UP Election: मथुरा की 5 सीटों पर क्या है सियासी-सामाजिक समीकरण?

ब्रजभूमि के केंद्र में बसा मथुरा जिला पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति का एक मजबूत शक्ति केंद्र माना जाता है। धार्मिक-आध्यात्मिक पहचान, विशाल पर्यटन उद्योग, मथुरा रिफाइनरी और ग्रामीण किसान बेल्ट के चलते यह जिला सियासी रूप से खासा प्रभाव रखता है। 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर जिले की सभी पांच विधानसभा सीटों— छाता, मांट, गोवर्धन, मथुरा सदर और बलदेव (सुरक्षित) पर राजनीतिक बिसात बिछनी शुरू हो चुकी है।
वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अभूतपूर्व प्रदर्शन करते हुए जिले की सभी पांचों सीटों पर एकतरफा जीत दर्ज की थी और विपक्ष का पूरी तरह सूपड़ा साफ कर दिया था।
जनसांख्यिकी: साक्षरता दर और धार्मिक संरचना
2011 की जनगणना के आंकड़ों के मुताबिक मथुरा जिले की कुल आबादी 25,47,184 दर्ज की गई थी। जिले में औसत साक्षरता दर 70.36 प्रतिशत रही, जिसमें पुरुषों और महिलाओं की साक्षरता में बड़ा अंतर देखा गया।
| विवरण | कुल | पुरुष | महिला |
| जनसंख्या | 25,47,184 | 13,67,125 | 11,80,059 |
| साक्षरता दर (%) | 70.36% | 81.97% | 56.89% |
| कुल साक्षर | 15,07,130 | 9,87,364 | 5,19,766 |
धार्मिक आबादी के लिहाज से जिला पूरी तरह हिंदू बहुल है, जहां 90 फीसदी से अधिक आबादी हिंदू समुदाय की है।
| धर्म | जनसंख्या प्रतिशत (%) |
| हिन्दू | 90.72% |
| मुसलमान | 8.52% |
| अन्य | 0.41% |
| ईसाई | 0.12% |
| सिख | 0.11% |
| जैन | 0.08% |
| बौद्ध | 0.03% |
2022 का चुनावी परिणाम: पांचों सीटों पर खिला था कमल
2022 के विधानसभा चुनाव में जिले की सभी पांचों सीटों पर भाजपा प्रत्याशियों ने जीत हासिल की थी। मांट जैसी सीट, जहां दशकों से गैर-भाजपा दलों का कब्जा था, वहां भी भाजपा ने पहली बार जीत दर्ज की।
| विधानसभा सीट | विजयी उम्मीदवार | पार्टी | प्राप्त वोट | निकटतम प्रतिद्वंदी (पार्टी) | प्राप्त वोट | जीत का अंतर |
| छाता | चौधरी लक्ष्मी नारायण | BJP | 1,24,414 | तेजपाल सिंह (RLD) | 75,466 | 48,948 |
| मांट | राजेश चौधरी | BJP | 83,958 | श्याम सुंदर शर्मा (BSP) | 74,378 | 9,580 |
| गोवर्धन | मेघश्याम सिंह | BJP | 1,00,199 | राजकुमार रावत (BSP) | 57,692 | 42,507 |
| मथुरा | श्रीकांत शर्मा | BJP | 1,58,859 | प्रदीप माथुर (INC) | 49,056 | 1,09,803 |
| बलदेव (SC) | पूरन प्रकाश | BJP | 1,08,414 | बबिता देवी (RLD) | 83,159 | 25,255 |
विधानसभा वार चुनावी विश्लेषण
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छाता: इस ग्रामीण व कृषि प्रधान सीट पर भाजपा के कद्दावर नेता चौधरी लक्ष्मी नारायण ने 1,24,414 वोट पाकर राष्ट्रीय लोक दल (RLD) के तेजपाल सिंह को 48,948 वोटों के बड़े अंतर से मात दी थी। बसपा के सोनपाल 30,214 वोट लेकर तीसरे स्थान पर रहे थे।
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मांट: यह सीट 2022 के चुनाव का सबसे बड़ा उलटफेर साबित हुई थी। 8 बार के दिग्गज विधायक श्याम सुंदर शर्मा (बसपा) को भाजपा के राजेश चौधरी ने 9,580 वोटों के अंतर से हराकर पहली बार इस सीट पर भगवा फहराया। यहां सपा के डॉ. संजय लाठर 60,585 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे थे।
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गोवर्धन: तीर्थ क्षेत्र से जुड़ी गोवर्धन सीट पर भाजपा के मेघश्याम सिंह ने 1,00,199 वोट हासिल कर बसपा के राजकुमार रावत को 42,507 वोटों से हराया था। आरएलडी के प्रीतम सिंह 55,679 वोटों के साथ तीसरे नंबर पर रहे।
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मथुरा सदर: शहर की इस हाई-प्रोफाइल सीट पर पूर्व ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने रिकॉर्ड 1,58,859 वोट पाकर लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की। उन्होंने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रदीप माथुर को 1,09,803 वोटों के ऐतिहासिक अंतर से पराजित किया। बसपा के एस.के. शर्मा 31,551 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे थे।
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बलदेव (SC): सुरक्षित सीट बलदेव पर भाजपा के पूरन प्रकाश ने 1,08,414 वोट पाकर आरएलडी प्रत्याशी बबिता देवी को 25,255 मतों से शिकस्त दी थी। बसपा के अशोक कुमार को 48,370 वोट मिले थे।
स्थानीय मुद्दे और सियासी समीकरण
मथुरा की राजनीति में जातीय संतुलन के साथ-साथ स्थानीय बुनियादी मुद्दे चुनाव का रुख तय करते हैं।
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यमुना स्वच्छता: मथुरा और वृंदावन के घाटों पर यमुना नदी में प्रदूषण और गंदे नालों का गिरना लंबे समय से सबसे संवेदनशील नागरिक और धार्मिक मुद्दा बना हुआ है।
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किसान और सिंचाई: छाता, मांट और बलदेव के ग्रामीण इलाकों में नहरों से टेल तक पानी की उपलब्धता, ट्यूबवेल के लिए बिजली आपूर्ति और फसलों का उचित मूल्य प्रमुख मुद्दे रहते हैं।
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तीर्थ विकास बनाम स्थानीय सुविधाएं: वृंदावन, गोवर्धन और बरसाना में लगातार बढ़ रहे तीर्थयात्रियों के दबाव के बीच स्थानीय निवासियों के लिए जाम, पार्किंग और बुनियादी नागरिक सुविधाओं का प्रबंधन चुनावी विमर्श का हिस्सा बनता है।
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व्यापारी सुरक्षा और रोजगार: शहरी मथुरा में व्यापारी वर्ग की सुरक्षा और रिफाइनरी के आसपास स्थानीय युवाओं के लिए औद्योगिक रोजगार के अवसरों की मांग लगातार उठती रही है।
