Putin Decision: रूस में 230 जापानी कंपनियों पर बढ़ा दबाव, रिश्तों में भी तल्खी

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Saima Siddiqui
Saima Siddiqui

रूस द्वारा तीन प्रमुख पश्चिमी कंपनियों की संपत्तियों को अपने नियंत्रण में लेने के बाद मॉस्को में काम कर रही 200 से अधिक जापानी कंपनियों के सामने अनिश्चितता का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। हाल ही में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के एक आदेश के तहत स्विस फूड दिग्गज नेस्ले (Nestlé), फ्रांसीसी रिटेलर औचन (Auchan) और होम इम्प्रूवमेंट चेन लेमाना प्रो (Lemana Pro) की संपत्तियों को रूसी इकाई ‘एलईवी मैनेजमेंट’ (LEV Management) को सौंप दिया गया।

क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने इसे “बाहरी प्रबंधन” (External Management) करार देते हुए स्पष्ट किया कि ये ऐसे “अमित्र देश” (Unfriendly Nations) हैं, जो प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से रूस के खिलाफ सैन्य कार्रवाइयों या नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमलों में शामिल रहे हैं।

230 जापानी कंपनियों की मौजूदगी और असमंजस

जापान एक्सटर्नल ट्रेड ऑर्गनाइजेशन (JETRO) के आंकड़ों के मुताबिक, लगभग 230 जापानी कंपनियां अब भी रूस में मौजूद हैं। हालांकि इनमें से कई ने नए निवेश रोक दिए हैं या अपने परिचालन को सीमित कर दिया है, लेकिन जून में किए गए एक सर्वेक्षण में तीन-चौथाई से अधिक कंपनियों ने अगले दो वर्षों तक रूस में बने रहने की उम्मीद जताई थी।

ब्रिटेन (करीब 50%), कनाडा (33%) और अमेरिका (27%) की तुलना में बेहद कम जापानी कंपनियों ने युद्ध शुरू होने के बाद रूस से पूरी तरह किनारा किया था। अधिकांश जापानी कंपनियों को उम्मीद थी कि संघर्ष जल्द समाप्त हो जाएगा। टोक्यो की कोकुशिकन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर याकोव जिनबर्ग के अनुसार, जापानी कंपनियां मौजूदा घटनाक्रम पर बहुत करीब से नजर रख रही हैं और उनमें डर का माहौल है।

तोक्यो-मॉस्को के बीच बढ़ती राजनयिक तल्खी

हाल के महीनों में रूस और जापान के राजनयिक रिश्तों में भारी गिरावट आई है:

  • यूक्रेन दौरा और तीखे बयान: जापान के निचले सदन (House of Representatives) के स्पीकर इसुके मोरी ने हाल ही में कीव का दौरा किया, जहां उन्होंने यूक्रेनी संसद को संबोधित करते हुए रूसी हमले को “बर्बर कृत्य” करार दिया। राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की ने जापानी प्रधानमंत्री साने ताकाइची को कीव आने का न्योता भी दिया है।

  • विवादित द्वीपों का दौरा: इससे पहले राष्ट्रपति पुतिन ने होक्काइडो के उत्तर में स्थित विवादित कुरील द्वीपों का दौरा किया था, जिसका जापान ने कड़ा विरोध किया था। इसके जवाब में रूस ने एक सोवियत सैनिक की प्रतिमा का अनावरण किया, जिसमें उसे जापानी सम्राट के प्रतीक वाले बॉर्डर मार्कर को कुचलते हुए दिखाया गया है।

  • यूएन महासभा में मुलाकात की संभावना: न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के दौरान जेलेंस्की और पीएम ताकाइची के बीच संभावित बैठक पर मॉस्को की पैनी नजर है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह बैठक होती है, तो रूस जापानी कंपनियों को निशाना बना सकता है।

ऊर्जा सुरक्षा और एलएनजी (LNG) प्रोजेक्ट्स का दांव

जापान के लिए सबसे बड़ा संकट ऊर्जा सुरक्षा का है। जापान के पास रूस के उत्तरी साइबेरिया स्थित ‘आर्कटिक एलएनजी 2’ (Arctic LNG 2) प्रोजेक्ट में 10 प्रतिशत और ‘सखालिन-1’ (Sakhalin 1) में 30 प्रतिशत की अहम हिस्सेदारी है।

टेंपल यूनिवर्सिटी के टोक्यो कैंपस में अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ जेम्स ब्राउन के अनुसार, ऊर्जा सुरक्षा की इसी चिंता के कारण जापान अब तक रूस के प्रति बेहद सधी हुई नीति अपना रहा था। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि जापानी कंपनियों को पूरी तरह बंद करना रूस के लिए भी नुकसानदेह होगा, क्योंकि ये कंपनियां भारी मात्रा में टैक्स देती हैं और लोकप्रिय ब्रांड्स के अचानक हटने से रूसी उपभोक्ताओं में नाराजगी बढ़ सकती है।

फिलहाल दोनों पक्ष बयानबाजी के बावजूद एक-दूसरे के अगले कदमों को लेकर फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं।