पवार-ठाकरे के बाद ममता बनर्जी से मिलीं DMK नेता कनिमोझी, नई खिचड़ी?

dmk
साक्षी चतुर्वेदी
साक्षी चतुर्वेदी

द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) की वरिष्ठ नेता और लोकसभा सांसद कनिमोझी करुणानिधि ने गुरुवार सुबह कोलकाता स्थित ममता बनर्जी के आवास पर उनसे मुलाकात की। इस हाई-प्रोफाइल बैठक ने विपक्षी ‘INDIA’ गठबंधन के भीतर खलबली मचा दी है। कनिमोझी की यह मुलाकात मुंबई में शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे और दिल्ली में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (SP) के सुप्रीमो शरद पवार से मुलाकात के ठीक बाद हुई है।

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के एक वरिष्ठ नेता ने इस मुलाकात की पुष्टि करते हुए बताया कि कनिमोझी ने दक्षिण कोलकाता के कालीघाट स्थित ममता बनर्जी के आवास पर उनसे भेंट की, जहां दोनों नेताओं के बीच करीब दो घंटे तक बंद कमरे में बातचीत हुई।

क्या देश में आकार ले रहा है ‘तीसरा मोर्चा’?

बैठक के बाद दोनों ही नेताओं ने मीडिया से कोई बातचीत नहीं की और चर्चा के ब्योरे को पूरी तरह गोपनीय रखा गया है। हालांकि, सियासी गलियारों में यह कयास लगाए जा रहे हैं कि कांग्रेस से नाराज क्षेत्रीय दल अब एक अलग ‘तीसरे मोर्चे’ की रूपरेखा तैयार कर रहे हैं। जिस तरह से डीएमके नेतृत्व ने पहले उद्धव ठाकरे, फिर शरद पवार और अब ममता बनर्जी से सीधा संवाद साधा है, उससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि गैर-कांग्रेसी विपक्षी दलों की लामबंदी तेज हो रही है।

तमिलनाडु में कांग्रेस-DMK के बीच क्यों टूटा रिश्ता?

इस पूरी सियासी हलचल की जड़ तमिलनाडु की राजनीति में हुए हालिया उलटफेर से जुड़ी है:

  • TVK से कांग्रेस का हाथ मिलाना: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में अभिनेता सी. जोसेफ विजय की पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कझगम’ (TVK) ने पूर्ण बहुमत हासिल किया और विजय मुख्यमंत्री बने। इसके बाद कांग्रेस ने TVK के साथ गठबंधन कर लिया।

  • डीएमके का आरोप: कांग्रेस के इस फैसले से नाराज डीएमके ने इसे ‘विश्वासघात’ और ‘पीठ में छुरा घोंपने’ जैसा करार दिया। डीएमके का आरोप है कि सत्ता में बने रहने के लिए कांग्रेस ने रातोंरात पाला बदल लिया और अपने सालों पुराने सहयोगी को छोड़ दिया।

संसद में अलग बैठने की मांग, बिखराव की कगार पर गठबंधन

कांग्रेस के इस कदम के बाद डीएमके ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। पार्टी ने अपने सांसदों को संसद में कांग्रेस सदस्यों के साथ बैठने से मना कर दिया है। कनिमोझी ने लोकसभा अध्यक्ष को औपचारिक पत्र लिखकर डीएमके सांसदों के लिए अलग बैठने की व्यवस्था की मांग भी की है।

अब यदि डीएमके, टीएमसी और अन्य क्षेत्रीय क्षत्रपों के बीच कोई नया सियासी समीकरण बनता है, तो इसका सीधा असर राष्ट्रीय स्तर पर ‘INDIA’ गठबंधन के भविष्य पर पड़ना तय माना जा रहा है।