शी जिनपिंग के वाशिंगटन दौरे से पहले Rare Earths पर फिर तकरार

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के राजकीय दौरे पर वाशिंगटन पहुंचने से महज कुछ घंटे पहले अमेरिका और चीन के बीच 2025 के ‘बुसान व्यापार समझौते’ (Busan Trade Agreement) को आगे बढ़ाने को लेकर गतिरोध सामने आया है। दोनों देशों ने भले ही सीमित दायरे वाले टैरिफ-कटौती व्यापार तंत्र को लागू करने की दिशा में प्रगति की बात कही हो, लेकिन बुसान समझौते की मियाद बढ़ाने को लेकर खींचतान जारी है।
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) जेमिसन ग्रीर ने सोमवार को चीन पर इस समझौते के विस्तार को लेकर ‘अनिश्चितता’ पैदा करने का आरोप लगाया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि बीजिंग अभी भी अमेरिका को रणनीतिक और दुर्लभ खनिजों (Rare Earths) की पर्याप्त आपूर्ति से पीछे हट रहा है।
‘रेयर अर्थ के निर्यात को नियंत्रित कर रहा है चीन’
ब्लूमबर्ग न्यूज को दिए एक साक्षात्कार में जेमिसन ग्रीर ने कहा, “उन्होंने रेयर अर्थ के निर्यात को सीमित और नियंत्रित कर रखा है। राष्ट्रपति शी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच अच्छे संबंध हैं, लेकिन हमें यह सुनिश्चित करने के लिए इन समझौतों को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाना होगा कि नियमों का पूरा पालन हो।”
अगस्त में अमेरिका को चीन से होने वाले रेयर अर्थ मैग्नेट के शिपमेंट में सालाना आधार पर 13 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह घटकर 512 टन रह गया। यह स्थिति तब है जब व्यापार वार्ताओं के बाद बीजिंग ने कुछ निर्यात मंजूरियों को फिर से शुरू किया था।
न्यूयॉर्क में 8 घंटे की वार्ता, बुसान समझौते पर फैसला टलने के संकेत
न्यूयॉर्क स्थित जेपी मॉर्गन के मुख्यालय में अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट, जेमिसन ग्रीर और चीनी उप-प्रधानमंत्री हे लिफेंग के बीच करीब आठ घंटे की लंबी वार्ता हुई। इसके बाद ग्रीर ने कहा कि रेयर अर्थ से जुड़ी चिंताओं के कारण उन्हें इस सप्ताह बुसान समझौते के विस्तार की आधिकारिक घोषणा होने की उम्मीद नहीं है।
हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि दोनों पक्ष इसका विस्तार चाहते हैं। यह समझौता 10 नवंबर को समाप्त हो रहा है और दोनों पक्षों के पास अभी बातचीत के लिए समय है। वहीं, मामले से जुड़े एक सूत्र ने इसे दोनों देशों की ओर से ज्यादा से ज्यादा लाभ हासिल करने के लिए की जा रही ‘शैडो बॉक्सिंग’ करार दिया है।
बुसान समझौता क्या है और क्यों महत्वपूर्ण है?
अक्टूबर 2025 में दक्षिण कोरिया के बुसान में शी जिनपिंग और डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुए इस समझौते ने बड़े व्यापार युद्ध को टालने में अहम भूमिका निभाई थी।
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पृष्ठभूमि: ट्रंप द्वारा लगाए गए भारी टैरिफ के जवाब में बीजिंग ने सात महत्वपूर्ण रेयर अर्थ खनिजों के निर्यात पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए थे, जिससे अमेरिकी विनिर्माण और रक्षा क्षेत्र में सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई थी।
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समझौते की शर्तें: इस पैकेज डील के तहत अमेरिका ने कुछ चीनी उत्पादों पर टैरिफ घटाए थे और चीनी कंपनियों पर अतिरिक्त प्रतिबंध रोके थे। इसके बदले में चीन ने एक साल के लिए रेयर अर्थ निर्यात प्रतिबंधों को रोका था और अमेरिकी सोयाबीन व फेंटानिल केमिकल की खरीद का वादा किया था।
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समयसीमा को लेकर मतभेद: चीन इस समझौते को ट्रंप के मौजूदा कार्यकाल के अंत तक बढ़ाना चाहता है, जबकि ट्रंप प्रशासन इसे केवल 3 से 6 महीने की छोटी अवधि के लिए ही विस्तार देने के पक्ष में है।
30 अरब डॉलर की सीमा वाले नए ट्रेड मैकेनिज्म पर काम
सप्ताहांत में दोनों पक्षों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर बातचीत शुरू करने और ‘यूएस-चीन बोर्ड ऑफ ट्रेड’ की शुरुआत की घोषणा की। इस तंत्र के तहत दोनों देश गैर-संवेदनशील (non-sensitive) क्षेत्रों और उत्पादों की पहचान कर रहे हैं, जिन्हें दोनों तरफ से अधिकतम 30 अरब डॉलर तक के रियायती शुल्क पर व्यापार के लिए मंजूरी दी जाएगी।
ग्रीर के अनुसार, इस सूची में चीन की ओर से उपभोक्ता उत्पाद और कम-तकनीकी (low-tech) सामान शामिल हो सकते हैं, जबकि अमेरिकी पक्ष से ऊर्जा उत्पाद, कृषि उत्पाद और मेडिकल उपकरण शामिल होने की संभावना है।
विश्लेषकों का मानना है कि इस हफ्ते वाशिंगटन में ट्रंप और शी जिनपिंग की मुलाकात के दौरान किसी बहुत बड़े नए समझौते की उम्मीद कम है, बल्कि दोनों नेताओं का ध्यान मौजूदा व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने और विवादों को नियंत्रित दायरे में रखने पर ही केंद्रित रहेगा।
