नरेंद्राचार्य- कांग्रेस की दाल नहीं गलने वाली, चुनाव के लिए हो रही राजनीति

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह द्वारा उज्जैन से अयोध्या तक निकाले जाने वाले ‘सनातन स्वाभिमान यात्रा’ के ऐलान पर धार्मिक और राजनीतिक हलकों में प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है। इसी क्रम में स्वामी नरेंद्राचार्य जी महाराज ने इस यात्रा पर तीखा तंज कसते हुए इसे राजनीतिक स्टंट करार दिया है।
‘संत समाज इसे स्वीकार नहीं करेगा’
समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत करते हुए स्वामी नरेंद्राचार्य जी महाराज ने कहा कि संत समाज इस यात्रा को बिल्कुल स्वीकार नहीं करेगा, क्योंकि यह पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित है। उन्होंने कहा, “अगर यह यात्रा राम जन्मभूमि के उद्घाटन या उससे जुड़े आयोजनों के सिलसिले में होती, तो अयोध्या के सभी निवासी इसका स्वागत करते। लेकिन दान में चोरी के कथित मुद्दों को उठाकर इसे राजनीतिक रंग देने का सनातन धर्म के अनुयायी समर्थन नहीं करेंगे।”
उन्होंने आरोप लगाया कि दिग्विजय सिंह आगामी 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर राजनीति कर रहे हैं और अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने के लिए आ रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि इन सब कोशिशों के बावजूद उत्तर प्रदेश में कांग्रेस पार्टी की दाल गलने वाली नहीं है।
क्या है दिग्विजय सिंह की ‘सनातन स्वाभिमान यात्रा’?
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने आगामी 20 अक्टूबर से उज्जैन के महाकाल मंदिर से अयोध्या तक ‘सनातन स्वाभिमान यात्रा’ निकालने की घोषणा की है। उनका दावा है कि यह यात्रा किसी राजनीतिक दल के समर्थन या विरोध में नहीं है, बल्कि पारदर्शिता, सत्य, आस्था की रक्षा और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने के लिए है।
इस यात्रा के पीछे का मुख्य मुद्दा उठाते हुए दिग्विजय सिंह ने अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे में कथित चोरी का हवाला दिया था। उन्होंने दावा किया था कि इस मामले में करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी हुई है और चढ़ावे के पैसों से निजी संपत्तियां व वाहन खरीदे गए हैं। सिंह ने आरोप लगाया था कि राम मंदिर न्यास से जुड़े लोग इस कथित लूट में शामिल हैं और सरकार चंपत राय (जिन्होंने हाल ही में न्यास के महासचिव पद से इस्तीफा दिया है) को बचाने में लगी रही। उन्होंने कहा था कि भगवान श्रीराम करोड़ों सनातनियों की आस्था के प्रतीक हैं और चढ़ावे की इस लूट को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
