मझवां में BJP का दबदबा कैसे बना? बसपा के गढ़ से बदला सियासी समीकरण

उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल में स्थित मिर्जापुर जिला धार्मिक आस्था के साथ-साथ राज्य की राजनीति में भी खासा दखल रखता है। मां विंध्यवासिनी धाम के लिए विख्यात इस जिले में कुल पांच विधानसभा सीटें आती हैं—मिर्जापुर नगर, मझवां, चुनार, मड़िहान और छानबे (सुरक्षित)। इनमें मझवां विधानसभा सीट जिले की सबसे प्रमुख ग्रामीण सीटों में शुमार है। इस सीट का राजनीतिक मिजाज न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि पूरे विंध्य क्षेत्र के सियासी समीकरणों पर सीधा असर डालता है।
बसपा के दबदबे से भाजपा के गढ़ तक का सफर
मझवां विधानसभा का चुनावी इतिहास बड़े बदलावों का गवाह रहा है। एक दौर में यह सीट बहुजन समाज पार्टी (BSP) का मजबूत गढ़ मानी जाती थी, लेकिन बीते एक दशक में यहां के समीकरण पूरी तरह बदल चुके हैं। पिछले दो विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने यहां एकतरफा जीत दर्ज कर अपनी मजबूत जमीन तैयार की है। वहीं, समाजवादी पार्टी (SP) लगातार मुख्य मुकाबले में रहकर वापसी की राह तलाश रही है, जबकि बसपा अपने खिसके हुए जनाधार को वापस पाने की जद्दोजहद में जुटी है।
2012: जब बसपा के रमेश चंद्र बिंद ने दर्ज की थी जीत
साल 2012 के विधानसभा चुनाव में इस सीट पर बसपा का सांगठनिक दबदबा देखने को मिला था। तब बसपा उम्मीदवार रमेश चंद्र बिंद ने कड़े मुकाबले में समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी राजेंद्र प्रसाद को 9,729 मतों के अंतर से शिकस्त दी थी।
| उम्मीदवार | पार्टी | प्राप्त वोट |
| रमेश चंद्र बिंद (विजेता) | बहुजन समाज पार्टी | 83,870 |
| राजेंद्र प्रसाद | समाजवादी पार्टी | 74,141 |
| जीत का अंतर | 9,729 वोट |
2017: सुचिस्मिता मौर्य ने ढहाया बसपा का किला
2017 के विधानसभा चुनाव में प्रदेशभर में चली भाजपा की लहर का असर मझवां सीट पर साफ तौर पर नजर आया। भाजपा प्रत्याशी सुचिस्मिता मौर्य ने बसपा के तत्कालीन विधायक रमेश चंद्र बिंद को 41,159 वोटों के बड़े अंतर से मात देकर यह सीट भाजपा की झोली में डाल दी। इस चुनाव के साथ ही मझवां में बसपा का कई वर्षों पुराना वर्चस्व समाप्त हो गया।
| उम्मीदवार | पार्टी | प्राप्त वोट |
| सुचिस्मिता मौर्य (विजेता) | भारतीय जनता पार्टी | 1,07,839 |
| रमेश चंद्र बिंद | बहुजन समाज पार्टी | 66,680 |
| जीत का अंतर | 41,159 वोट |
2022: डॉ. विनोद कुमार बिंद ने दोहराई भाजपा की जीत
2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने चेहरे में बदलाव करते हुए डॉ. विनोद कुमार बिंद को चुनावी मैदान में उतारा। डॉ. बिंद ने पार्टी के भरोसे को सही साबित करते हुए समाजवादी पार्टी के रोहित शुक्ला को 33,587 वोटों के अंतर से हराया और भाजपा का परचम लगातार दूसरी बार लहराया।
| उम्मीदवार | पार्टी | प्राप्त वोट |
| डॉ. विनोद कुमार बिंद (विजेता) | भारतीय जनता पार्टी | 1,03,235 |
| रोहित शुक्ला | समाजवादी पार्टी | 69,648 |
| जीत का अंतर | 33,587 वोट |
2027 के लिए त्रिकोणीय बिसात की तैयारी
लगातार दो चुनावों में जीत दर्ज करने के बाद भाजपा मझवां में अपनी पकड़ को बनाए रखने के लिए संगठन स्तर पर सक्रिय है। दूसरी तरफ, समाजवादी पार्टी पिछले दोनों चुनावों में दूसरे स्थान पर रहने के बाद अब अंतर को पाटने और जीत हासिल करने की रणनीति पर काम कर रही है। वहीं, बसपा अपने पारंपरिक कैडर को फिर से लामबंद करने में लगी है, जिससे आगामी विधानसभा चुनाव में यहां बेहद कड़ा और दिलचस्प मुकाबला देखने को मिल सकता है।
