जानिए एनसीपी के हरिश्चंद्र सिंह ने क्यों कहा ‘समाज बांटने वाली जीत भी हार है’

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शालिनी तिवारी
शालिनी तिवारी

 राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP- अजित गुट) के प्रदेश अध्यक्ष हरिश्चंद्र सिंह ने सरकारों की नीति-निर्माण और वोट बैंक की राजनीति को लेकर एक कड़ा और स्पष्ट संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि कोई भी नई नीति या कानून बनाने से पहले सरकारों को हजार बार सोचना चाहिए, क्योंकि समाज को बांटकर हासिल की गई जीत अंत में हार ही साबित होती है।

‘एक वर्ग को खुश करने का नतीजा होता है विरोध’

हरिश्चंद्र सिंह ने अपने दशकों के राजनीतिक और जमीनी अनुभव का हवाला देते हुए कहा कि जब कोई सरकार किसी एक विशेष वर्ग, जाति या समुदाय को खुश करने के लिए नीति बनाती है, तो उसका सीधा असर समाज के सामाजिक सौहार्द पर पड़ता है। ऐसे फैसलों से दूसरे समुदाय में अन्याय और असुरक्षा की भावना पैदा होती है।

  • यह दरार पहले चुप्पी में पनपती है, फिर सोशल मीडिया पर फैलती है और अंततः सड़कों पर हिंसक प्रदर्शन और धरने का रूप ले लेती है।

  • तनावग्रस्त इलाकों में न निवेश आता है, न विकास होता है और प्रशासन का पूरा समय केवल झगड़े सुलझाने में बर्बाद हो जाता है।

जनता को सिर्फ ‘वोट बैंक’ समझने की भूल

एनसीपी नेता ने कड़े शब्दों में कहा कि सत्ताधारी दलों को यह बात दीवार पर लिख लेनी चाहिए कि ‘जनता सिर्फ वोट बैंक नहीं है।’ जब नेता और सरकारें जनता को सिर्फ आंकड़ों (इतने प्रतिशत यह जाति, इतने प्रतिशत वह समुदाय) में देखने लगते हैं, तो वे न्याय की मूल भावना को भूल जाते हैं। नियम पक्षपातपूर्ण लगने पर जनता का विश्वास टूटता है, और इस टूटे हुए विश्वास को दोबारा जोड़ना लगभग असंभव हो जाता है।

हर फैसले के ‘सामाजिक प्रभाव’ का आकलन जरूरी

सरकारों को आईना दिखाते हुए हरिश्चंद्र सिंह ने स्पष्ट किया कि राजनीति का काम सिर्फ चुनाव जीतना नहीं, बल्कि समाज को जोड़े रखना भी है। उन्होंने इसके लिए कुछ अहम सुझाव दिए:

  • सामाजिक प्रभाव का आकलन: हर महत्वपूर्ण फैसले से पहले केवल कानूनी या आर्थिक ही नहीं, बल्कि उसके ‘सामाजिक प्रभाव’ का भी गहराई से आकलन होना चाहिए।

  • विशेषज्ञों से संवाद: नीतियां बनाने से पहले विशेषज्ञों, समाज के विभिन्न वर्गों और जमीनी कार्यकर्ताओं से व्यापक चर्चा की जानी चाहिए।

  • समावेशी नीतियां: नीतियां समावेशी और संवेदनशील होनी चाहिए, जो लंबे समय के सामाजिक स्थायित्व को ध्यान में रखकर बनाई गई हों।

हरिश्चंद्र सिंह ने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी केवल बवाल होने पर विपक्ष पर आरोप लगाना नहीं है, बल्कि ऐसी स्थितियां ही पैदा न होने देना है। सरकारों को यह याद रखना चाहिए कि ‘सत्ता अस्थायी होती है और समाज स्थायी।’ जो आज एक वर्ग को खुश कर रहा है, कल उसे पूरे समाज के गुस्से का सामना करना पड़ सकता है।