होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ा तनाव, ईरान का अमेरिकी सबमरीन-ड्रोन गिराने का दावा

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Saima Siddiqui
Saima Siddiqui

पश्चिम एशिया में रणनीतिक रूप से संवेदनशील होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के प्रवेश क्षेत्र में अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव गहरा गया है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की नौसेना ने अमेरिकी सेना की आधुनिक मानवरहित पनडुब्बी (UUV) को एक विशेष खुफिया और सैन्य अभियान के दौरान जब्त करने का दावा किया है। दूसरी ओर, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने पलटवार करते हुए ईरान के पांच कच्चे तेल के टैंकरों को नष्ट करने की पुष्टि की है।

IRGC का दावा: ‘डाइव-एलडी’ पनडुब्बी और MQ-9 ड्रोन पर कार्रवाई

IRGC की आधिकारिक समाचार एजेंसी ‘सेपाह न्यूज’ के मुताबिक, कब्जे में लिए गए पानी के भीतर चलने वाले मानवरहित वाहन की पहचान ‘डाइव-एलडी’ (Dive-LD) के रूप में हुई है, जो अत्याधुनिक अंडरवॉटर तकनीक से लैस है। इसके अलावा IRGC ने एक अन्य बयान में दावा किया कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने होर्मुज स्ट्रेट के ऊपर उड़ रहे एक अमेरिकी MQ-9 रीपर ड्रोन को भी मार गिराया है।

अमेरिकी सेना ने इस घटनाक्रम पर बयान जारी कर कहा कि उसका एक अंडरवॉटर ड्रोन क्षेत्रीय जल क्षेत्र के सर्वेक्षण के दौरान तकनीकी खराबी का शिकार हुआ था। हालांकि, अमेरिकी पक्ष ने इस बात की पुष्टि नहीं की कि उक्त उपकरण ईरान के नियंत्रण में चला गया है या नहीं।

US सेंट्रल कमांड की जवाबी कार्रवाई

अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने बताया कि IRGC द्वारा अमेरिकी युद्धपोत पर किए गए हमले के जवाब में अमेरिकी सेना ने कार्रवाई की है। इस सैन्य कार्रवाई में ईरान के कच्चे तेल के पांच टैंकरों को निशाना बनाकर पूरी तरह नष्ट कर दिया गया।

राष्ट्रपति पेजेश्‍कियन बोले- आक्रमणकारियों को पछतावा होने तक जारी रहेगा प्रतिरोध

तनाव के बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्‍क‍ियन ने रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि उनका देश जंग के खिलाफ है, लेकिन अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए पूरी ताकत से जवाब देगा। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में सुरक्षा बनाए रखने का सबसे सही रास्ता युद्ध भड़काने से बचना है। पेजेश्‍कियन ने जोर देकर कहा कि जिस तरह ईरान ने अब तक आक्रमणों का सामना किया है, उसी मजबूती से उसका प्रतिरोध तब तक जारी रहेगा जब तक हमलावरों को अपने कदमों पर पछतावा न हो जाए।

कूटनीतिक पृष्ठभूमि और समयसीमा की समाप्ति

यह ताजा तनाव 28 फरवरी को ईरान के ठिकानों पर हुए हमलों और उसके बाद ईरान द्वारा की गई मिसाइल-ड्रोन जवाबी कार्रवाइयों की पृष्ठभूमि में सामने आया है। 18 जून को अमेरिका और ईरान ने क्षेत्र में शांति स्थापित करने के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए थे। उस समझौते के तहत 60 दिनों के भीतर वार्ता पूरी कर अंतिम समझौते तक पहुंचना तय हुआ था। यह निर्धारित समयसीमा 17 अगस्त को समाप्त हो चुकी है, जिसके बाद से दोनों देशों के बीच कूटनीतिक गतिरोध और सैन्य टकराव फिर से तेज हो गया है।