उत्तराखंड में कहां फंसे हैं 179 ट्रैकर्स और कैसे चल रहा है रेस्क्यू ऑपरेशन

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उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में पिछले दो दिनों से हो रही भारी बर्फबारी के कारण अलग-अलग माउंटेनियरिंग और ट्रैकिंग रूट्स पर 179 ट्रैकर्स और पर्वतारोही फंस गए हैं। इनमें कई विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। उत्तरकाशी में 136 और बागेश्वर के पिंडारी ग्लेशियर में 43 ट्रैकर्स फंसे हुए हैं। सोमवार को मौसम साफ होने के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन युद्ध स्तर पर शुरू कर दिया गया है। अब तक 31 ट्रैकर्स को सुरक्षित निकालकर हर्षिल आर्मी बेस कैंप पहुंचाया गया है।

हर्षिल बना रेस्क्यू का मुख्य समन्वय केंद्र

शनिवार और रविवार को हुई जबरदस्त बर्फबारी के बाद यह सभी पर्वतारोही अलग-अलग बेस कैंप्स में फंस गए थे। सोमवार सुबह मौसम अनुकूल होते ही सेना के हेलीकॉप्टर्स के जरिए रेस्क्यू अभियान शुरू किया गया।

रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए उत्तरकाशी के हर्षिल क्षेत्र को प्रमुख समन्वय केंद्र (Coordination Center) बनाया गया है। यहां से लगातार हेली रैकी कर फंसे हुए ट्रैकर्स की लोकेशन और मौसम का जायजा लिया जा रहा है। इस महा-अभियान में सेना, राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF), पुलिस, वन विभाग और नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (NIM) की टीमें संयुक्त रूप से काम कर रही हैं।

सभी ट्रैकर्स सुरक्षित, पहुंचाई जा रही रसद

उत्तरकाशी के जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने बताया कि फंसे हुए सभी ट्रैकर्स फिलहाल सुरक्षित हैं। प्रशासन की प्राथमिकता सभी को जल्द से जल्द नीचे लाने की है। इसके साथ ही फंसे हुए लोगों तक भोजन, पानी और जरूरी दवाइयां पहुंचाने की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जा रही है।

कहां कितने ट्रैकर्स हैं फंसे?

प्रशासन द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, उत्तरकाशी के विभिन्न दुर्गम ट्रैकिंग रूट्स पर फंसे हुए लोगों का विवरण इस प्रकार है:

  • ऑडेंस कोल पास बेस कैंप: कुल 29 ट्रैकर्स (5 भारतीय और 23 सपोर्टिंग स्टाफ)

  • माउंट भागीरथी II ट्रैक रूट: कुल 20 ट्रैकर्स

  • कालिंदी बेस कैंप: कुल 18 ट्रैकर्स (बेंगलुरु के 5 सदस्य और 13 सपोर्टिंग स्टाफ)

  • माउंट सतोपंथ: कुल 8 ट्रैकर्स (5 सदस्य और 3 सपोर्ट स्टाफ)

  • माउंट सुदर्शन: कुल 7 ट्रैकर्स (4 विदेशी नागरिक और 3 सपोर्टिंग स्टाफ)

  • तपोवन बेस कैंप (माउंट शिवलिंग): कुल 5 ट्रैकर्स (2 विदेशी और 3 सपोर्टिंग स्टाफ)

प्रशासन की टीमें सैटेलाइट फोन और अन्य संचार माध्यमों से ट्रैकर्स और उनके गाइडों के साथ लगातार संपर्क बनाए हुए हैं। हिमालय में पल-पल बदलते मौसम पर भी कड़ी नजर रखी जा रही है, ताकि रेस्क्यू ऑपरेशन को बिना किसी बाधा के सुरक्षित तरीके से पूरा किया जा सके।