रुद्रप्रयाग की 2 सीटों का सियासी गणित, 2022 में BJP ने किया था क्लीन स्वीप

अलकनंदा और मंदाकिनी के संगम पर बसा रुद्रप्रयाग केवल केदारनाथ धाम की आस्था और पंच केदार की आध्यात्मिक धरोहर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह गढ़वाल मंडल की राजनीति का संवेदनशील और अहम शक्ति केंद्र भी है। चारधाम यात्रा का मुख्य पड़ाव और केदारघाटी के आंदोलनों की पृष्ठभूमि होने के कारण इस पर्वतीय जिले का जनादेश प्रदेश की राजनीति को गहराई से प्रभावित करता है।
आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर जिले की दोनों सीटों—केदारनाथ और रुद्रप्रयाग—पर राजनीतिक दलों ने अपनी गोटियां बिछानी शुरू कर दी हैं। 2022 के आम चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इन दोनों सीटों पर जीत दर्ज कर जिले में क्लीन स्वीप किया था।
जनसांख्यिकी और धार्मिक ताना-बाना
2011 की जनगणना के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, रुद्रप्रयाग जिले की कुल आबादी 2,42,285 दर्ज है:
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जनसंख्या और लिंगानुपात: कुल जनसंख्या में 1,14,590 पुरुष और 1,27,695 महिलाएं शामिल हैं। पुरुषों की तुलना में महिलाओं की अधिक संख्या पर्वतीय क्षेत्रों में महिला मतदाताओं की निर्णायक भूमिका को रेखांकित करती है।
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साक्षरता दर: जिले की औसत साक्षरता दर 81.30 प्रतिशत है। इसमें पुरुष साक्षरता दर 93.90 प्रतिशत और महिला साक्षरता दर 70.35 प्रतिशत दर्ज की गई है।
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धार्मिक समीकरण: जिले में हिंदू आबादी 99.13 प्रतिशत है, जबकि मुस्लिम समुदाय की हिस्सेदारी 0.61 प्रतिशत है। इसके अलावा ईसाई 0.07 प्रतिशत, सिख 0.02 प्रतिशत और अन्य या अज्ञात वर्ग 0.17 प्रतिशत हैं।
केदारघाटी के प्रमुख चुनावी मुद्दे
पर्वतीय परिवेश और आपदा की संवेदनशीलता के चलते यहां के चुनावी मुद्दे मैदानी क्षेत्रों से पूरी तरह भिन्न हैं:
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चारधाम यात्रा और स्थानीय आजीविका: केदारनाथ यात्रा से जुड़े तीर्थ पुरोहितों, घोड़ा-खच्चर संचालकों, होटल और स्थानीय व्यापारियों के हितों की सुरक्षा।
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आपदा प्रबंधन और भू-धंसाव: संवेदनशील पहाड़ी इलाकों में भू-धंसाव की रोकथाम, ऑल वेदर रोड से जुड़े बुनियादी सवाल और प्रभावी आपदा प्रबंधन तंत्र।
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स्वास्थ्य और शिक्षा की स्थिति: दूरदराज के गांवों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी और उच्च शिक्षा के सीमित अवसर।
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पलायन, भू-कानून और रोजगार: पहाड़ों से लगातार होते पलायन को थामना, सख्त भू-कानून की मांग और युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार के साधन।
दोनों विधानसभा सीटों का 2022 का चुनावी गणित
1. केदारनाथ विधानसभा सीट (07) यह सामान्य श्रेणी की अनारक्षित सीट है, जिसके अंतर्गत केदारनाथ धाम और ऊखीमठ तहसील का विस्तृत पर्वतीय भूभाग शामिल है। भौगोलिक रूप से संवेदनशील यह क्षेत्र गढ़वाल संसदीय सीट का हिस्सा है।
2022 के विधानसभा चुनाव में यहां त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिला था। भाजपा प्रत्याशी शैलारानी रावत ने 21,886 वोट हासिल कर जीत दर्ज की थी। इस सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार कुलदीप सिंह रावत 13,423 वोट पाकर दूसरे स्थान पर रहे थे, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी मनोज रावत को 12,557 वोटों के साथ तीसरे स्थान से संतोष करना पड़ा था।
2. रुद्रप्रयाग विधानसभा सीट (08) वर्ष 2000 में राज्य गठन और परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई यह सामान्य सीट रुद्रप्रयाग जिला मुख्यालय के साथ-साथ जखोली और अगस्त्यमुनि विकासखंड के बड़े इलाके को समेटे हुए है। यह सीट भी गढ़वाल लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है।
2022 के चुनाव में भाजपा के भरत सिंह चौधरी ने 29,660 वोट पाकर बड़ी जीत दर्ज की थी। उन्होंने कांग्रेस के प्रदीप प्रसाद थपलियाल (19,858 वोट) को 9,802 मतों के अंतर से पराजित किया था। निर्दलीय उम्मीदवार मातवर सिंह कंडारी 4,838 वोट जुटाकर तीसरे स्थान पर रहे थे।
2027 के चुनाव में भाजपा के सामने अपने इस गढ़ को बचाए रखने की चुनौती होगी, वहीं कांग्रेस और निर्दलीय खेमे की नजर केदारघाटी के स्थानीय असंतोष और बुनियादी मुद्दों को भुनाकर वापसी करने पर टिकी रहेगी।

