कतर में 3 ईरानी पायलटों की हालत बिगड़ी, जानें कैसे क्रैश हुए थे सुखोई विमान

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हुसैन अफसर
हुसैन अफसर

ईरान और कतर के बीच कैद तीन ईरानी पायलटों को लेकर कूटनीतिक और मानवीय प्रयास तेज हो गए हैं। ईरानी रेड क्रिसेंट सोसाइटी (IRCS) के अध्यक्ष पीरहोसैन कोलीवंद ने सोमवार को बताया कि कतर की रेड क्रिसेंट सोसाइटी ने इन पायलटों की तलाश और उनकी स्थिति का पता लगाने में सहयोग का आश्वासन दिया है। ईरान ने इन बंदी पायलटों की बिगड़ती शारीरिक स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए उन्हें तुरंत अस्पताल स्थानांतरित करने और वापस ईरान भेजने की मांग की है।

रेड क्रिसेंट सोसाइटी की मानवीय अपील

पीरहोसैन कोलीवंद ने कहा कि ऐसे पुख्ता सबूत मौजूद हैं जो इशारा करते हैं कि लापता तीन पायलट कतर में ही हैं। उन्होंने कतर रेड क्रिसेंट सोसाइटी से अपील की है कि वह अपने उपलब्ध सभी चैनलों और संपर्कों का इस्तेमाल कर इन पायलटों की वर्तमान स्थिति के बारे में सटीक जानकारी हासिल करे।

कोलीवंद ने इस बात पर जोर दिया कि रेड क्रिसेंट सोसाइटी और इंटरनेशनल कमिटी ऑफ द रेड क्रॉस (ICRC) जैसी मानवीय संस्थाओं की यह तटस्थ और नैतिक जिम्मेदारी है कि वे संकट में फंसे लोगों की मदद करें। उन्होंने कतर की संस्था से आग्रह किया कि वह पायलटों के परिवारों की चिंताओं को दूर करने के लिए जल्द से जल्द उनकी स्थिति स्पष्ट करे। कतरी अधिकारियों ने इस मामले में सहयोग करने और जानकारी जुटाने का वादा किया है। इसके साथ ही, दोनों देशों की रेड क्रिसेंट सोसाइटियों के बीच बचाव और राहत अभियानों, प्रशिक्षण और तकनीकी ज्ञान के आदान-प्रदान में सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।

मार्च में कतर में क्रैश हुए थे दो सुखोई लड़ाकू विमान

पायलटों के लापता होने का घटनाक्रम इस साल की शुरुआत में हुए सैन्य संघर्ष से जुड़ा है। ईरान के सशस्त्र बलों के ‘मिसिंग-इन-एक्शन सर्च कमेटी’ के कमांडर ब्रिगेडियर जनरल सैय्यद मोहम्मद बागेरज़ादेह के अनुसार, फरवरी के अंत में ईरान के खिलाफ अमेरिकी और इजरायली हमलों के बाद, 2 मार्च को ईरानी सेना के दो सुखोई Su-24 लड़ाकू विमानों ने कतर की ओर एक सैन्य मिशन के लिए उड़ान भरी थी। इनमें से कुछ अमेरिकी हमले क्षेत्र में स्थित ठिकानों से किए गए थे।

जनरल बागेरज़ादेह ने बताया कि मिशन से लौटते वक्त दुश्मन की वायु रक्षा प्रणाली (एयर डिफेंस) ने लड़ाकू विमानों को निशाना बनाया। विमानों के हिट होने के बाद पायलटों ने इजेक्ट किया। इन दो जेट्स में कुल चार पायलट सवार थे। इनमें से एक पायलट, माजिद काज़ेमी की शहादत हो गई। बाकी तीन पायलटों को कतरी बलों ने जिंदा पकड़ लिया और उन्हें बंदी बना लिया गया।

शहीद पायलट माजिद काज़ेमी का पार्थिव शरीर बाद में ईरान वापस लाया गया और जुलाई के अंत में दक्षिणी शहर शिराज में सुपुर्द-ए-खाक किया गया।

फरवरी का संघर्ष और उसके नतीजे

यह पूरा घटनाक्रम 28 फरवरी को ईरान पर हुए अमेरिकी और इजरायली हमलों की पृष्ठभूमि में हुआ है। ईरान का दावा है कि यह एक अकारण आक्रामकता थी, जिसमें इस्लामी क्रांति के नेता अयातुल्ला सैय्यद अली खामेनेई, सैन्य कमांडरों और नागरिकों को निशाना बनाया गया, और महत्वपूर्ण सैन्य व नागरिक बुनियादी ढांचे को नष्ट किया गया। इसके जवाब में, ईरान ने भी पूरे क्षेत्र में इजरायल और अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाते हुए मिसाइल और ड्रोन हमलों की झड़ी लगा दी थी।

अब, कतर में बंद इन तीन पायलटों की सुरक्षित वापसी और उनका सही स्वास्थ्य प्रबंधन ईरान के लिए एक प्राथमिकता बन गया है। रेड क्रिसेंट सोसाइटी के हस्तक्षेप से इस मानवीय मुद्दे के समाधान की उम्मीदें बढ़ी हैं।