक्रम ने व्यापार समझौते की शर्तों पर अमेरिका और दक्षिण कोरिया के बीच गहरे मतभेदों को उजागर कर दिया है।
ट्रंप का 200 बिलियन डॉलर के निवेश का दावा
बुधवार को ट्रंप ने एक बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि दक्षिण कोरिया अमेरिका में ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर 200 बिलियन डॉलर (US$200 billion) का निवेश करेगा।
ट्रंप ने इन तीन बड़े प्रोजेक्ट्स का खाका पेश किया:
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टेक्सास: प्राकृतिक गैस से चलने वाले पावर प्लांट का निर्माण (22.3 बिलियन डॉलर)।
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आठ न्यूक्लियर प्लांट: पूरे अमेरिका (ओहियो, टेनेसी, दक्षिण कैरोलिना और केंटकी) में आठ बड़े परमाणु ऊर्जा संयंत्रों का निर्माण (120 बिलियन डॉलर)।
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अलास्का LNG प्रोजेक्ट: अलास्का में तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) पाइपलाइन प्रोजेक्ट (50 बिलियन डॉलर से अधिक)।
ट्रंप ने इसे “विशाल पैकेज” (Colossal Package) बताते हुए कहा, “यह अमेरिका की ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित करने और प्रशांत क्षेत्र में दक्षिण कोरिया के साथ हमारी साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।” अमेरिकी वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक ने भी इन निवेशों की पुष्टि की।
दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे मायुंग की स्पष्ट सफाई
ट्रंप की घोषणा के कुछ ही घंटों बाद, दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे मायुंग (Lee Jae Myung) ने वाशिंगटन के दावों की हवा निकाल दी। ली ने स्पष्ट किया कि केवल टेक्सास प्रोजेक्ट पर सहमति बनी है, जबकि अलास्का एलएनजी प्रोजेक्ट और आठ परमाणु संयंत्रों को लेकर अभी बातचीत चल रही है।
गुरुवार को ली ने सोशल मीडिया पर लिखा, “अमेरिका में घोषित निवेश परियोजनाओं में से, हमने अलास्का एलएनजी परियोजना पर काम शुरू करने पर तभी सहमति जताई है, जब इसकी वाणिज्यिक व्यवहार्यता (Commercial Viability) की पुष्टि हो और यह दक्षिण कोरिया की कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करे।” ली के इस बयान से साफ है कि वह अलास्का और परमाणु संयंत्रों को अंतिम डील नहीं मानते।
चुनावी फायदे के लिए ट्रंप का दांव?
सैफई हुसैन का मानना है कि ट्रंप का यह एकतरफा ऐलान नवंबर में होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों (Midterm Elections) को ध्यान में रखकर किया गया है। इसका उद्देश्य रिपब्लिकन पार्टी के आर्थिक रिकॉर्ड को मजबूत करना और अलास्का के सीनेटर डैन सुलिवन जैसे उम्मीदवारों को फायदा पहुंचाना है।
दक्षिण कोरिया की घरेलू राजनीति में भी बवाल
दक्षिण कोरिया के उद्योग मंत्री किम जंग-क्वान ने भी दोहराया कि अलास्का प्रोजेक्ट अभी समीक्षा के अधीन है। इस बीच, दक्षिण कोरिया की मुख्य विपक्षी पार्टी ‘पीपल पावर पार्टी’ (PPP) ने सरकार पर जनता को धोखा देने का आरोप लगाया है। PPP का कहना है कि सरकार ने वाशिंगटन के साथ विशिष्ट निवेश राशियों पर सहमति तो दे दी, लेकिन संसद से इसकी जानकारी छिपाई। विपक्ष ने ट्रंप की घोषणा को दक्षिण कोरिया के लिए एक ‘गंभीर कूटनीतिक आपदा’ बताया है।
क्या था मूल व्यापार समझौता?
पिछले साल ली और ट्रंप के बीच एक व्यापार समझौता हुआ था। इसके तहत, वाशिंगटन ने दक्षिण कोरियाई वस्तुओं पर टैरिफ 25% से घटाकर 15% करने पर सहमति जताई थी। इसके बदले में सियोल ने अमेरिका में 350 बिलियन डॉलर (जहाज निर्माण में 150 बिलियन और रणनीतिक उद्योगों में 200 बिलियन) के निवेश की प्रतिबद्धता जताई थी।
अब दोनों देशों के बीच निवेश के मुनाफे और जोखिमों के बंटवारे को लेकर एक 50-50 वाले ‘अम्ब्रेला इन्वेस्टमेंट व्हीकल’ (Umbrella Investment Vehicle) पर बातचीत चल रही है। लेकिन, ट्रंप की जल्दबाजी ने इस जटिल कूटनीतिक और आर्थिक समझौते में नए रोड़े अटका दिए हैं।

