37 वोट का खेल! 10वीं राज्यसभा सीट पर क्यों बढ़ी BJP-SP की टक्कर?

उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों पर होने वाले आगामी चुनाव को लेकर सियासी बिसात बिछने लगी है। विधानसभा में संख्याबल के आधार पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) अपने दम पर 7 सीटें और अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी (सपा) 2 सीटें आसानी से जीतने की स्थिति में हैं। सपा की ओर से इन दो सीटों पर प्रोफेसर रामगोपाल यादव और पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन को उतारे जाने की चर्चा है।
असली घमासान 10वीं सीट को लेकर है। यदि अखिलेश यादव ने दो सीटों पर संतोष करने के बजाय तीसरा प्रत्याशी भी मैदान में उतार दिया, तो यूपी में हॉर्स ट्रेडिंग, क्रॉस वोटिंग और वरीयता मतों (Preference Votes) की दिलचस्प लड़ाई देखने को मिल सकती है।
क्या है राज्यसभा जीत का चुनावी गणित?
उत्तर प्रदेश विधानसभा में कुल 403 सीटें हैं, लेकिन छह विधायकों के निधन के कारण वर्तमान में प्रभावी सदस्यों की संख्या 397 है। यानी, एक प्रत्याशी को राज्यसभा पहुंचने के लिए कम से कम 37 प्रथम वरीयता वोटों की आवश्यकता होगी।
सपा का समीकरण: 10 वोट कम, क्या होगा तीसरा दांव?
2022 के विधानसभा चुनाव में सपा के 111 विधायक जीते थे, लेकिन कुछ के पाला बदलने और निधन के बाद अब सपा के पास 101 विधायक हैं।
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दो प्रत्याशियों को जिताने के लिए सपा को $37 \times 2 = 74$ वोट चाहिए।
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दो सीटें निकालने के बाद सपा के पास 27 वोट बचेंगे।
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तीसरे प्रत्याशी को जिताने के लिए सपा को 37 वोटों की जरूरत होगी, यानी उसके पास सीधे तौर पर 10 वोट कम पड़ रहे हैं।
सपा का तीसरा उम्मीदवार तभी जीत सकता है जब वह अन्य दलों या निर्दलीयों के साथ-साथ द्वितीय वरीयता के वोटों में सेंधमारी करने में कामयाब हो। अगर सपा तीसरा दांव खेलती है और जीतती है तो यह भाजपा के लिए बड़ा झटका होगा, लेकिन हारने की स्थिति में विपक्ष को मनोवैज्ञानिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। वहीं, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के पास कोई विधायक न होने के कारण इस बार राज्यसभा में उसका प्रतिनिधित्व शून्य पर रहेगा।
BJP और NDA का गणित: 8वें सदस्य के लिए 2 वोटों की दरकार
भाजपा के पास वर्तमान में अपने 256 विधायक हैं। यदि सहयोगी दलों के आंकड़े जोड़ें:
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अपना दल (सोनेलाल): 13
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राष्ट्रीय लोकदल (RLD): 9
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सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP): 6
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निषाद पार्टी: 5
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जनसत्ता दल लोकतांत्रिक (राजा भैया): 2
सहयोगियों के साथ एनडीए का आंकड़ा 291 तक पहुंचता है। इसके अलावा 3 निर्दलीय विधायकों का समर्थन मिलने पर यह संख्याबल 294 हो जाता है।
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भाजपा को 7 सीटें जिताने के लिए 37 \times 7 = 259 वोट चाहिए, जो उसके पास आसानी से उपलब्ध हैं।
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यदि भाजपा 8वां उम्मीदवार उतारती है, तो 8 सीटों के लिए कुल 296 वोटों (37 \times 8) की दरकार होगी।
- 294 के संभावित आंकड़े के हिसाब से भाजपा के पास आठवें प्रत्याशी के लिए महज 2 वोट कम पड़ रहे हैं।
वरीयता वोट और शक्ति प्रदर्शन की जंग
यदि भाजपा और सपा दोनों ने अतिरिक्त प्रत्याशी उतारे, तो यह चुनाव केवल औपचारिक नहीं रह जाएगा। भाजपा दूसरी वरीयता या क्रॉस वोटिंग के जरिए सपा के विधायकों में सेंधमारी की कोशिश कर सकती है, वहीं अखिलेश यादव भी सत्ता पक्ष के असंतुष्टों को साधने की रणनीति पर काम कर सकते हैं।
आगामी यूपी विधानसभा चुनाव से पहले यह मुकाबला दोनों गठबंधनों के लिए एक बड़ा शक्ति परीक्षण साबित होने जा रहा है, जहां एक-एक वोट की कीमत तय करेगी कि 10वीं सीट किसके खाते में जाएगी।

