दिव्या मित्तल और छानबे सीट से चुनाव लड़ने की अटकलों का सच

divya
गौरव त्रिपाठी
गौरव त्रिपाठी

उत्तर प्रदेश कैडर की पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने प्रशासनिक सेवा छोड़ चुनावी राजनीति में उतरने का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव में वह किस राजनीतिक दल से या किस सीट से मैदान में उतरेंगी, इस पर फैसला होना बाकी है। इसी बीच राजनीतिक हलकों और सोशल मीडिया पर मिर्जापुर की छानबे विधानसभा सीट से उनके निर्दलीय चुनाव लड़ने की चर्चाएं शुरू हो गईं। तथ्यात्मक रूप से यह दावा पूरी तरह गलत है, क्योंकि छानबे विधानसभा सीट अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित है, जबकि दिव्या मित्तल सामान्य श्रेणी से आती हैं।

राजनीति में आने के ऐलान के बाद ब्लॉक हुआ वॉट्सऐप

29 सितंबर की सुबह राजनीति में उतरने की घोषणा करने के बाद दिव्या मित्तल के वॉट्सऐप नंबर पर संदेशों की बाढ़ आ गई, जिससे उनका अकाउंट अस्थायी रूप से ब्लॉक हो गया।

इसकी जानकारी खुद दिव्या मित्तल ने अपनी इंस्टाग्राम पोस्ट के जरिए दी। उन्होंने लिखा, “मेरे वीडियो को आप सभी ने जो प्यार और समर्थन दिया है, उसके लिए दिल से धन्यवाद। आपके संदेशों की संख्या इतनी ज्यादा हो गई कि वॉट्सऐप अस्थायी रूप से ब्लॉक कर दिया गया है। आपकी बात मुझ तक जरूर पहुंचे, इसके लिए यह गूगल फॉर्म बनाया है, जिसका लिंक कमेंट में शेयर कर रही हूं। असुविधा के लिए क्षमा चाहती हूं। नंबर चालू होते ही सूचित करूंगी।”

30 अगस्त को दिया इस्तीफा, यूपी को बताया कर्मभूमि

उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर और देवरिया जिलों में बतौर डीएम सेवाएं दे चुकीं दिव्या मित्तल ने 30 अगस्त 2026 को आईएएस पद से इस्तीफा दे दिया था। अपने वीडियो संदेश में उन्होंने राजनीति में आने की वजह जनता की आवाज बनना बताया।

उन्होंने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश उनकी कर्मभूमि रही है और वे अपने सियासी सफर की शुरुआत भी यहीं से करेंगी। इस्तीफे और भविष्य की रूपरेखा को लेकर उन्होंने जनता से सीधे सवाल पूछने के लिए अपना नंबर सार्वजनिक किया था, जिसके बाद एक साथ हजारों संदेश आने से तकनीकी समस्या खड़ी हो गई।

आईआईटी, आईआईएम और दो बार यूपीएससी क्रैक करने का सफर

23 नवंबर 1983 को जन्मीं दिव्या मित्तल मूल रूप से दिल्ली की रहने वाली हैं। उन्होंने आईआईटी दिल्ली से बीटेक और आईआईएम बेंगलुरु से मैनेजमेंट की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने लंदन में कॉरपोरेट सेक्टर में नौकरी की और फिर भारत लौटकर सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू की।

  • यूपीएससी 2011: ऑल इंडिया 134वीं रैंक हासिल कर आईपीएस बनीं।

  • यूपीएससी 2012: 68वीं रैंक के साथ आईएएस के लिए चयनित हुईं और उन्हें उत्तर प्रदेश कैडर मिला।

उनके पति गगनदीप सिंह ढिल्लों 2011 बैच के इंडियन ट्रेड सर्विस (ITS) अधिकारी रहे हैं, जिन्होंने साल 2022 में अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। दोनों ने साथ में पढ़ाई और लंदन में नौकरी की थी। इस दंपती की दो बेटियां हैं।