बिस्किट-नमकीन खरीदते वक्त नहीं छिपेगा नमक-चीनी! SC में अहम सुनवाई

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शालिनी तिवारी
शालिनी तिवारी

सुप्रीम कोर्ट ने पैकेटबंद फूड्स (Packaged Foods) पर ज्यादा नमक, चीनी और वसा (Fat) की जानकारी पैकेट के मुख्य हिस्से (Front of Pack) पर लिखने की मांग वाली जनहित याचिका (PIL) पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। इस मामले की सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) द्वारा उठाए गए कदमों की सराहना की, लेकिन धीमी प्रक्रिया और नई टाइमलाइन को लेकर कड़े सवाल भी पूछे।

‘उद्देश्य हासिल करने के लिए अभी बहुत कुछ करना बाकी’

जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की। पीठ ने FSSAI की पहलों की तारीफ करते हुए कहा, “हमने अब तक आपके द्वारा किए गए कार्यों की सराहना की है। लेकिन हम जिस उद्देश्य को हासिल करना चाहते हैं, उसे सार्थक रूप देने के लिए अभी काफी कुछ किया जाना बाकी है।”

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह जो भी अंतिम आदेश पारित करेगा, वह FSSAI पर पूरी तरह से बाध्यकारी होगा और प्राधिकरण से इसे पूरी गंभीरता के साथ लागू करने की अपेक्षा की जाएगी।

FSSAI की टाइमलाइन पर SC ने उठाए सवाल

सुनवाई के दौरान जस्टिस पारदीवाला ने FSSAI के नए प्रस्ताव को लागू करने में लगने वाले समय पर सवाल खड़े किए। उन्होंने पूछा कि नए नियमों के लिए एक साल तक ‘स्वैच्छिक अनुपालना’ (Voluntary Compliance) की जरूरत क्यों है?

पीठ ने यह भी सवाल किया कि प्राधिकरण फिर से सुनवाई और आपत्तियां आमंत्रित करने की प्रक्रिया क्यों शुरू करना चाहता है, जबकि यह प्रक्रिया 2022 में ही शुरू हो चुकी थी। जस्टिस पारदीवाला ने पूछा, “जब हमने 2022 में शुरुआत की थी, तो पिछले चार वर्षों में आपने क्या किया?”

इसके जवाब में FSSAI की ओर से बताया गया कि 2022 में शुरू की गई प्रक्रिया ‘स्टार रेटिंग सिस्टम’ से संबंधित थी और उस समय इस्तेमाल किए गए मापदंड मौजूदा प्रस्ताव से पूरी तरह अलग थे।

‘स्वास्थ्य का मुद्दा है, हमें निराश मत कीजिए’

सार्वजनिक स्वास्थ्य के इस अहम मुद्दे पर देरी को लेकर अदालत ने चिंता जताई। जस्टिस पारदीवाला ने कहा कि जब अदालत स्वास्थ्य से जुड़े विषय को लेकर इतनी चिंतित है, तो इसे लागू करने में इतना समय क्यों लगाया जा रहा है?

पीठ ने संकेत दिया कि अंतिम फैसला सुनाने के कुछ समय बाद इस मामले को ‘अनुपालना रिपोर्ट’ (Compliance Report) के लिए दोबारा सूचीबद्ध किया जाएगा। सुनवाई के अंत में जस्टिस पारदीवाला ने स्पष्ट शब्दों में FSSAI को चेतावनी देते हुए कहा कि अदालत की अपेक्षाओं पर खरा उतरना होगा। उन्होंने हल्के लेकिन सख्त अंदाज में कहा, “मेरा आशय वास्तव में यह था कि ‘हमें नाराज मत कीजिए’, लेकिन इसे बेहतर शब्दों में कहूं तो- हमें निराश मत कीजिए।”