टूंडला में BJP क्यों मजबूत हुई? 2012 से 2022 तक बदलता सियासी समीकरण

उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले को समाजवादी पार्टी (SP) का अभेद्य गढ़ माना जाता है। यादव और मुस्लिम मतदाताओं की बहुलता के कारण 2014 की मोदी लहर में भी सपा ने इस जिले में अपनी साख बचा ली थी। हालांकि, इसी जिले की टूंडला विधानसभा सीट का सियासी मिजाज बिल्कुल अलग है। यहां सपा को आखिरी बार साल 2002 में मामूली अंतर से जीत मिली थी। इसके बाद हुए आखिरी चार विधानसभा चुनावों में सपा को लगातार हार का मुंह देखना पड़ा है।
90 के दशक की शुरुआत के बाद से सपा ने यहां केवल दो चुनाव जीते हैं और दोनों में ही जीत का अंतर बेहद कम रहा। पिछले दो चुनावों (2017 और 2022) में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने यहां भारी मतों के अंतर से जीत दर्ज की है, जबकि 2007 और 2012 के चुनावों में बहुजन समाज पार्टी (BSP) का परचम लहराया था।
पिछले तीन विधानसभा चुनावों के नतीजे और आंकड़े
1. टूंडला विधानसभा चुनाव परिणाम (2022)
2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने प्रेमपाल सिंह धनगर को मैदान में उतारा था। उन्होंने सपा प्रत्याशी राकेश बाबू को करीब 47 हजार से अधिक वोटों के अंतर से करारी शिकस्त दी।
| प्रत्याशी | पार्टी | प्राप्त वोट |
| प्रेमपाल सिंह धनगर (विजेता) | भारतीय जनता पार्टी | 1,22,881 |
| राकेश बाबू | समाजवादी पार्टी | 75,190 |
| अमर सिंह | बहुजन समाज पार्टी | 40,977 |
2. टूंडला विधानसभा चुनाव परिणाम (2017)
साल 2017 के चुनाव में आगरा लोकसभा सीट से मौजूदा सांसद सत्यपाल सिंह बघेल (एसपी सिंह बघेल) ने बीजेपी के टिकट पर टूंडला से चुनाव लड़ा था। उन्होंने बसपा के राकेश बाबू को बड़े अंतर से हराया था, जबकि सपा तीसरे स्थान पर खिसक गई थी।
| प्रत्याशी | पार्टी | प्राप्त वोट |
| सत्यपाल सिंह बघेल (विजेता) | भारतीय जनता पार्टी | 1,18,584 |
| राकेश बाबू | बहुजन समाज पार्टी | 62,514 |
| शिव सिंह चक | समाजवादी पार्टी | 54,888 |
3. टूंडला विधानसभा चुनाव परिणाम (2012)
2012 के चुनाव में बसपा के राकेश बाबू ने लगातार दूसरी बार इस सीट पर जीत दर्ज की थी (2007 में भी जीते थे)। उन्होंने सपा के अखलेश कुमार को हराया था, जबकि बीजेपी तीसरे स्थान पर रही थी।
| प्रत्याशी | पार्टी | प्राप्त वोट |
| राकेश बाबू (विजेता) | बहुजन समाज पार्टी | 67,949 |
| अखलेश कुमार | समाजवादी पार्टी | 60,003 |
| शिव सिंह चक | भारतीय जनता पार्टी | 58,536 |
टूंडला विधानसभा सीट का सामाजिक और जातीय समीकरण
टूंडला विधानसभा सीट का जातीय ताना-बाना बेहद दिलचस्प है। किसी भी एक जाति का एकतरफा प्रभुत्व न होने के कारण यहां राजनीतिक दलों को गठजोड़ और सही उम्मीदवार चयन पर निर्भर रहना पड़ता है:
-
बघेल और जाटव मतदाता: इस क्षेत्र में बघेल और जाटव मतदाताओं की संख्या लगभग बराबर (करीब 60-60 हजार से अधिक) है। यही कारण है कि बसपा और बीजेपी का यहां मजबूत आधार रहा है।
-
क्षत्रिय और यादव मतदाता: क्षत्रिय जाति के करीब 40 हजार वोटर हैं और लगभग इतनी ही संख्या यादव मतदाताओं की भी मानी जाती है।
-
अन्य वर्ग: इस सीट पर कुशवाहा मतदाताओं की संख्या 18 हजार के आसपास है, जबकि करीब 15,000 ब्राह्मण मतदाता भी प्रत्याशियों की हार-जीत तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं।
