रायबरेली में राहुल की जीत के बाद 6 विधानसभा सीटों का गणित समझिए

उत्तर प्रदेश की राजनीति में रायबरेली लंबे समय से नेहरू-गांधी परिवार का मजबूत गढ़ रहा है। 2024 के लोकसभा चुनाव में इस सीट ने एक बार फिर बड़ा सियासी संदेश दिया, जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार दिनेश प्रताप सिंह को करीब 3.90 लाख वोटों के भारी अंतर से शिकस्त दी। लेकिन लोकसभा के इस एकतरफा नतीजे के उलट विधानसभा स्तर पर कांग्रेस की सियासी जमीन बेहद कमजोर है। जिले की छह विधानसभा सीटों में से वर्तमान में कांग्रेस के पास एक भी विधायक नहीं है।
जिले की 6 सीटें और लोकसभा का भूगोल
रायबरेली जिले के प्रशासनिक दायरे में कुल छह विधानसभा सीटें आती हैं:
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बछरावां (एससी)
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हरचंदपुर
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रायबरेली सदर
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सलोन (एससी)
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सरेनी
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ऊंचाहार
इनमें से पांच सीटें रायबरेली लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती हैं, जबकि सलोन विधानसभा सीट भौगोलिक रूप से अमेठी लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है।
2022 के नतीजे: सपा को चार और भाजपा को दो सीटें
वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में जिले की छह सीटों में से कांग्रेस खाता भी नहीं खोल सकी थी। समाजवादी पार्टी ने चार सीटों— बछरावां, हरचंदपुर, सरेनी और ऊंचाहार पर कब्जा जमाया था, जबकि भाजपा ने रायबरेली सदर और सलोन की सीटें जीती थीं।
पारंपरिक रूप से कांग्रेस के प्रभाव वाली मानी जाने वाली रायबरेली सदर सीट पर भाजपा की अदिति सिंह ने सपा के राम प्रताप यादव को करीब 7,175 वोटों से हराया था। इन नतीजों ने साफ कर दिया था कि विधानसभा स्तर पर पार्टी का संगठनात्मक ढांचा कमजोर पड़ चुका था।
2024 में बदला समीकरण: सभी पांच खंडों में कांग्रेस को बढ़त
2024 के आम चुनाव में राहुल गांधी की जीत के साथ विधानसभा-वार आंकड़ों में बड़ा उलटफेर देखने को मिला। रायबरेली लोकसभा के तहत आने वाले सभी पांच विधानसभा क्षेत्रों में कांग्रेस प्रत्याशी को निर्णायक बढ़त मिली।
अकेले रायबरेली सदर विधानसभा खंड की बात करें तो राहुल गांधी को करीब 1.56 लाख वोट मिले, जबकि भाजपा प्रत्याशी को करीब 53.5 हजार वोटों से संतोष करना पड़ा। इस सीट पर अकेले कांग्रेस की बढ़त एक लाख से अधिक वोटों की दर्ज की गई।
विधानसभा चुनाव में क्या हैं बड़ी चुनौतियां?
संसदीय चुनाव के आंकड़ों को विधानसभा सीटों में तब्दील करना कांग्रेस के लिए आसान नहीं माना जा रहा है:
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कमजोर जमीनी संगठन: 2022 के नतीजों से साफ है कि विधानसभा स्तर पर बूथ प्रबंधन और स्थानीय कैडर के मामले में पार्टी को काफी काम करना बाकी है।
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सपा का मजबूत कैडर: जिले में समाजवादी पार्टी का जमीनी आधार काफी मजबूत रहा है, जिसका सीधा सबूत 2022 में उसकी चार सीटों पर जीत थी।
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ऊंचाहार का बदलता गणित: ऊंचाहार सीट से 2022 में सपा के टिकट पर जीतने वाले मनोज कुमार पांडेय ने बाद में भाजपा का समर्थन कर दिया था, जिससे उस क्षेत्र में सियासी समीकरण नए सिरे से तय हो रहे हैं।
2027 की लड़ाई: वोट ट्रांसफर और गठबंधन पर दारोमदार
लोकसभा चुनाव में मिली भारी जीत ने कार्यकर्ताओं में नया उत्साह जरूर भरा है, लेकिन 2027 के विधानसभा चुनाव की राह संगठनात्मक मजबूती पर टिकी है। कांग्रेस के लिए सबसे बड़ा इम्तिहान यह होगा कि वह राहुल गांधी की लोकसभा वाली लोकप्रियता को स्थानीय स्तर पर वोटों में कैसे बदलती है।
दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन तथा वोट ट्रांसफर की निरंतरता ही जिले की अधिकांश सीटों पर चुनावी मुकाबले की दिशा तय करेगी। वहीं भाजपा के सामने रायबरेली सदर और सलोन जैसी अपनी जीती हुई सीटों को बचाने के साथ-साथ लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को मिली बढ़त को रोकने की चुनौती रहेगी।
