36 घंटे में ढह गया यमन का रक्षा कवच: हूतियों ने मोखा और पेरिम द्वीप पर किया कब्जा

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शकील अहमद सैफी
शकील अहमद सैफी

यमन के लाल सागर तट पर ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने एक बड़ा सैन्य अभियान चलाकर महज 36 घंटे के भीतर रणनीतिक रूप से बेहद अहम मोखा (Mocha) बंदरगाह और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के मुहाने पर स्थित पेरिम द्वीप (मयून द्वीप) पर कब्जा कर लिया है। सीएनएन (CNN) की एक रिपोर्ट के अनुसार, महीनों की पूर्व चेतावनियों और सऊदी अरब में 100 से अधिक अमेरिकी सैन्य सलाहकारों की मौजूदगी के बावजूद जमीनी बलों को वह हवाई सुरक्षा (Air Cover) नहीं मिली, जिसकी उन्होंने मांग की थी।

इस त्वरित सैन्य उलटफेर ने सऊदी अरब और अमेरिका के साझा सुरक्षा प्रयासों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य में पहले से तनाव के बीच, अब हूतियों और ईरान के हाथ में दुनिया के दूसरे सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक गलियारे का नियंत्रण भी काफी हद तक आ गया है।

ट्रंप ने ठुकराया सऊदी क्राउन प्रिंस का अनुरोध

रिपोर्ट के मुताबिक, जब गुरुवार सुबह हूतियों ने मोखा बंदरगाह की ओर बड़ा हमला बोला, तो सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से दो बार फोन पर बातचीत की। क्राउन प्रिंस ने हूतियों के खिलाफ सीधे अमेरिकी हवाई हमले करने का अनुरोध किया था, लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप ने इससे इनकार कर दिया।

व्हाइट हाउस ने इस पर रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि अमेरिका का ध्यान अपने प्रमुख राष्ट्रीय सुरक्षा हितों और लाल सागर में नौवहन की स्वतंत्रता (Freedom of Navigation) की रक्षा पर केंद्रित है, जबकि क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों से निपटने की प्राथमिक जिम्मेदारी क्षेत्रीय साझेदारों की है। अमेरिका ने खुफिया जानकारी और टार्गेटिंग में मदद दी, लेकिन सीधे युद्ध में कूदने से हाथ पीछे खींच लिए।

100 से अधिक अमेरिकी सलाहकार, फिर भी नहीं मिला एयर सपोर्ट

सऊदी अरब में हूतियों के खिलाफ अभियान में मदद के लिए 100 से ज्यादा अमेरिकी सैन्य सलाहकार और संयुक्त बल कमान से जुड़े करीब 200 अमेरिकी कर्मी तैनात हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर भी समन्वय बैठकों के लिए सऊदी अरब में मौजूद थे।

यमन के एक वरिष्ठ सैन्य सूत्र ने बताया कि हूतियों ने बैलिस्टिक मिसाइलों और लड़ाकों की बड़ी टुकड़ियों के साथ मोखा पर चौतरफा हमला बोला था। जमीनी बलों को अमेरिकी सेंट्रल कमांड की ओर से आश्वासन दिया गया था कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है और सऊदी एयर सपोर्ट जल्द पहुंचेगा, लेकिन अंत तक कोई हवाई मदद नहीं पहुंची और मोखा का पतन हो गया। इसके अगले ही दिन पेरिम द्वीप पर भी हूतियों का झंडा लहरा गया।

‘घोस्ट ट्रूप्स’ और बिखराव ने तोड़ी यमनी सेना की कमर

मोर्चा हारने की वजह सिर्फ हवाई मदद की कमी नहीं थी, बल्कि हूती-विरोधी यमनी बलों के भीतर की अंदरूनी कमजोरियां भी थीं।

  • कागजों पर सेना, जमीन पर सन्नाटा: एक पश्चिमी खुफिया सूत्र के हवाले से बताया गया कि मोखा में तैनात बटालियनों के रजिस्टरों में भारी संख्या में ‘घोस्ट नेम्स’ (फर्जी नाम) दर्ज थे—यानी ऐसे सैनिक जो सिर्फ वेतन सूची में थे, लेकिन मोर्चे पर मौजूद नहीं थे। जमीन पर असल सैन्य क्षमता कागजों पर दर्ज संख्या का महज 20 प्रतिशत ही थी।

  • एकजुटता और कमान का अभाव: विश्लेषक मोहम्मद अल-बाशा के अनुसार, हूतियों के खिलाफ लड़ रहे विभिन्न गुटों में कोई राजनीतिक तालमेल नहीं था और न ही कोई एकीकृत कमांड-एंड-कंट्रोल ढांचा मौजूद था।

वैश्विक ऊर्जा सप्लाई और लाल सागर पर गहराया खतरा

पेरिम द्वीप बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य को दो चैनलों में विभाजित करता है, जो लाल सागर को अदन की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। खाड़ी में जारी तनाव के बीच तेल टैंकरों के लिए यह रूट और भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया था क्योंकि होर्मुज पर निर्भरता कम करने के लिए इस मार्ग का उपयोग बढ़ रहा था।

तटीय इलाकों पर कब्जे के बाद हूतियों को व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाने के लिए नए रणनीतिक ठिकाने मिल गए हैं। सैटेलाइट तस्वीरों और खुफिया इनपुट के अनुसार, हूती लड़ाके अब पूर्व दिशा की ओर आगे बढ़ने की तैयारी में हैं, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा पर संकट और गहरा गया है।