भारत पर टैरिफ को लेकर जेमी डिमन की अलग राय, जानें क्या कहा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा हाल ही में हस्ताक्षरित ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ (Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026) को लेकर वैश्विक वित्तीय गलियारों में विरोध के स्वर उठने लगे हैं। यह नया कानून अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले शीर्ष 5 देशों पर 100 प्रतिशत तक भारी दंडात्मक टैरिफ लगाने का अधिकार देता है। रूस से कच्चे तेल के सबसे बड़े खरीदारों में भारत और चीन शामिल होने के कारण इस कानून का सीधा असर दोनों देशों पर पड़ने की आशंका है।
इस कदम पर दुनिया के सबसे बड़े निवेश बैंक जेपी मॉर्गन (JPMorgan) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) जेमी डिमन ने सख्त असहमति जताई है। डिमन ने स्पष्ट किया है कि वे तेल पर किसी भी प्रकार के अमेरिकी टैरिफ लगाने के पक्ष में नहीं हैं और अमेरिका को अपने रणनीतिक सहयोगी भारत को नुकसान पहुंचाने से बचना चाहिए।
‘अगर भारत ने तेल खरीदना बंद किया तो मचेगा हाहाकार’
सीएनबीसी-टीवी18 (CNBC-TV18) से बातचीत में जेमी डिमन ने अमेरिकी प्रशासन को वैश्विक तेल बाजार के जमीनी समीकरण समझने की सलाह दी। उन्होंने रेखांकित किया कि अमेरिका और सऊदी अरब के बाद रूस दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश है।
डिमन ने तर्क दिया:
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वैश्विक आपूर्ति में भारी कमी: यदि अमेरिका के दबाव में आकर भारत जैसा बड़ा आयातक रूस से तेल खरीदना बंद कर देता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की जबर्दस्त कमी हो जाएगी।
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सीमित कोटा और कीमतों में उछाल: भारत अपनी जरूरत का लगभग 30% से 40% कच्चा तेल रूस से खरीदता है। यदि भारत अचानक अन्य वैश्विक आपूर्तिकर्ताओं की ओर मुड़ता है—जिनके उत्पादन कोटे पहले से बंधे हुए हैं—तो आपूर्ति को लेकर दुनिया भर में अफरा-तफरी मच जाएगी। इस संकट की सीधी आंच अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगी।
‘भारत नेचुरल पार्टनर, रिफाइनरियों का ढांचा अलग’
जेपी मॉर्गन के प्रमुख ने भारतीय तेल उद्योग की तकनीकी संरचना का हवाला देते हुए कहा कि भारतीय रिफाइनरियों का तकनीकी ढांचा एक विशिष्ट ग्रेड के कच्चे तेल के अनुकूल डिजाइन किया गया है, जो उन्हें रूस से आसानी से मिल रहा है। यदि भारत को वहां से आपूर्ति रोकनी पड़ी, तो वैकल्पिक स्रोतों से आने वाला कच्चा तेल इन रिफाइनरियों के लिए अनुकूल नहीं भी हो सकता है।
डिमन ने कहा, “मुझे उम्मीद है कि अमेरिका बैठकर इन सभी व्यावहारिक मुद्दों को समझेगा। रूस का मुकाबला करने के लिए कदम उठाते हुए भारत और वैश्विक तेल बाजार को सजा नहीं दी जानी चाहिए। मुझे नहीं लगता कि हमें तेल पर किसी भी प्रकार का टैरिफ लगाना चाहिए।”
‘यूक्रेन की मदद के दूसरे रास्ते खोजे अमेरिका’
डिमन ने कहा कि रूसी तेल को निशाना बनाना यूक्रेन की सहायता करने की एक रणनीति हो सकती है, लेकिन अमेरिका को इस फैसले के व्यापक परिणामों पर भी ध्यान देना होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि रूस की घेराबंदी करने की प्रक्रिया में अमेरिका को अपने सबसे भरोसेमंद मित्र भारत को आर्थिक नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए, क्योंकि भारत अमेरिका का एक स्वाभाविक साझेदार (Natural Partner) है।
