MBBS Admission: फर्जी स्वतंत्रता सेनानी प्रमाण पत्र से दाखिला, एक गिरफ्तार

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में मेडिकल (MBBS) में दाखिले के लिए फर्जी तरीके से ‘स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र’ (Freedom Fighter Dependant Certificate) बनवाने के एक बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ है। देहरादून पुलिस द्वारा गठित स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने इस मामले में कड़ी कार्रवाई करते हुए गिरोह के तीसरे और अहम सदस्य को भोपाल से गिरफ्तार कर लिया है। उसके पास से 5.58 लाख रुपये का कैश भी बरामद हुआ है।
क्या है पूरा मामला?
13 सितंबर 2026 को देहरादून के रायपुर और क्लेमेंटाउन थाने में कूटरचित (फर्जी) दस्तावेजों के आधार पर ‘अपनी सरकार’ पोर्टल पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र बनाने के लिए ऑनलाइन आवेदन करने की शिकायत दर्ज की गई थी। जांच में पाया गया कि कई अभ्यर्थियों ने फर्जी दस्तावेजों के सहारे यह आवेदन किया था, ताकि वे फ्रीडम फाइटर कोटे से मेडिकल कॉलेजों में दाखिला ले सकें।
मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) देहरादून ने एसपी ग्रामीण-1 श्रीमती जया बलोनी के नेतृत्व में एक SIT का गठन किया।
SIT जांच और गिरफ्तारियां
एसआईटी ने अपनी जांच में पाया कि अभ्यर्थियों द्वारा दिए गए पते फर्जी थे। इसके बाद पुलिस ने संबंधित शिक्षण संस्थानों से संपर्क कर मूल दस्तावेजों को कब्जे में लिया।
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पहली गिरफ्तारी: पुलिस ने 21 सितंबर 2026 को इस गिरोह के दो अहम सदस्यों— रूपेश पंडित और अरविंद कुमार को गिरफ्तार किया था। रूपेश की निशानदेही पर उसके मेरठ स्थित घर से 8 लाख रुपये की नकदी बरामद की गई थी, जो फर्जी प्रमाण पत्र बनाने के एवज में लिए गए थे।
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तीसरी बड़ी गिरफ्तारी: एसआईटी ने मामले की परतें खोलते हुए तीसरे आरोपी धीरज कुमार श्रीवास्तव (उम्र 37 वर्ष, निवासी- खजूरी कलान रोड, थाना पिपलानी, भोपाल, मध्य प्रदेश) को गिरफ्तार कर लिया। उसके वाहन (टाटा नेक्सॉन) की तलाशी में 5,58,100/- रुपये नकद बरामद हुए।
भोपाल से चल रहा था एडमिशन का गोरखधंधा
पूछताछ में धीरज श्रीवास्तव ने खुलासा किया कि वह भोपाल के इंद्रपुरी इलाके में ‘MBBS WAY’ के नाम से एक ऑफिस चलाता है, जहां वह कमीशन बेसिस पर छात्रों का प्राइवेट यूनिवर्सिटियों में MBBS, B.Tech, BCA आदि में एडमिशन करवाता था।
कैसे रची गई फर्जीवाड़े की साजिश: आरोपी अरविंद ने अपनी पुत्री और दो परिचितों के बच्चों के MBBS में दाखिले के लिए रूपेश पंडित से संपर्क किया था। रूपेश ने यह बात धीरज को बताई। धीरज ने अपने एक अन्य साथी के जरिए ‘लो मेरिट’ (कम नंबर) वाले छात्रों का एडमिशन उत्तराखंड में ‘फ्रीडम फाइटर कोटे’ से करवाने की योजना बनाई। उन्होंने तहसील और कचहरी में अपनी सेटिंग का इस्तेमाल कर फर्जी दस्तावेज तैयार करवाए। इन्ही फर्जी दस्तावेजों के आधार पर तीनों अभ्यर्थियों ने अलग-अलग मेडिकल कॉलेजों में MBBS में दाखिला ले लिया था।
बरामद किए गए 5.58 लाख रुपये के बारे में धीरज ने बताया कि यह रकम उसे रूपेश पंडित द्वारा MBBS में एडमिशन दिलवाने के एवज में कमीशन के तौर पर दी गई थी।
SIT इस पूरे प्रकरण की अभी भी गहनता से जांच कर रही है और गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश जारी है। देहरादून पुलिस ने स्पष्ट किया है कि इस फर्जीवाड़े में शामिल सभी दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

