मरियम नवाज के बयान से खुली पाकिस्तान की अंदरूनी दरार, पंजाब पर सवाल

पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज ने हाल ही में सिंध, बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा (KPK) से लगती सीमाओं को लेकर विवादित बयान दिया है। मरियम ने अन्य प्रांतों से पंजाब आने वाले लोगों को आपराधिक गतिविधियों, अवैध तस्करी और चरमपंथ का कारण बताया है। इस बयान ने स्पष्ट कर दिया है कि सत्ता और सेना पर काबिज पाकिस्तानी पंजाबी, देश के बाकी नागरिकों को किस दोयम दर्जे की नजर से देखते हैं।
संसाधनों की लूट: बलूचिस्तान और PoK का दर्द
पाकिस्तान में कुल चार प्रांत हैं, जिनमें पंजाब सबसे शक्तिशाली है। क्षेत्रफल और संसाधनों में सबसे बड़े बलूचिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) की संपदा का उपयोग केवल पंजाब के लिए किया जा रहा है:
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PoK का भारी शोषण: यहां पैदा होने वाली करीब 3500 मेगावाट बिजली सीधे पंजाब भेज दी जाती है, जबकि PoK अंधेरे में डूबा रहता है। इसके अलावा संगमरमर, कोयला, जिप्सम और कीमती रत्नों को भी पंजाब ढोया जा रहा है।
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बलूचिस्तान का आक्रोश: खनिज भंडार का गढ़ होने के बावजूद इसका पूरा फायदा पंजाब को मिलता है। विरोध करने वालों को पाकिस्तानी फौज जबरन अगवा कर मार देती है, जिसकी गूंज संयुक्त राष्ट्र (UN) तक पहुंच चुकी है।
सिंध और खैबर पख्तूनख्वा के साथ सौतेला व्यवहार
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सिंध की नाराजगी: सिंधु नदी के पानी के बंटवारे में केंद्र सरकार सीधा फायदा पंजाब को पहुंचाती है। इसके अलावा कराची बंदरगाह, गैस और कोयले से मिलने वाले राजस्व पर स्थानीय लोगों का कोई हक नहीं है।
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खैबर पख्तूनख्वा में आतंकवाद का खेल: भारत द्वारा PoK में आतंकी ठिकानों को तबाह करने के बाद, पाकिस्तानी फौज ने आतंकवादियों (हिज्बुल और लश्कर) के कैंप खैबर पख्तूनख्वा में शिफ्ट कर दिए। यहां के पश्तून पाकिस्तानी फौज से खफा हैं, क्योंकि इलाके को जानबूझकर विकास से दूर रखा गया है।
पाकिस्तान पर कैसे हावी हुआ पंजाब?
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फौज और प्रशासन पर कब्जा: बंटवारे के वक्त पाकिस्तानी सेना में पंजाबी सैनिकों और अफसरों की संख्या सबसे अधिक थी।
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1955 की ‘वन यूनिट’ नीति: 1955 में पश्चिमी पाकिस्तान के सभी प्रांतों को मिलाकर एक प्रशासनिक यूनिट बना दी गई, जिससे पंजाब का राजनीतिक और आर्थिक प्रभाव बेतहाशा बढ़ गया।
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बांग्लादेश जैसी स्थिति की आहट: इसी पंजाबी वर्चस्व और शोषण के कारण 1971 में पूर्वी पाकिस्तान टूटकर ‘बांग्लादेश’ बन गया था। आज फिर पंजाब बाकी तीन प्रांतों को कमजोर कर रहा है, जिससे बलूच, सिंधी और पश्तून लोगों में बगावत भड़क रही है।
