UN वोटिंग पर अमेरिका को घेरना फ्रांस को पड़ा भारी: अब मांगी माफी

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हुसैन अफसर
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संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में अमेरिकी वोटिंग को लेकर की गई एक तीखी टिप्पणी पर फ्रांस ने खेद व्यक्त किया है। फ्रांस के यूएन मिशन द्वारा माफी मांगे जाने के बाद अमेरिका ने भी सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। इस विवाद के कारण वाशिंगटन ने फ्रांस के नए राजदूत की नियुक्ति को रोक दिया था, लेकिन अब इस कूटनीतिक गतिरोध के खत्म होने की उम्मीद है।

विवाद की शुरुआत और वह एक्स (X) पोस्ट

यह पूरा विवाद 24 जुलाई को संयुक्त राष्ट्र महासभा में हुए एक मतदान से शुरू हुआ था। अमेरिका उन 10 देशों में शामिल था, जिन्होंने यूएन मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क (Volker Turk) का कार्यकाल बढ़ाने के खिलाफ वोट किया था। इस वोटिंग में अमेरिका के साथ उत्तर कोरिया, रूस और निकारागुआ जैसे देश भी शामिल थे। वोल्कर तुर्क ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों पर कई बार सवाल उठाए थे, जिसके चलते अमेरिका ने उनके दूसरे कार्यकाल का कड़ा विरोध किया।

इस वोटिंग के बाद फ्रांस के यूएन मिशन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “अमेरिका कभी मानवाधिकारों का प्रकाशस्तंभ हुआ करता था। अब ऐसा नहीं है।” फ्रांस की इस सीधी आलोचना पर वाशिंगटन ने कड़ी आपत्ति जताई थी।

राजदूत की नियुक्ति पर लगाई रोक और वॉकआउट

फ्रांस की इस टिप्पणी का कूटनीतिक असर तुरंत देखने को मिला। विरोध दर्ज कराते हुए अमेरिकी प्रतिनिधि कुछ दिनों बाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की एक बैठक से उस वक्त वॉकआउट कर गए, जब फ्रांस के राजदूत बोलने के लिए खड़े हुए।

इतना ही नहीं, अमेरिकी विदेश विभाग ने वाशिंगटन में फ्रांस के नए दूत के रूप में ऑरेलियन लेचेवेलियर (Aurélien Lechevallier) की नियुक्ति की मंजूरी को भी रोक दिया। फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने लॉरेंट बिली की जगह लेचेवेलियर को चुना था। लेचेवेलियर वर्तमान में फ्रांसीसी विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरोट के चीफ ऑफ स्टाफ हैं। आमतौर पर राजदूत की मंजूरी एक औपचारिकता होती है, लेकिन इस विवाद के कारण यह प्रक्रिया अधर में लटकी हुई थी।

फ्रांस का स्पष्टीकरण और अमेरिका की प्रतिक्रिया

विवाद को बढ़ता देख फ्रांस के यूएन मिशन ने अपनी वेबसाइट पर एक बयान जारी कर सफाई दी है। मिशन ने कहा कि फ्रांस और अमेरिका ने हाल ही में यूएन महासभा के एक वोट पर अलग-अलग रुख अपनाया था, लेकिन यह मतभेद केवल एक वोट को लेकर था, न कि मानवाधिकारों की रक्षा को लेकर।

बयान में स्पष्ट किया गया कि किसी एक मुद्दे पर सार्वजनिक मतभेद अमेरिका के साथ फ्रांस के ऐतिहासिक गठबंधन या शांति और स्थिरता के लिए मिलकर काम करने की क्षमता पर सवाल खड़े नहीं करता।

फ्रांस के इस बयान का वाशिंगटन में स्वागत किया गया है। अमेरिकी विदेश विभाग के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर एएफपी को बताया कि अमेरिका इस बयान की सराहना करता है और साझा मूल्यों व हितों को आगे बढ़ाने के लिए साथ मिलकर काम करने को उत्सुक है।