UP Election 2027: बांगरमऊ से पुरवा तक, उन्नाव की 6 सीटों की पूरी कहानी

लखनऊ और कानपुर जैसे दो बड़े औद्योगिक व प्रशासनिक केंद्रों के बीच स्थित उन्नाव जिला उत्तर प्रदेश की राजनीति में हमेशा चर्चा का केंद्र रहा है। कभी बांगरमऊ के पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर से जुड़े दुष्कर्म मामले और कानूनी कार्रवाई को लेकर, तो कभी तीखी राजनीतिक उठापटक के चलते यह जिला राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में बना रहा। वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच उन्नाव की सभी छह सीटों पर सियासी बिसात बिछनी शुरू हो गई है।
2022 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने जिले की सभी 6 सीटों पर जीत दर्ज कर विपक्ष का खाता तक नहीं खुलने दिया था।
जनसांख्यिकी: 83 फीसदी ग्रामीण आबादी और हिंदू बहुल ताना-बाना
वर्ष 2011 की जनगणना के आंकड़ों के मुताबिक, उन्नाव जिले की कुल आबादी करीब 31 लाख 10 हजार दर्ज की गई थी, जिसमें पुरुषों की संख्या लगभग 16.36 लाख और महिलाओं की संख्या 14.74 लाख रही।
-
लिंगानुपात व साक्षरता: जिले में प्रति हजार पुरुषों पर 901 महिलाएं हैं। साक्षरता दर करीब 68 प्रतिशत है, जिसमें पुरुष साक्षरता 75 प्रतिशत और महिला साक्षरता 57 प्रतिशत के आसपास दर्ज है।
-
शहरी-ग्रामीण अनुपात: जिले की लगभग 83 प्रतिशत आबादी ग्रामीण अंचलों में निवास करती है, जबकि केवल 17 प्रतिशत आबादी शहरी क्षेत्रों में रहती है।
-
धार्मिक बनावट: जिले में हिंदू आबादी करीब 88 प्रतिशत और मुस्लिम आबादी करीब 12 प्रतिशत है।
जिले की 6 सीटें: सिर्फ सफीपुर आरक्षित, बाकी पांच सामान्य
उन्नाव जिले में कुल छह विधानसभा सीटें आती हैं— बांगरमऊ, सफीपुर, मोहान, उन्नाव सदर, भगवंतनगर और पुरवा। इनमें से सफीपुर सीट अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित है, जबकि शेष पांच सीटें सामान्य वर्ग की श्रेणी में आती हैं।
2022 विधानसभा चुनाव: सभी सीटों पर भाजपा का परचम
2022 के चुनाव में भाजपा ने जिले की सभी सीटों पर निर्णायक अंतर से जीत दर्ज की थी:
-
उन्नाव (सदर): भाजपा के पंकज गुप्ता ने सपा के अभिनव कुमार को करीब 31 हजार मतों से हराया। कांग्रेस ने यहां उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता की मां आशा सिंह को प्रत्याशी बनाया था, लेकिन वे जीत नहीं सकीं।
-
बांगरमऊ: कुलदीप सिंह सेंगर के मामले के बाद हुए उपचुनाव और फिर 2022 के आम चुनाव में भी भाजपा का कब्जा बरकरार रहा। पार्टी के श्रीकांत कटियार ने सपा के मुन्ना अल्वी को करीब 16 हजार मतों से मात दी।
-
सफीपुर (SC): भाजपा के बंबा लाल दिवाकर ने सपा के सुधीर रावत को करीब 34 हजार वोटों के बड़े अंतर से शिकस्त दी।
-
मोहान: भाजपा के ब्रजेश कुमार ने सपा की डॉ. अंचल वर्मा को भारी अंतर से हराया।
-
भगवंतनगर: भाजपा के आशुतोष शुक्ला ने सपा उम्मीदवार अंकित परिहार को करीब 43 हजार वोटों के जिले के सबसे बड़े अंतर से पराजित किया।
-
पुरवा: 2017 में बसपा से जीतने के बाद भाजपा में शामिल हुए अनिल सिंह ने 2022 में भाजपा के टिकट पर सपा के उदयराज को करीब 31 हजार वोटों से हराया।
कांग्रेस और सपा के गढ़ से भाजपा के दबदबे तक का सफर
उन्नाव की चुनावी राजनीति में समय के साथ बड़े बदलाव आए हैं। पुरवा सीट पर शुरुआती दशकों में कांग्रेस का वर्चस्व रहा, जहां से रामधीन सिंह और गया सिंह जैसे नेता कई बार विधानसभा पहुंचे। बाद में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित ने अलग-अलग दलों से यहां का प्रतिनिधित्व किया। 1993 से 2012 तक लगातार पांच बार सपा के उदयराज यादव ने इस सीट पर जीत दर्ज की थी, लेकिन 2017 में बसपा के अनिल सिंह ने यह किला ढहा दिया।
मोहान सीट का चुनावी रिकॉर्ड बेहद अलग रहा है। आजादी के बाद से अब तक हुए 17 विधानसभा चुनावों में समाजवादी पार्टी यहां कभी जीत दर्ज नहीं कर सकी है।
2017 के चुनाव में भी भाजपा ने जिले की पांच सीटों पर जीत हासिल की थी, जबकि बांगरमऊ सीट बसपा के कुलदीप सेंगर ने जीती थी, जो बाद में भाजपा में शामिल हो गए थे।
2027 की सियासी तस्वीर और स्थानीय मुद्दे
2027 के चुनाव से पहले जिले में सबसे ज्यादा चर्चा पुरवा सीट को लेकर देखने को मिल रही है, जहां मौजूदा विधायक अनिल सिंह के सामने सपा के पुराने चेहरे उदयराज यादव की चुनौती की संभावनाओं पर नजर रखी जा रही है।
चुनावी मुद्दों की बात करें तो लोनी नदी में बढ़ता प्रदूषण, सड़कों की बदहाली, ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की कमी और युवाओं में बेरोजगारी जैसे विषय स्थानीय स्तर पर अहम रहने वाले हैं। भाजपा अपने 2017 और 2022 के ट्रैक रिकॉर्ड के आधार पर संगठन को सक्रिय बनाए हुए है, जबकि समाजवादी पार्टी अपने पुराने जनाधार को समेटने और जमीनी कैडर को मजबूत करने की कोशिशों में जुटी है।
सीटों का सामाजिक और जातीय समीकरण
-
उन्नाव (सदर): सामान्य वर्ग और वैश्य समाज का प्रभाव अधिक है। दलित और पिछड़ा वर्ग भी निर्णायक भूमिका में रहते हैं।
-
बांगरमऊ: ठाकुर और अन्य पिछड़ी जातियों का प्रभाव माना जाता है। साथ ही मुस्लिम मतदाताओं की आबादी भी अहम असर डालती है।
-
सफीपुर (सुरक्षित): दलित मतदाता सबसे बड़ा समूह हैं। इनके बाद ब्राह्मण और पिछड़ा वर्ग चुनावी दिशा तय करने में भूमिका निभाते हैं।
-
मोहान: ठाकुर और ब्राह्मण मतदाताओं की संख्या चुनाव में असरदार मानी जाती है।
-
भगवंतनगर: इस सीट पर मुख्य तौर पर पिछड़ा वर्ग और सामान्य वर्ग के मतदाताओं के बीच चुनावी संतुलन बनता है।
-
पुरवा: किसी एक जाति का स्पष्ट वर्चस्व नहीं है। क्षेत्र में करीब 50 हजार ब्राह्मण मतदाताओं के साथ ठाकुर, पिछड़ा वर्ग, दलित और मुस्लिम मतदाताओं का मिलाजुला समीकरण देखने को मिलता है।
