मेरठ की 7 विधानसभा सीटें, 2022 के नतीजे और हस्तिनापुर का चुनावी मिथक

33d1bb71-c8e7-4bf8-bef2-12610ec4a233
गौरव त्रिपाठी
गौरव त्रिपाठी

पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सियासत में क्रांतिधरा मेरठ की भूमिका हमेशा से बेहद असरदार मानी जाती रही है। मेरठ जिले में कुल 7 विधानसभा सीटें आती हैं— सिवालखास, सरधना, हस्तिनापुर (सुरक्षित), किठौर, मेरठ कैंट, मेरठ शहर और मेरठ दक्षिण। 2024 के लोकसभा चुनाव में अभिनेता अरुण गोविल के सांसद बनने और राष्ट्रीय लोकदल (RLD) के एनडीए (NDA) गठबंधन में शामिल होने के बाद इस पूरे क्षेत्र के समीकरणों में नया बदलाव देखने को मिला है। आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर मेरठ की सातों सीटों पर सियासी सरगर्मी बढ़ने लगी है।

जनसांख्यिकी: साक्षरता और आबादी का ढांचा

2011 की जनगणना के अनुसार मेरठ जिले की कुल आबादी 34,43,689 दर्ज की गई थी, जिसमें पुरुषों की संख्या 18,25,743 और महिलाओं की संख्या 16,17,946 थी।

  • साक्षरता दर: जिले की कुल साक्षरता दर 72.84 प्रतिशत रही। इसमें पुरुषों की साक्षरता दर 80.74 प्रतिशत और महिलाओं की 63.98 प्रतिशत दर्ज की गई थी।

  • लिंगानुपात व घनत्व: मेरठ में लिंगानुपात प्रति 1,000 पुरुषों पर 886 महिलाएं और जनसंख्या घनत्व 1,346 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर रहा।

2022 चुनाव: कांटे की टक्कर और सीटों का लेखा-जोखा

2022 के विधानसभा चुनाव में मेरठ की सीटों पर मुख्य मुकाबला भाजपा और समाजवादी पार्टी गठबंधन के बीच देखने को मिला था। शहरी सीटों पर भाजपा का मजबूत प्रभाव दिखा, जबकि ग्रामीण और मुस्लिम बहुल सीटों पर सपा गठबंधन ने कड़ी चुनौती पेश की।

विधानसभा सीट विजयी प्रत्याशी पार्टी प्राप्त वोट (वोट %) निकटतम प्रतिद्वंदी पार्टी प्राप्त वोट (वोट %) जीत का अंतर
सिवालखास गुलाम मोहम्मद RLD 1,01,749 (43.72%) मनेंद्र पाल सिंह BJP 92,567 (39.77%) 9,182
सरधना अतुल प्रधान SP 1,18,573 (48.76%) संगीत सिंह सोम BJP 1,00,373 (41.28%) 18,200
हस्तिनापुर (SC) दिनेश खटीक BJP 1,07,587 योगेश वर्मा SP 1,00,275 7,312
किठौर शाहिद मंजूर SP 1,07,104 सत्यवीर त्यागी BJP 1,04,924 2,180
मेरठ कैंट अमित अग्रवाल BJP 1,62,032 (66.28%) मनीषा अहलावत RLD 43,960 1,18,072
मेरठ शहर रफीक अंसारी SP 1,06,395 (52.77%) कमल दत्त शर्मा BJP 80,330 (39.84%) 26,065
मेरठ दक्षिण डॉ. सोमेंद्र सिंह तोमर BJP 1,29,667 मोहम्मद आदिल SP 1,21,725 7,942

सातों विधानसभा सीटों का विस्तृत चुनावी विश्लेषण

1. सिवालखास सीट: 2022 में इस सीट पर सपा-रालोद गठबंधन के प्रत्याशी गुलाम मोहम्मद ने 1,01,749 वोट हासिल कर जीत दर्ज की थी। भाजपा के मनेंद्र पाल सिंह 92,567 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रहे थे। बसपा के मुकर्रम अली उर्फ नन्हे खान तीसरे स्थान पर रहे।

2. सरधना सीट: मेरठ की सबसे चर्चित सीटों में शुमार सरधना में सपा के अतुल प्रधान ने भाजपा के कद्दावर नेता संगीत सिंह सोम को 18,200 वोटों के अंतर से पराजित किया था। अतुल प्रधान को 1,18,573 और संगीत सोम को 1,00,373 वोट मिले थे। बसपा के संजीव धामा 18,140 वोटों के साथ तीसरे नंबर पर रहे।

3. हस्तिनापुर (SC): इस सुरक्षित सीट पर भाजपा के दिनेश खटीक ने सपा के योगेश वर्मा को 7,312 मतों से शिकस्त दी। दिनेश खटीक को 1,07,587 और योगेश वर्मा को 1,00,275 वोट मिले। इस परिणाम के साथ ही हस्तिनापुर से जुड़ा वह सियासी मिथक एक बार फिर बरकरार रहा, जिसके मुताबिक जिस दल का प्रत्याशी यहां से जीतता है, लखनऊ में सरकार भी उसी की बनती है।

4. किठौर सीट: इस सीट पर बेहद नजदीकी मुकाबला देखने को मिला था। सपा के पूर्व मंत्री शाहिद मंजूर ने 1,07,104 वोट पाकर भाजपा के सत्यवीर त्यागी (1,04,924 वोट) को महज 2,180 वोटों के बारीक अंतर से हराया। बसपा के कुशल पाल मावी 31,213 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे थे।

5. मेरठ कैंट: भाजपा के इस पारंपरिक गढ़ में अमित अग्रवाल ने एकतरफा जीत दर्ज की। उन्होंने 1,62,032 वोट (66.28%) हासिल करते हुए रालोद की मनीषा अहलावत को 1,18,072 वोटों के भारी अंतर से हराया।

6. मेरठ शहर: मुस्लिम बहुल मेरठ शहर सीट पर सपा के रफीक अंसारी ने 1,06,395 वोट (52.77%) पाकर जीत दर्ज की। उन्होंने भाजपा के कमल दत्त शर्मा को 26,065 मतों से हराया। कमल दत्त शर्मा को 80,330 वोट मिले थे।

7. मेरठ दक्षिण: इस सीट पर भाजपा के डॉ. सोमेंद्र सिंह तोमर और सपा के मोहम्मद आदिल के बीच कड़ा मुकाबला हुआ। डॉ. तोमर ने 1,29,667 वोट पाकर 7,942 वोटों से जीत दर्ज की। सपा के आदिल को 1,21,725 और बसपा के कुंवर दिलशाद अली को 39,857 वोट मिले थे।

2027 की सियासी तस्वीर और जातीय समीकरण

मेरठ की राजनीति में जाट, मुस्लिम, दलित, गुर्जर, त्यागी, वैश्य और ब्राह्मण मतदाताओं की भूमिका निर्णायक मानी जाती है। 2022 में रालोद विपक्षी गठबंधन का हिस्सा थी, लेकिन अब रालोद के एनडीए में शामिल होने के बाद ग्रामीण अंचलों के सियासी समीकरणों में बदलाव की संभावना जताई जा रही है।

दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी अपने पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले के जरिए जमीन मजबूत करने में जुटी है, जबकि आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) और बहुजन समाज पार्टी की सक्रियता से कुछ सीटों पर मुकाबला त्रिकोणीय होने के आसार बन रहे हैं।